Male Infertility in India: अपना बच्चा होना, नेचुरली पेरेंट्स बनना यू तो बहुत आम बात लगती है। मगर कई लोगों के लिए ये महज किसी सपने से कम नहीं है। इन दिनों कम उम्र के लोगों में भी कई तरह की शारीरिक एवं मानसिक बीमारियां अपने पैर बड़ी तेजी पसार रही है। और ऐसे में यंग कपल्स का नेचुरली कंसीव करके मां-बाप बन पाना बड़ी समस्या बनता जा रहा है। जिस वजह से लोगों को आईवीएफ (IVF) और सरोगेसी (Surrogacy) जैसे मेथड्स का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। दरअसल बीते सालों में इस तरह की कई स्टडीज की गई जो इस बात का सबूत देती है कि, पिछले 40 सालों में देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मर्दों में स्पर्म काउंट (sperm count) में तेजी से गिरावट देखी गई है।
ह्यूमन रिप्रोडक्शन अपडेट की एक जर्नल में प्रकाशित हुई हालिया स्टडी में एक बार फिर सभी को, इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने को विवश कर दिया है। ये स्टडी लगभग 53 देशों द्वारा जारी किए डाटा के आधार पर स्थापित की गई है। इस डाटा को देखकर सबसे चिंताजनक बात ये है कि, स्पर्म काउंट में गिरावट के इस आंकड़े का 50 प्रतिशत पिछले 46 साल में हुआ है। जिसने साल 2000 के बाद से बहुत तेजी पकड़ ली है। इसमें नए क्षेत्रों के पुरुषों में टोटल स्पर्म काउंट और स्पर्म कंसंट्रेशन में गिरावट देखी गई है। जैसी पहले नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में देखी गई थी।
Reasons for Male Infertility, पुरुषों में बांझपन के कारण
भारत में मर्दों में होने वाले बांझपन के पीछे सबसे बड़े कारण यहां बताए गए हैं।
- तेजी से बढ़ता शहरीकरण
- खराब लाइफस्टाइल
- अत्यधिक घंटे काम करना
- कम आराम और अपने लिए कम समय मिलना
- जॉब का तनाव व स्ट्रेस
- प्रदूषित वातावरण
- मोटापा
- डायबिटीज
- कुपोषण
- ब्लड प्रेशर आदि बीमारियां
वैसे तो इस तरह की गिरावट की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन इनमें से भ्रूण का बाहरी यानी एनवायरनमेंटल टॉक्सिन के संपर्क में आना मुख्य कारणों में से एक माना जाता है। इस बात के कई सबूत हैं कि पेस्टीसाइड्स, हर्बिसाइड, हैवी मेटल, टॉक्सिक गैस, वायु प्रदूषण, खराब लाइफस्टाइल, बिगड़ी हुई डाइट, सिगरेट और शराब जैसी बुरी आदतों की वजह से पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होता है।
पुरुषों में बांझपन की समस्या
Female Infertility In India: औरतों में बांझपन की क्या वजह है
महिलाओं में बांझपन की समस्या होने के पीछे बहुत से कारण होते हैं। साधारण तौर पर औरतों में नेचुरली ही 30 की उम्र के बाद बच्चा पैदा करने के चांसेस बहुत हद तक कम हो जाते हैं। और करीब 37 की उम्र तक आते आते ऐसा बहुत तेजी से होने लगता है। सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियां, पीसीओडी, गुप्तांग का ट्यूबरक्लोसिस, फायब्रॉयड्स और समय से पहले मेनोपॉज आ जाना कुछ और बड़े कारणों में शामिल हैं।
How to treat infertility
दोनों महिलाओं और पुरुषों में इस तरह की समस्या को जीवनशैली में सुधार करके ठीक किया जा सकता है। इसमें साफ सफाई, शाकाहारी खाना, सीधा साधारण जीवन जीना, सिगरेट और शराब से दूरी बनाए रखना, एक्सरसाइज करना, प्रॉपर नींद लेना, वर्क लाइफ बैलेंस और वजन पर कंट्रोल रखना मुख्य कारक हैं।
