How Toxic Air Pollution Silently Damages The Heart: दिवाली के बाद जब हवा में पटाखों का धुआं, धूल और स्मॉग घुल जाता है, तो सांस लेना मुश्किल होने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही जहरीली हवा आपके दिल की धड़कनों को भी असामान्य रूप से बढ़ा देती है? कई लोगों को दिवाली के बाद चेस्ट टाइटनेस, सांस फूलना या ब्लड प्रेशर हाई होने की शिकायतें होती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह सब प्रदूषण की वजह से हार्ट पर बढ़ते प्रेशर का नतीजा है। हाल ही में सामने आई एक स्टडी के अनुसार, एयर पॉल्यूशन हृदय रोगों के मामलों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है, खासतौर पर त्योहारों के बाद जब हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है।
दिवाली के बाद क्यों बढ़ जाती हैं दिल की धड़कनें
पटाखों का धुआं बनाता है हवा को जहरीला
दिवाली के दौरान और उसके बाद हवा में PM2.5 और PM10 जैसे हानिकारक कणों की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि हमारे फेफड़ों और ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं। जब ये खून में मिलते हैं, तो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ा देते हैं, जिससे हार्ट को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। लगातार ऐसा होने पर दिल की धमनियों में सूजन आने लगती है, जो हार्ट अटैक या स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाती है।
स्मॉग से घटता ऑक्सीजन लेवल, बढ़ता दिल का प्रेशर
दिवाली के बाद जो स्मॉग छा जाता है, वह हवा में ऑक्सीजन की मात्रा घटा देता है। जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो दिल को उसे पूरे शरीर में पहुंचाने के लिए ज्यादा तेज़ी से काम करना पड़ता है। इसका असर सीधा दिल की धड़कन पर पड़ता है। डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे समय में बुजुर्ग, ब्लड प्रेशर के मरीज और हार्ट डिजीज से जूझ रहे लोगों को हार्ट फेल्योर या अरेथ्मिया जैसी स्थितियां झेलनी पड़ सकती हैं।
प्रदूषण से बढ़ता ब्लड थिकनेस और क्लॉटिंग का खतरा
जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन बढ़ जाता है। इससे ब्लड गाढ़ा होने लगता है और ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे क्लॉट अगर दिल की नसों में फंस जाएं तो यह हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं। यही वजह है कि प्रदूषण के बढ़ने के कुछ दिनों बाद हार्ट अटैक के केस बढ़ जाते हैं।
कमजोर इम्युनिटी और स्ट्रेस हार्मोन भी बनते हैं दुश्मन
प्रदूषित हवा सिर्फ फेफड़ों को नहीं, बल्कि हार्मोनल बैलेंस को भी बिगाड़ती है। शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की धड़कनें तेज होती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। यही नहीं, लंबे समय तक एक्सपोजर से इम्युनिटी भी कमजोर पड़ जाती है, जिससे हार्ट को रिकवर करने में दिक्कत होती है। यह असर खासतौर पर बुजुर्गों और डायबिटीज के मरीजों पर ज्यादा देखा जाता है।
दिवाली के बाद अपनाएं ये सावधानियां
विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के बाद कुछ साधारण सावधानियां अपनाकर आप अपने दिल को बचा सकते हैं। घर से बाहर निकलते समय एन95 मास्क पहनें, सुबह या रात की बजाय दिन में बाहर जाएं जब स्मॉग थोड़ा कम हो। हरी सब्जियां, फल और पानी ज्यादा लें, ताकि शरीर से टॉक्सिन्स निकल सकें। घर में एयर प्यूरीफायर लगाना भी मददगार होता है। और सबसे जरूरी बात, अगर छाती में दर्द, थकान या अनियमित धड़कन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
दिवाली की खुशियां जरूर मनाएं, लेकिन अपने दिल का ख्याल रखना न भूलें। पटाखों की आवाज़ भले ही कुछ घंटों में खत्म हो जाए, लेकिन उनका असर हवा और आपके दिल पर कई दिनों तक बना रहता है। थोड़ी जागरूकता और सावधानी से आप न सिर्फ अपने दिल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपने परिवार को भी प्रदूषण के खतरों से बचा सकते हैं।
