How To Protect Lungs In Delhi's Toxic Air After Diwali: दिवाली का समय हमारे लिए खुशियों का होता है, घर रोशन होते हैं, मिठाइयों की महक चारों तरफ फैली होती है, और बच्चे पटाखों के साथ मस्ती करते हैं। लेकिन दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए यह त्योहार अक्सर डर का मौसम भी बन जाता है। दिवाली पर पटाखों का धुआं, पराली जलना और ठंडी हवा मिलकर हवा को इतना जहरीला बना देते हैं कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सुबह उठते ही आंखें लाल हो जाती हैं, गले में खराश और खांसी शुरू हो जाती है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डरते हैं। लोग मास्क पहनते हैं, घर के अंदर एयर प्यूरिफायर चलाते हैं, फिर भी सांस में गहरी राहत नहीं मिलती।
जहरीली हुई दिल्ली की हवा
दिवाली के बाद हवा इतनी खराब हो जाती है कि सांस लेना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। पटाखों का धुआं और पराली जलने से निकलने वाली धूल ठंडी हवा में जमकर स्मॉग बनाती है। यह स्मॉग कई दिनों तक हवा में रहकर फेफड़ों और दिल को नुकसान पहुंचाती है।
मैक्स हॉस्पिटल से जुड़ीं डॉ. शारदा जोशी (डायरेक्टर पल्मोनोलॉजी) कहती हैं कि दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा इतनी जहरीली हो जाती है कि एक दिन बाहर रहना कई सिगरेट पीने के बराबर होता है। जिन लोगों को अस्थमा या सांस की कोई बीमारी है, उनके लिए यह वक्त बहुत खतरनाक है।
हर सुबह धुंध की मोटी परत दिखती है। AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से ऊपर चला जाता है, जो ‘Severe’ यानी बहुत खतरनाक कैटेगरी में आता है। लोग घर से बाहर निकलने में डरते हैं, बच्चों को खेल के लिए भेजना मुश्किल हो जाता है और बुजुर्ग घर में ही रहना पसंद करते हैं।
इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट और सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार, हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण फेफड़ों में जाकर सूजन पैदा करते हैं। इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी, एलर्जी जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं।
सांस लेना भी मुश्किल
लेकिन हो सकता है बचाव..
लेकिन अच्छी बात यह है कि हम खुद अपनी सेहत का ध्यान रख सकते हैं। अगर सही तरीके अपनाएं जाएं तो फेफड़ों को मजबूत किया जा सकता है, शरीर को अंदर से साफ रखा जा सकता है और प्रदूषण के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी ऐसे आसान और नेचुरल उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर आप दिवाली और उसके बाद की हवा में भी सुरक्षित रह सकते हैं।
योग से कैसे करें फेफड़े मजबूत
एक्सपर्ट्स की राय में योग सिर्फ एक्सरसाइज नहीं है, यह शरीर की नैचुरल थेरेपी है। जब आप अनुलोम-विलोम, कपालभाति या भ्रामरी प्राणायाम और नाड़ी शोधन करते हैं, तो फेफड़ों में नई हवा जाती है और शरीर का ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है। इससे फेफड़ों की सफाई होती है और प्रदूषण का असर कम होता है। डॉ. शारदा जोशी कहती हैं, 'योग से फेफड़े प्रदूषण का असर सहने में सक्षम बन जाते हैं। बस इसे पार्क में नहीं, साफ कमरे में करें ताकि प्रदूषित हवा से बचा जा सके।' ऐसे में कुछ सरल टिप्स आपके काम आ सकती हैं,
- रोज 10 मिनट अनुलोम-विलोम, कपालभाति और नाड़ी शोधन करें।
- योग से फेफड़ों की क्षमता और ऑक्सीजन फ्लो बढ़ता है।
- सुबह या शाम को साफ कमरे में योग करें।
- योग से शरीर को प्रदूषण से लड़ने की ताकत मिलती है।
जब बाहर की हवा इतनी खराब हो, तो सबसे जरूरी है फेफड़ों को अंदर से मजबूत बनाना और इसका सबसे आसान तरीका है- योगा। हम सभी अपने बिजी शेड्यूल से 10 मिनट आसानी से निकाल सकते हैं।
योग से बनाएं फेफड़े मजबूत
शरीर की सफाई और इम्युनिटी के लिए आयुर्वेद
