आंखों की बैंड बजा रहा है डिजिटल रोमांस, जानिए क्यों खतरनाक मानते हैं एक्सपर्ट्स

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल स्क्रीन पर बिताया गया समय ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि रात के समय अंधेरे में बिना रुके स्क्रीन देखने से आंखों पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। कम झपकना, निकट दूरी पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना और नीली रोशनी का संपर्क, सभी आंखों की सेहत और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

Digital Romance

आंखों के लिए कैसे खतरनाक साबित हो रहा डिजिटल रोमांस (Photo: iStock)

आजकल, सोशल मीडिया ने प्यार को व्यक्त करने और उसे संजोने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। रात में "शुभ रात्रि" का संदेश भेजना, वीडियो कॉल करना या एक-दूसरे को रील्स भेजना, अब नज़दीकी का प्रतीक बन गया है। हालांकि, इस लगातार जुड़ाव का एक नुकसान भी है। घंटों तक चमकते फोन, टैबलेट और लैपटॉप की स्क्रीन में देखने से एक डिजिटल स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न हो रही है, जिसे डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम कहा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल स्क्रीन पर बिताया गया समय ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि रात के समय अंधेरे में बिना रुके स्क्रीन देखने से आंखों पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है। कम झपकना, निकट दूरी पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करना और नीली रोशनी का संपर्क, सभी आंखों की सेहत और नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।

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