PM2.5 Pollution Might Be Worsening Joint Inflammation: अक्टूबर आने के साथ मौसम में जरा सी ठंडक बढ़ते ही दिल्ली में सुबह-सुबह उठो तो लगता है जैसे किसी ने अदृश्य धुंध की चादर डाल दी हो। इसके बाद लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश, और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आमतौर पर हम सोचते हैं कि यह तो सिर्फ फेफड़ों की दिक्कत है। लेकिन अब डॉक्टरों ने खुलासा किया है कि ऐसा होने पर सिर्फ फेफड़ों की परेशानी ही नहीं होती है, बल्कि यह हवा हमारे जोड़ों को भी धीरे-धीरे तोड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अब वायु प्रदूषण सिर्फ 'सांस की बीमारी' का कारण नहीं रहा बल्कि गठिया (Arthritis) जैसी जोड़ों की समस्या को भी बढ़ा रहा है।
अगर आप भी सर्दियों में या स्मॉग के दिनों में जोड़ों के दर्द, अकड़न या सूजन महसूस करते हैं, तो बता दें कि यह सिर्फ ठंड का असर नहीं बल्कि हवा में घुले जहर का नतीजा भी हो सकता है। दिल्ली की हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सिर्फ फेफड़ों में नहीं, हमारे शरीर के अंदर तक जाकर सूजन और दर्द बढ़ा रहे हैं। लंबे समय तक इसका असर गठिया जैसी बीमारियों में बदल सकता है। अब जरा सोचिए, आप सुबह उठते ही घुटनों में अकड़न महसूस कर रहे हैं, तो यह कितना बुरा हो सकता है। यही वो हकीकत है जिसे हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।
दिल्ली की हवा में आखिर क्या है इतना खतरनाक?
वैशाली स्थिति मैक्स अस्पताल की श्वसन रोग विशेषज्ञ (Pulmonologist) डॉ. शारदा जोशी बताती हैं कि दिल्ली की जहरीली हवा में मौजूद कण शरीर में जाकर सिर्फ फेफड़े में ही नहीं, जोड़ों तक में सूजन फैलाते हैं। अगर आपको सुबह उठते ही घुटनों में दर्द महसूस होता है, तो इसका कारण ये हवा भी हो सकती है। आमतौर पर हम सोचते हैं कि धुंध, धुआं और गाड़ी का धुआं बस यही तो दिल्ली की हवा है। लेकिन अगर आप ऐसा सोचते हैं तो बता दें कि इसमें सिर्फ धूल नहीं, बल्कि कई छोटे-छोटे जहरीले कण हैं जो हमारे शरीर में घुसकर काम करना शुरू कर देते हैं। इन खतरनाक तत्वों की लिस्ट में शामिल हैं,
- PM2.5 और PM10: ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ सीधे ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर सकते हैं।
- नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2): यह फेफड़ों में जलन और जोड़ों में सूजन (inflammation) बढ़ाता है।
- ओजोन (O3): यह सांस लेने में दिक्कत और शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस (Oxidative stress) बढ़ाता है।
- सल्फर डाइऑक्साइड (SO2): यह फेफड़ों और हड्डियों दोनों पर असर डालता है।
कैसे बढ़ाता है जोड़ों की सूजन
PM2.5 कैसे बढ़ाता है जोड़ों की सूजन?
शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रदूषण के लगातार संपर्क में रहने से शरीर में सूजन बढ़ती है। जिन लोगों को पहले से गठिया है, उनमें दर्द और जकड़न की स्थिति और भी खराब हो जाती है। यानी, PM2.5 हमारे शरीर में साइलेंट इन्फ्लामेशन (Silent Inflammation) पैदा करता है, जो धीरे-धीरे अर्थराइटिस जैसी बीमारी में बदल सकता है।
डॉक्टर की राय में PM2.5 एक अदृश्य दुश्मन की तरह है, जो शरीर में जाकर इम्यून सिस्टम को ओवरएक्टिव बना देता है। इन कणों के कारण शरीर में सूजन पैदा करने वाले केमिकल्स (Cytokines) बढ़ जाते हैं। यही सूजन जोड़ों में दर्द, अकड़न का कारण बनती है। लोग सोचते हैं कि हवा में मौजूद ये छोटे से कण हमारे घुटनों में क्या ही करेंगे। लेकिन इनको हल्के तौर पर नहीं लिया जा सकता क्योंकि PM2.5 शरीर में जाकर इम्यून सिस्टम को ओवर एक्टिवेट कर देता है। इसके परिणामस्वरूप सूजन और दर्द की समस्या होती है।
रिसर्च और अध्ययन क्या कहते हैं?
