इस खतरनाक कैंसर से जूझ रही थी लोक गायिका शारदा सिन्हा, जानिए क्यों जरूरी है कैंसर को लेकर सतर्कता

Sharda Sinha: एक प्रसिद्ध लोक गायिका के रूप में पद्म भूषण शारदा सिन्हा ने अपने गायन से देश-विदेश में भोजपुरी और मैथली लोक गीतो का वर्चस्व फैलाया था। अपने छठ गीतों के लिए मशहूर बिहार कोकिला का 5 नवंबर, मंगलवार की रात दिल्ली के AIIMS में निधन हो गया है।

National Cancer Awareness Day 2024: कैंसर एक जानेलवा बिमारी है जो शरीर की कोशिकाओं (Body Cells) से जुड़ी है। कैंसर का रोग विभिन्न प्रकारों का होता है जिसमे सबसे अधिक जानलेवा ब्लड कैंसर होता है। कैंसर के रोग से बचाव और सतर्कता के लिए सितंबर 2014 में, राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस की शुरुआत भारत के पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के द्वारा की गई थी। तब से लेकर आज तक कई जागरूकता अभियान चलाये गये और कई व्यक्तियों ने समय रहते ही अपना इलाज करवाया।

शारदा सिन्हा की कैसे हुई मौत

इस कैंसर से पीड़ित थीं शारदा सिन्हा

2018 में पद्म भूषण, 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 1991 में पद्म श्री से सम्मानित भारतीय लोक गायिका शारदा सिन्हा हम सब के बीच अब नहीं रही। 5 नवंबर को मंगलवार की रात करीब 9:20 बजे दिल्ली के AIIMS में बिहार कोकिला ने अपनी आंखरी सांस ली। काफी लम्बे समय से शारदा सिन्हा मल्टीपल मायलोमा नामक कैंसर से पीड़ित थी लेकिन दिक्कतों के बावजूद भी उन्होंने अपने संगीत को नही छोड़ा, उन्होंने कई यादगार गाने गाये हैं जो समय के अंत तक अमर रहेंगे।

क्या होता है मल्टीपल मायलोमा

यह एक प्रकार का कैंसर है जो प्लाज्मा में बनता है। प्लाज्मा शरीर में एंटीबॉडी को बनाने में कारगर होता है जिससे की शरीर में घुसने वाले बैक्टीरिया और वाइरस को खत्म किया जा सके। मानव शरीर में प्लाज्मा सेल्स का होना बहुत जरुरी होता है। मल्टीपल मायलोमा से बचने के लिए व्यक्ति को ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए।

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