Heatwave and Mental Health: मई-जून की तपती दोपहर में सड़कें धधकती हुई, हवा में आग जैसी गर्मी और माथे पर लगातार बहता पसीना अक्सर आपने ऐसा महसूस किया होगा। ऐसे मौसम में अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़े हो जाते हैं। कभी ट्रैफिक में गुस्सा बढ़ जाता है, तो कभी घर या ऑफिस में बहस होने लगती है। इस दौरान कई लोगों को बेचैनी, थकान, नींद न आने की समस्या और तनाव जैसी समस्याएं भी महसूस होती हैं। अब सवाल यह है कि क्या बढ़ती गर्मी और हीटवेव का असर सिर्फ शरीर पर पड़ता है या यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। इस समस्या को लेकर हमने बात की फोर्टिस हॉस्पीटल फरीदाबाद, के न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. विनीत बंगा से। यदि आप भी गर्मी के दिनों में जल्दी गुस्सा हो जाते हैं, या अक्सर बिना वजह परेशानी महसूस करते हैं, तो आपको गर्मी का मेंटल हेल्थ पर असर (Heatwave Effects On Brain) जान लेना चाहिए।
हीटवेव और मेंटल हेल्थ का कनेक्शन
गर्मी में आखिर क्यों बढ़ जाता है गुस्सा
डॉ. विनीत बंगा मानते हैं कि अत्यधिक गर्मी न केवल शरीर को बल्कि दिमाग और भावनाओं को भी प्रभावित करती है। यही वजह है कि हीटवेव के दौरान लोगों में गुस्सा, तनाव, चिंता और मानसिक थकावट बढ़ सकती है। मनोचिकित्सकों के अनुसार जब शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ़ने लगता है, तो दिमाग को उसे नियंत्रित करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन जैसे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है। इससे इंसान जल्दी चिड़चिड़ा महसूस करने लगता है।
डॉ. विनीत बंगा की मानें तो तेज गर्मी में शरीर लगातार पानी और एनर्जी खोता रहता है। ऐसे में डिहाइड्रेशन होने पर दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे धैर्य की कमी और व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर रिएक्शन देना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यही कारण है कि हीटवेव के दिनों में सड़क झगड़े, घरेलू विवाद और आक्रामक व्यवहार के मामले बढ़ जाते हैं। आपको गर्मी में अक्सर ऐसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं-
- छोटी-छोटी बातों पर जल्दी गुस्सा आना
- चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस होना
- तनाव और एंग्जायटी बढ़ना
- धैर्य और सहनशीलता में कमी आना
- मूड स्विंग्स और भावनात्मक अस्थिरता बढ़ना
- थकान, सुस्ती और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होना
नींद की कमी का असर
गर्मी का सबसे बड़ा असर हमारी नींद पर दिखाई देता है। रात में तापमान अधिक होने से अच्छी और गहरी नींद नहीं आ पाती है। ऐसा लगातार कई दिनों तक खराब नींद होने से मूड स्विंग्स, थकान और एंग्जायटी की समस्या बढ़ सकती है।
मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नींद पूरी न होने पर दिमाग का इमोशनल कंट्रोल कमजोर पड़ने लगता है। इससे व्यक्ति जल्दी गुस्सा करता है और उसकी सहनशीलता कम हो जाती है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर और ज्यादा दिखाई देता है।
हीटवेव और डिप्रेशन का संबंध
कई हेल्थ रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अत्यधिक गर्मी मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों की स्थिति को और खराब कर सकती है। इसके मौसम में डिप्रेशन, एंग्जाइटी और बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित मरीजों में हीटवेव के दौरान लक्षण बढ़ सकते हैं।
डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, कुछ मानसिक रोगों में दी जाने वाली दवाइयां शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में मरीजों को जल्दी थकान, चक्कर और बेचैनी महसूस हो सकती है। इसके अलावा कई बार अत्यधिक गर्मी आत्महत्या के विचारों और भावनात्मक अस्थिरता को भी बढ़ा सकती है। इसलिए मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों को गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
क्या है एक्सपर्ट्स की सलाह
हीटवेव के दौरान सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, तेज गर्मी चिड़चिड़ापन, तनाव, घबराहट और थकान बढ़ा सकती है। ऐसे में शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी, नारियल पानी और छाछ जैसे पेय लेने चाहिए। अच्छी नींद मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है, इसलिए कमरे को ठंडा रखें और रात में स्क्रीन टाइम कम करें। ज्यादा चाय, कॉफी और शराब से बचना चाहिए क्योंकि ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं। मेडिटेशन, योग और गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज तनाव कम करने में मदद करती हैं। यदि बेचैनी या उदासी लगातार बनी रहे, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
जरूरी टिप्स
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
- नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी लें
- अच्छी और पूरी नींद लें
- कैफीन और अल्कोहल से दूरी रखें
- मेडिटेशन और योग करें
- स्क्रीन टाइम कम करें
- मानसिक परेशानी बढ़ने पर एक्सपर्ट से सलाह लें
बदलते मौसम में बढ़ती मानसिक समस्याएं
तेज गर्मी अब केवल मौसम की समस्या बनकर नहीं रह गई है। बल्कि इसका साफ असर हमारी सेहत पर भी दिखने लगा है। जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में हीटवेव की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में अत्यधिक गर्मी केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं रहेगी, बल्कि यह पब्लिक हेल्थ और मानसिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बन सकती है।
