Monsoon Child Health: बारिश का मौसम आते ही ज्यादातर माता-पिता बच्चों को बाहर खेलने से रोक देते हैं। उन्हें लगता है कि घर के अंदर रहने से बच्चा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। लेकिन कई घरों में ऐसा देखने को मिलता है कि बच्चा बाहर निकले बिना भी बार-बार सर्दी, खांसी, बुखार, पेट खराब या एलर्जी जैसी परेशानियों से जूझने लगता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर घर के अंदर रहने के बावजूद बच्चा बीमार क्यों पड़ रहा है? यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद के कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिशियन डॉ. सत्यप्रिय साहू कहते हैं कि मानसून में सिर्फ बाहर का मौसम ही नहीं, बल्कि घर का माहौल भी बच्चों की सेहत पर असर डालता है। अगर घर में नमी, गंदगी, कम हवा या साफ-सफाई की कमी है, तो संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।
घर में रहकर भी बरसात में बच्चे क्यों पड़ जाते हैं बीमार
घर की नमी भी बच्चों को बीमार बना सकती है
डॉ. सत्यप्रिय साहू बताते हैं कि बारिश के दिनों में घर के अंदर नमी बढ़ जाती है। इससे दीवारों, पर्दों, गद्दों और कोनों में फफूंदी और धूल जमा होने लगती है। ये चीजें बच्चों में बार-बार छींक आना, नाक बहना, खांसी, सांस फूलना या एलर्जी जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती हैं। जिन बच्चों की शरीर की सुरक्षा क्षमता अभी पूरी तरह मजबूत नहीं होती, वे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं।
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घर के अंदर भी वायरस आसानी से फैलते हैं
बरसात में पूरा परिवार ज्यादा समय घर के अंदर बिताता है। अगर घर में किसी एक व्यक्ति को सर्दी, खांसी या वायरल बुखार है, तो उसके छींकने, खांसने या सामान छूने से दूसरे लोग भी संक्रमित हो सकते हैं। अगर कमरे में ताजी हवा कम आती है, तो बीमारी फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
खाने-पीने में लापरवाही भी बन सकती है वजह
मानसून में खाना और पानी जल्दी खराब हो सकता है। अगर बच्चे को बासी खाना, खुला रखा भोजन या साफ पानी नहीं मिलता, तो उसे उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में हमेशा ताजा बना खाना खिलाएं और साफ पानी ही पिलाएं।
घर के अंदर भी पनप सकते हैं मच्छर
कूलर, गमलों, बाल्टी या किसी बर्तन में जमा पानी मच्छरों के पनपने की जगह बन सकता है। ऐसे मच्छर बच्चों को कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए घर और उसके आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें।
कब डॉक्टर के पास जाएं
डॉ. सत्यप्रिय साहू सलाह देते हैं कि घर को साफ, सूखा और हवादार रखें। जहां नमी दिखे, उसे जल्द ठीक कराएं। बच्चों को बार-बार हाथ धोने की आदत डालें। उन्हें ताजा खाना, मौसमी फल, हरी सब्जियां और पर्याप्त पानी दें ताकि शरीर मजबूत रहे।
अगर घर में कोई बीमार है, तो उसके तौलिया, बर्तन या पानी की बोतल बच्चे के साथ साझा न करें। अगर बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, बार-बार उल्टी, बहुत ज्यादा सुस्ती, खाना-पीना छोड़ देना या परेशानी कई दिनों तक बनी रहे, तो घरेलू इलाज पर भरोसा करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए। समय पर इलाज कराने से बीमारी गंभीर होने से बच सकती है।
