No Salt Diet: नमक हमारे खाने का एक जरूरी हिस्सा है। इसमें मौजूद सोडियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, नसों को सही तरीके से काम करने और मांसपेशियों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। यानी शरीर को थोड़ी मात्रा में नमक की जरूरत होती है। लेकिन अगर जरूरत से ज्यादा नमक खाया जाए, तो यही फायदा नुकसान में बदल सकता है।
नमक छोड़ने का क्या हुआ असर (फोटो: AI)
शुरुआत में शरीर की प्रतिक्रिया
जब आप अचानक नमक कम करते हैं, तो शुरुआती कुछ दिन शरीर थोड़ा अजीब महसूस कर सकता है। हल्की कमजोरी, सिर में हल्का भारीपन या खाने में बेस्वाद लगना जैसे अनुभव हो सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर पहले ज्यादा सोडियम का आदी होता है। लेकिन कुछ दिनों बाद शरीर खुद को एडजस्ट कर लेता है।
ब्लड प्रेशर में सुधार
नमक कम करने का सबसे बड़ा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। शरीर में पानी की मात्रा संतुलित होने लगती है, जिससे ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे कम होता है। अगर किसी को हाई बीपी की समस्या है, तो यह बदलाव बहुत फायदेमंद हो सकता है।
शरीर में सूजन कम होना और किडनी पर दबाव कम
21 दिन के अंदर ही मैंने महसूस किया कि शरीर में सूजन कम हो गई है। खासकर हाथ-पैर हल्के लगने लगते हैं। ज्यादा नमक शरीर में पानी रोककर रखता है, और जब नमक कम होता है तो यह अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है। नमक कम करने से किडनी को कम मेहनत करनी पड़ती है। किडनी का काम होता है शरीर से सोडियम फिल्टर करना। जब नमक कम होता है, तो किडनी पर दबाव घटता है और लंबे समय में यह किडनी हेल्थ के लिए अच्छा होता है।
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शुरुआत में लगता है थोड़ा अलग
शुरुआत में थोड़ा अलग लगता है, लेकिन बाद में शरीर का पानी बैलेंस बेहतर हो जाता है। पहले जहां बार-बार प्यास लगती थी, वहीं धीरे-धीरे शरीर खुद को सही तरीके से हाइड्रेट रखने लगता है। इसके अलावा नमक कम करने से दिल पर दबाव कम होता है। ब्लड फ्लो बेहतर होता है और दिल को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। इससे लंबे समय में हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।
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क्या सिखाता है 21 दिन का अनुभव
21 दिन नमक कम करने से यह साफ समझ आया कि नमक जरूरी है, लेकिन सीमित मात्रा में। शरीर धीरे-धीरे बैलेंस सीख लेता है और कई मामलों में हल्का, एक्टिव और कम फूला हुआ महसूस होता है। सीधा सा मतलब ये है कि नमक छोड़ना नहीं है, बस उसे कंट्रोल में रखना है।
