Pregabalin Drug Rule: देश में दर्द और नसों से जुड़ी बीमारियों में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवा Pregabalin को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब यह दवा बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिल सकेगी। सरकार ने इसे ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत Schedule H से हटाकर Schedule H1 में शामिल कर दिया है, जिससे इसकी बिक्री और उपयोग पर पहले से कहीं अधिक सख्त निगरानी लागू हो गई है। यह फैसला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की हालिया अधिसूचना के बाद सामने आया है, जिसमें साफ किया गया है कि दवा के दुरुपयोग और गैरकानूनी बिक्री (Pregabalin Regulation India) पर रोक लगाना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है।
Pregabalin दवा पर सरकार की सख्ती
क्या है नया नियम?
Schedule H1 में शामिल होने के बाद Pregabalin अब केवल पंजीकृत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही दी जा सकेगी। मेडिकल स्टोर्स को इसके हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बिना पर्चे दवा बेचने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। नए नियम की मानें तो दवा के पैकेट पर लाल रंग की चेतावनी भी अनिवार्य होगी, जिससे उपभोक्ता इसे बिना चिकित्सकीय सलाह के इस्तेमाल न करें।
क्यों लेना पड़ा ये अहम फैसला?
सरकार को इस दवा से संबंधित ये अहम फैलसा इसिलए लेना पड़ा क्योंकि, पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों से ऐसी रिपोर्टें सामने आईं, जिनमें Pregabalin के गलत उपयोग और बिना डॉक्टर की सलाह के अत्यधिक सेवन के मामले बढ़ते दिखे हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में इसे नशे या गलत उद्देश्य से भी इस्तेमाल करने के मामले देखने को मिले हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन बढ़ती शिकायतों और दवा की अवैध बिक्री को रोकने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। सरकार का मानना है कि दवा की आसान उपलब्धता इसके दुरुपयोग को बढ़ा रही थी।
क्या है यह दवा और क्यों होता है इस्तेमाल
Pregabalin दवा का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन स्थितियों में किया जाता है।
- नसों का दर्द (Neuropathic Pain)
- मिर्गी (Epilepsy)
- चिंता संबंधी विकार (Anxiety Disorders)
- कुछ अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं
आमतौर पर इस दवा के इस्तेमाल से नसों के दर्द में आराम मिलता है, और इसे नियंत्रित करने और मस्तिष्क की असामान्य गतिविधियों को शांत करने में मदद करती है।
क्या है दवाओं का Schedule H1
Schedule H1 में वे दवाएं शामिल होती हैं जिनका उपयोग सावधानी से और डॉक्टर की निगरानी में करना जरूरी होता है। इनमें कई एंटीबायोटिक्स, स्ट्रॉन्ग दर्द निवारक, एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं, हार्मोनल दवाएं और कुछ साइकोट्रॉपिक दवाएं शामिल होती हैं। इन दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही की जाती है और मेडिकल स्टोर्स को इनका रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल, एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस और नशे के रूप में दुरुपयोग को रोकना है।
इस दवा की विक्रि के लिए उठाए गए केंद्र सरकार के इस कदम को दवा के सुरक्षित उपयोग और बढ़ते दुरुपयोग पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Schedule H1 में शामिल होने के बाद Pregabalin की उपलब्धता भले ही पहले से कठिन हो जाएगी, लेकिन इससे मरीजों की सुरक्षा और दवा के नियंत्रित उपयोग को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
