Ovarian Cancer: आजकल सोशल मीडिया पर महिलाओं की सेहत को लेकर कई तरह की बातें वायरल होती रहती हैं। इन्हीं में एक दावा यह भी तेजी से फैल रहा है कि सैनिटरी पैड्स के इस्तेमाल से ओवेरियन कैंसर हो सकता है। इस तरह की खबरें कई महिलाओं के मन में डर और असमंजस पैदा कर रही हैं, खासकर उन महिलाओं में जो हर महीने नियमित रूप से सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं। 8 मई को वर्ल्ड ओवेरियन कैंसर डे (World Ovarian Cancer Day) के मौके पर एक्सपर्ट से जानें कि क्या सच में पैड्स और ओवेरियन कैंसर के बीच कोई संबंध है? इस विषय पर मेदांता हॉस्पिटल, गुरुग्राम के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में चेयरपर्सन डॉ. तेजिंदर कटारिया ने विस्तार से जानकारी दी।
Ovarian Cancer Day: क्या है पैड्स और कैंसर का कनेक्शन
क्या सैनिटरी पैड्स से कैंसर होता है
सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स में यह कहा जाता है कि सैनिटरी पैड्स में मौजूद कुछ केमिकल्स जैसे डाइऑक्सिन और सिंथेटिक तत्व शरीर के अंदर जाकर कैंसर पैदा कर सकते हैं। इन दावों को देखकर कई महिलाएं घबरा जाती हैं और उन्हें लगता है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला यह उत्पाद कहीं उनकी सेहत के लिए खतरा तो नहीं।
पैड्स से ओवेरियन कैंसर का खतरा कितना
विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि सैनिटरी पैड्स ओवेरियन कैंसर का कारण बनते हैं। महिलाओं की हाइजीन से जुड़े उत्पादों की सुरक्षा को लेकर नियामक संस्थाएं लगातार निगरानी करती हैं। यदि इनमें कुछ रासायनिक तत्व मौजूद भी होते हैं, तो उनकी मात्रा बेहद कम होती है और सामान्य उपयोग में उन्हें खतरनाक नहीं माना जाता।
डॉक्टरों का कहना है कि असली समस्या तब हो सकती है जब पैड्स को लंबे समय तक न बदला जाए या साफ-सफाई का ध्यान न रखा जाए। इससे त्वचा में जलन, रैशेज या संक्रमण की आशंका बढ़ सकती है, लेकिन इसका सीधा संबंध कैंसर से नहीं है।
आखिर किन कारणों से होता है ओवेरियन कैंसर
ओवेरियन कैंसर एक जटिल बीमारी है और इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। उम्र बढ़ना, परिवार में कैंसर का इतिहास, जेनेटिक म्यूटेशन, हार्मोनल बदलाव और लाइफस्टाइल से जुड़े कारक इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ स्पष्ट रूप से बताते हैं कि यह बीमारी बाहरी उत्पादों जैसे सैनिटरी पैड्स से नहीं होती।
हालांकि कुछ पैड्स में बेहद कम मात्रा में रसायन हो सकते हैं, लेकिन शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली इतनी कम मात्रा के संपर्क से आसानी से निपट सकती है। इसलिए केवल पैड्स के इस्तेमाल को कैंसर से जोड़ना सही नहीं माना जाता।
पीरियड्स के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
महिलाओं को अफवाहों में फंसने की बजाय सही मेंस्ट्रुअल हाइजीन पर ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर सलाह देते हैं कि सैनिटरी पैड्स को हर 4 से 6 घंटे में बदलना जरूरी है। इसके अलावा निजी अंगों की सफाई का ध्यान रखें और हमेशा भरोसेमंद एवं प्रमाणित ब्रांड्स के उत्पाद चुनें।
जो महिलाएं चाहें, वे विकल्प के तौर पर ऑर्गेनिक कॉटन पैड्स या मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर की जरूरत और आराम के अनुसार सही विकल्प चुना जाए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
अगर लगातार पेट फूलना, पेल्विक दर्द, भूख में बदलाव या शरीर में असामान्य बदलाव महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ओवेरियन कैंसर का जल्दी पता चलना इलाज को आसान बना सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसे लक्षण किसी भी महिला में हो सकते हैं, चाहे वह किसी भी तरह का मेंस्ट्रुअल प्रोडक्ट इस्तेमाल करती हो।
डर नहीं, सही जानकारी जरूरी
सैनिटरी पैड्स और ओवेरियन कैंसर को लेकर फैला डर ज्यादातर गलत जानकारी और अफवाहों पर आधारित है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे सोशल मीडिया की हर बात पर भरोसा करने की बजाय विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता दें। सही जानकारी, साफ-सफाई और जागरूकता ही अच्छी सेहत की असली कुंजी है।