बता दें कि सिर्फ डॉक्टर्स ही नहीं, 2025 तक मौजूद रिसर्च और अध्ययन भी वायु प्रदूषण के कारण ट्रिगर होने वाले इस खतरे की पुष्टि करते हैं। गठिया और रुमेटोलॉजी जर्नल (Arthritis & Rheumatology Journal 2022) की रिपोर्ट के अनुसार, PM2.5 और PM10 के लंबे एक्सपोजर से अर्थराइटिस का खतरा 40% तक बढ़ जाता है।
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ICMR ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रदूषित हवा शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाती है, जो इंफ्लामेशन और इम्यून डिसऑर्डर को ट्रिगर करता है। इसके अलावा, हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (Harvard School of Public Health) की एक स्टडी बताती है कि जो लोग हाई-पॉल्यूशन वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उनमें जोड़ों की समस्याएं और हड्डियों की कमजोरी आम बात है।
एक्सपर्ट्स की राय क्या कहती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण सिर्फ सांसों का नहीं बल्कि पूरे शरीर का दुश्मन बन चुका है। डॉ. शारदा जोशी कहती हैं, 'PM2.5 और अन्य प्रदूषक कण शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स को डिस्टर्ब करते हैं। इससे शरीर अपने ही टिश्यूज पर अटैक करने लगता है, यही वजह है कि गठिया जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।'
वहीं डॉ. श्रेय श्रीवास्तव के अनुसार - बुजुर्ग, महिलाएं और पुराने अर्थराइटिस पेशेंट्स को सर्दियों और स्मॉग के समय खास सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि प्रदूषण उनके जोड़ों की सूजन को और बढ़ा सकता है।'
किन लोगों को ज्यादा खतरा
प्रदूषण से गठिया के खतरे में कौन लोग सबसे ज्यादा खतरे में हैं?
प्रदूषण का असर लगभग सभी पर होता है, लेकिन कुछ लोग अधिक संवेदनशील हैं जो इसकी वजह से जोड़ों में तकलीफ जैसी परेशानियों का सामना अधिक कर सकते हैं, जैसे -
- बुजुर्ग और महिलाएं, जिनकी हड्डियां पहले से कमजोर होती हैं
- बच्चे जिनकी हड्डियां विकास की अवस्था में हैं
- गर्भवती महिलाएं
- ऑफिस या बाहर काम करने वाले लोग - जैसे ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी एजेंट्स
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग या जो पहले से अस्थमा, दिल या गठिया से पीड़ित हैं
इन लोगों में प्रदूषण का असर जल्दी दिखाई देता है, खासकर जोड़ों में सूजन, दर्द या अकड़न के रूप में।
ऐसे पहचानें लक्षण
कैसे पहचानें कि जोड़ों की सूजन प्रदूषण से बढ़ रही है?
अगर सर्दियों या प्रदूषण के दिनों में आपके जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है, तो ये संकेत आपको नजरअंदाज नहीं करने चाहिए ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा, कुछ आम समस्याएं नोटिस पर भी आपको सतर्क हो जाना चाहिए जैसे,
- सुबह उठते ही जोड़ों में जकड़न
- घुटनों, उंगलियों या कंधों में सूजन और दर्द
- हल्का बुखार या थकान महसूस होना
- प्रदूषण घटने पर दर्द का कम होना
प्रदूषण से होने वाले जोड़ों के दर्द से कैसे बचें?
हेल्थ एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि थोड़ी सावधानी और सही आदतें अपनाकर आप अपने जोड़ों को प्रदूषण के असर से बचा सकते हैं। ऐसे में आप कुछ सरल टिप्स फॉलो कर सकते हैं,
- N95 मास्क पहनें जब भी बाहर निकलें।
- घर में एयर प्यूरीफायर या पौधे (स्नेक प्लांट, पीस लिली) लगाएं।
- एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 से भरपूर फूड खाएं जैसे - अखरोट, मछली और अलसी के बीज आदि।
- रोज थोड़ा योग, स्ट्रेचिंग या हल्की एक्सरसाइज करें।
- विटामिन D और कैल्शियम की जांच करवाएं, ये हड्डियों के लिए जरूरी हैं।
- दिनभर भरपूर पानी पिएं, ताकि टॉक्सिन बाहर निकलें।
पल्यूशन डिटॉक्स टिप्स
दिल्ली जैसी सिटी में कैसे करें 'Pollution Detox'
अगर आप भी दिल्ली-एनसीआर वाले क्षेत्रों में रहते हैं, तो ऐसे में आपको बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि, कुछ सरल टिप्स फॉलो करके आप जोड़ों की समस्याओं से बच सकते हैं।
- हर सुबह घर की खिड़कियां खोलें ताकि हवा बदले।
- भाप लें और नाक साफ रखें, इससे प्रदूषक कण हटते हैं।
- गुड़, हल्दी, नींबू और गुनगुने पानी का सेवन करें, ये नैचुरल डिटॉक्स एजेंट हैं।
- घर के अंदर धूम्रपान या धूपबत्ती का धुआं न फैलने दें।
- दिनचर्या में योग और प्राणायाम जरूर शामिल करें, ये फेफड़ों और जॉइन्ट्स दोनों के लिए फायदेमंद हैं।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर किसी व्यक्ति के जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न लगातार बनी रहती है, तो ऐसे में स्थिति गंभीर होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। डॉ. श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं कि अगर दर्द दवा या आराम से भी नहीं जाता और दिनचर्या प्रभावित होती है, तो तुरंत रूमेटोलॉजिस्ट से मिलें। देरी से बीमारी और बढ़ सकती है।'
दिल्ली की हवा सिर्फ फेफड़ों की दुश्मन नहीं, अब हमारे जोड़ों की भी दुश्मन बन गई है। लेकिन छोटे-छोटे कदम जैसे मास्क पहनना, पौधे लगाना, हेल्दी डाइट और योग करना हमें इस अदृश्य दुश्मन से बचा सकते हैं।