आयुर्वेद मानता है कि प्रदूषण से शरीर में टॉक्सिन (विषैले तत्व) जमा होते हैं। अगर इन्हें समय पर बाहर न निकाला जाए तो ये बीमारियों को बुलावा देते हैं। आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं, 'तुलसी, गिलोय, हल्दी और त्रिफला शरीर की अंदरूनी सफाई करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं।' ये आपको प्रदूषण से बचाने में कई तरह से मदद करते हैं,
- सुबह खाली पेट गुनगुना पानी, नींबू और शहद पीने से शरीर डिटॉक्स होता है।
- दिन में हल्दी वाला दूध या तुलसी की चाय लेने से प्रदूषण का असर काफी कम होता है।
- तुलसी, गिलोय, त्रिफला और हल्दी का मिश्रण शरीर से टॉक्सिन निकालते हैं।
- घी का दीया या कपूर जलाने से हवा की शुद्धता थोड़ी बढ़ती है। हालांकि, ऐसे में घर के खिड़की दरवाजे खुले रखें।
आयुर्वेद के उपाय
शरीर को प्रदूषण से बचाने की नेचुरल थेरेपी
नेचुरोपैथी यानी प्रकृति की मदद से सेहत को बनाए रखना। यह एक ऐसी चिकित्सा है जिसमें किसी दवा की जरूरत नहीं होती, बस स्टीम, नेति क्रिया और गर्म पानी जैसे आसान उपाय शरीर को प्रदूषण से बचाते हैं। डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, 'स्टीम लेने से फेफड़ों की नलियां साफ होती हैं, नेति क्रिया से नाक की धूल बाहर निकलती है, और गर्म पानी पीने से शरीर खुद टॉक्सिन बाहर निकाल देता है।' यह प्राकृतिक चिकित्सा आपके फेफड़ों को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर है,
- स्टीम थेरेपी से फेफड़ों की सफाई होती है।
- नेति क्रिया नाक में जमी धूल हटाती है।
- रोज तीन बार गर्म पानी पीने से शरीर डिटॉक्स होता है।
- हल्का व्यायाम प्रदूषण के असर को कम करता है।
नेचुरल थेरेपी
घर की चार दीवारी में कैसे लें खुलाकर सांस
डॉक्टर्स के अनुसार, घर के अंदर की हवा भी कई बार बाहर जितनी प्रदूषित होती है। ऐसे में घर में नेचुरल एयर प्यूरीफायर पौधे रखना स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा, दिन में थोड़ी देर खिड़कियां खोलें ताकि हवा बदल सके। ऐसे समय में एयर प्यूरिफायर लगाना भी उपयोगी है। नाक पर हल्का घी या नारियल तेल लगाने से धूल के कण अंदर नहीं जाते। घर के अंदर की हवा को साफ करने और प्रदूषण से बचने के लिए आप ये स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं,
- घर में एलोवेरा, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट लगाएं।
- HEPA फिल्टर एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल करें।
- नाक पर नारियल तेल या घी लगाएं।
- खिड़कियां दिन में थोड़ी देर खोलें ताकि हवा बदले।
जरूरी सावधानी
बच्चों और बुजुर्गों के लिए सावधानी
डॉ. शारदा जोशी बताती हैं, 'बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे हैं और बुजुर्गों की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए दोनों को खास बचाव की जरूरत होती है। इस स्थिति में कुछ जरूरी बातों का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।
- सुबह और रात में बच्चों को बाहर खेलने न भेजें।
- स्कूल जाते समय N95 मास्क पहनाएं।
- बुजुर्गों को रोज स्टीम लेना और गरारा करना चाहिए।
- अस्थमा या एलर्जी वाले लोग इनहेलर नियमित रूप से लें।
- बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम बाहर न भेजें।
- किसी भी दिक्कत पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
खुद की सेहत की जिम्मेदारी खुद लें
दिल्ली-एनसीआर की हवा बदलना मुश्किल है, लेकिन हम अपनी सेहत की देखभाल खुद कर सकते हैं। योग से फेफड़े मजबूत करें, आयुर्वेद से शरीर को साफ रखें और नेचुरोपैथी से उसे संतुलित बनाएं।
डॉ. चंचल शर्मा कहती हैं, 'जब आप खुद को प्रकृति के करीब रखते हैं, तो प्रकृति भी आपको सुरक्षा देती है। इस दिवाली सिर्फ घर को नहीं, अपनी सांसों को भी साफ करें। क्योंकि साफ हवा, सबसे बड़ी खुशहाली है।'
