Broken-Heart Syndrome: ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक हार्ट कंडिशन है, जो आमतौर पर स्ट्रेसफुल सिचुएशंस या एक्सट्रीम इमोशंस में होती है। यह समस्या किसी गंभीर बीमारी या सर्जरी के कारण भी ट्रिगर हो सकती है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक टेम्पररी स्थिति है। लेकिन, कुछ लोग हार्ट के हील होने के बाद भी बीमार महसूस कर सकते हैं। इस समस्या में रोगी हार्ट अटैक जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकता है जैसे चेस्ट पेन और सांस लेने में समस्या आदि। डॉक्टर इसे स्ट्रेस-इंड्यूज्ड कार्डियोमायोपैथी भी कहते हैं। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षणों के उपचार के लिए दवाईयां दी जा सकती हैं। आइए पाएं जानकारी इस सिंड्रोम के बारे में विस्तार से और जानें कि इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बारे जानें
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के कारण क्या हैं?
अगर बात करें ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के कारणों के बारे में, तो इसके सही कारणों की जानकारी नहीं है। ऐसा माना जाता है कि स्ट्रेस हॉर्मोन्स जैसे एड्रेनालाईन कुछ लोगों के हार्ट में टेम्पररी डैमेज का कारण बन सकते हैं। इसके कुछ कारण इस प्रकार हैं:
- अचानक बीमारी जैसे अस्थमा अटैक या कविड-19 इंफेक्शन
- मेजर सर्जरी
- अचानक हड्डी का टूटना
- किसी परिजन की मृत्यु या कोई अन्य लॉस
- कोई स्ट्रांग बहस
ब्रोकन-हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक के जैसे हो सकते हैं. इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:
- बेहोशी
- लो ब्लड प्रेशर
- जी मिचलाना
- असामान्य हार्टबीट
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को कैसे कंट्रोल करें?
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम से बचने और इसे कंट्रोल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना बेहद जरूरी है। फिजिकल और इमोशनल स्ट्रेस को कम करने में स्ट्रेस मैनेजमेंट और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निक्स काम के आ सकती हैं जैसे:
- योग या मेडिटेशन
- वार्म बाथ
- कम खुशबु वाली कैंडल्स
- लंबी सांस लेना और धीरे-धीरे उसे बाहर छोड़ना
इसके साथ ही रोगी के लिए हेल्दी हैबिट्स को अपनाना भी जरूरी है, जो इस प्रकार हैं:
- हेल्दी डाइट लें।
- नियमित एक्सरसाइज करें।
- रोजाना सात से नौ घंटे की नींद लें।
- परिवार,दोस्तों आदि के साथ समय बिताएं।
- समय-समय पर चेकअप और स्क्रीनिंग्स कराएं।
- अल्कोहल, स्मोकिंग आदि से बचें।
जब लोग अपने इमोशंस के बारे में बात कर रहे हों, तो उनका ब्रोकन हार्ट के बारे में बात करना सामान्य है। लेकिन, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक रियल प्रॉब्लम है और यह समस्या अचानक इमोशनल और फिजिकल स्ट्रेस के कारण बनती है। अगर आपको इससे संबंधित कोई भी लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
(डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
