हाल ही में, वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जो अल्जाइमर रोग के लक्षणों के शुरू होने का अनुमान लगाने में मदद कर सकती है। वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक "जैविक घड़ी" बनाई है, जो एक साधारण रक्त परीक्षण के माध्यम से यह बताती है कि किसी व्यक्ति को अल्जाइमर के लक्षण कब शुरू हो सकते हैं। यह प्रक्रिया अक्सर लक्षणों के पहले के वर्षों में ही भविष्यवाणी कर सकती है।
ब्लड टेस्ट से होगी अल्जाइमर की जल्द पहचान
इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने रक्त में एक विशेष प्रोटीन, जिसे p-tau217 कहा जाता है, का विश्लेषण किया। यह प्रोटीन अल्जाइमर रोग से जुड़े "प्लेक्स और टैंगल्स" (एमीलॉइड और टाऊ) के लिए एक मार्कर के रूप में कार्य करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रोटीन के स्तर से यह पता लगाया जा सकता है कि संज्ञानात्मक गिरावट कब शुरू होगी, जो 3 से 3.7 वर्षों के बीच हो सकती है। कैलन पीटरसन, जो इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं, ने कहा, "एमीलॉइड और टाऊ के स्तर पेड़ के वलयों के समान होते हैं; अगर हमें पता है कि पेड़ में कितने वलय हैं, तो हम जान सकते हैं कि उसकी उम्र कितनी है।"
कैसे हुआ शोध
इस अध्ययन में 600 से अधिक वयस्कों का विश्लेषण किया गया, जिनकी औसत उम्र 67.7 वर्ष थी। परिणामों ने दिखाया कि जैसे-जैसे लोग बड़े होते हैं, उनके मस्तिष्क की एमीलॉइड और टाऊ प्रोटीन को संभालने की क्षमता में बदलाव आता है। उदाहरण के लिए, 60 वर्षीय व्यक्ति में उच्च प्रोटीन स्तर हो सकता है, लेकिन वह 20 वर्षों तक अल्जाइमर के लक्षण नहीं दिखाता। वहीं, 80 वर्षीय व्यक्ति में समान स्तर केवल 10 वर्षों में लक्षण उत्पन्न कर सकता है।
शोध का महत्व
वर्तमान में, अल्जाइमर के जोखिम की पहचान के लिए महंगे मस्तिष्क स्कैन या आक्रामक रीढ़ की जांच की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह नया रक्त परीक्षण एक तेज, सस्ता और अधिक सुलभ विकल्प प्रदान करता है, जो डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के लिए रोग का प्रबंधन करने के तरीके को बदल सकता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस परीक्षण का उपयोग वर्तमान में मुख्य रूप से शोध सेटिंग में किया जा रहा है, लेकिन भविष्य में यह व्यक्तिगत रोगियों को उनके लक्षणों के विकास की संभावित तिथि बताने में मदद कर सकता है, जिससे वे और उनके डॉक्टर लक्षणों को रोकने या धीमा करने की योजना बना सकें।
भविष्य की दिशा
इस नए रक्त परीक्षण के विकास से अल्जाइमर रोग के प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है। चिकित्सक अब लक्षणों के गंभीर होने से पहले उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान कर सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रारंभिक पहचान का मतलब इलाज नहीं है, क्योंकि अल्जाइमर रोग का अभी तक कोई इलाज नहीं है। फिर भी, जोखिम की पहचान से मरीजों को मस्तिष्क-स्वस्थ आदतें अपनाने, हृदय संबंधी जोखिम कारकों का प्रबंधन करने और नई उपचार परीक्षणों में भाग लेने की अनुमति मिल सकती है।
इस नई तकनीक से अल्जाइमर रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसके प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
