क्या आपको अक्सर थकान महसूस होती है? थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूल जाती है? बाल तेजी से झड़ रहे हैं या नाखून पहले से ज्यादा कमजोर हो गए हैं? अगर ऐसा है तो इसे सिर्फ काम का तनाव, नींद की कमी या कमजोरी समझकर इसे नजरअंदाज न करें। शरीर में आयरन की कमी (iron deficiency) भी इन समस्याओं की वजह हो सकती है। आयरन हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। इसकी मदद से ही हीमोग्लोबिन बनता है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। ऐसे में शरीर में आयरन कम होने पर कई तरह के संकेत दिखाई देने लगते हैं।
शरीर में आयरन कम होने पर दिखते हैं ये संकेत (फोटो: AI)
गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पलानीअप्पन मणिकम (Dr. Palaniappan Manickam) जो यूट्यूब पर Dr. Pal के नाम से फेमस हैं अपने यूट्यूब वीडियो में आयरन की कमी के लक्षण, इसके कारण, खान-पान और इलाज के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने यह भी समझाया कि लगातार आयरन की कमी को सिर्फ सप्लीमेंट्स लेकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसके पीछे कोई दूसरी गंभीर वजह भी हो सकती है।
आयरन शरीर के लिए क्यों जरूरी है
डॉ. पलानीअप्पन मणिकम बताते हैं- आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन का काम खून के जरिए ऑक्सीजन को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है। जब शरीर में आयरन कम होने लगता है तो हीमोग्लोबिन भी प्रभावित हो सकता है और शरीर के ऊतकों तथा मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यही वजह है कि आयरन की कमी होने पर शुरुआत में थकान और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। धीरे-धीरे इसके दूसरे संकेत भी सामने आने लगते हैं।
हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना
आयरन की कमी का सबसे आम संकेत लगातार थकान महसूस होना है। खास बात यह है कि यह सामान्य थकान जैसी नहीं होती। पर्याप्त आराम करने के बाद भी व्यक्ति खुद को थका हुआ महसूस कर सकता है। छोटा-मोटा काम करने, थोड़ी दूर चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर भी कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। कई लोग इसे तनाव या ज्यादा काम का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
चेहरा या त्वचा पीली पड़ना
आयरन की कमी का एक और संकेत त्वचा का सामान्य से ज्यादा पीला या फीका दिखाई देना है। शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर खून का लाल रंग भी कम नजर आ सकता है। डॉक्टर पलानीअप्पन मणिकम के मुताबिक, निचली पलक को हल्का नीचे खींचकर देखा जाए तो अंदर का हिस्सा सामान्य से कम लाल और ज्यादा फीका दिखाई दे सकता है। हालांकि, सिर्फ इस संकेत के आधार पर आयरन की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए जांच जरूरी है।
बर्फ या दूसरी अजीब चीजें खाने का मन करना
आयरन की कमी से जुड़ा एक हैरान करने वाला संकेत ऐसी चीजें खाने की इच्छा होना है जो खाने की चीज नहीं हैं। कुछ लोगों को बर्फ चबाने, कच्चे चावल या मिट्टी जैसी चीजें खाने की इच्छा हो सकती है। इसे पिका (Pica) कहा जाता है और इसका संबंध आयरन की कमी से देखा गया है। गर्भावस्था के दौरान भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।
नाखून कमजोर और चम्मच जैसे हो जाना
अगर आपके नाखून अचानक पतले, कमजोर और आसानी से टूटने लगे हैं तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लंबे समय तक आयरन की कमी रहने पर नाखूनों की बनावट में बदलाव आ सकता है। कुछ मामलों में नाखून बीच से अंदर की तरफ मुड़ने लगते हैं और उनका आकार चम्मच जैसा दिखाई दे सकता है। इसे स्पून शेप्ड नेल्स कहा जाता है।
बाल तेजी से झड़ना
आयरन की कमी का असर बालों पर भी पड़ सकता है। शरीर में आयरन का स्तर कम होने पर बालों के सामान्य ग्रोथ साइकल पर असर पड़ सकता है और ज्यादा बाल झड़ने लग सकते हैं। अगर अचानक बाल पहले से ज्यादा टूटने या झड़ने लगे हैं, तो सिर्फ हेयर केयर प्रोडक्ट बदलने के बजाय शरीर में आयरन समेत दूसरे पोषक तत्वों की स्थिति भी जांच करवानी चाहिए।
बार-बार संक्रमण होना
आयरन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी महत्वपूर्ण है। शरीर में इसकी कमी होने पर इम्यून सिस्टम के काम करने के तरीके पर असर पड़ सकता है। ऐसे में कुछ लोगों को बार-बार संक्रमण या बीमारी होने की शिकायत हो सकती है। हालांकि, बार-बार बीमार पड़ने की कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
शरीर में आयरन की कमी क्यों होती है?
आयरन की कमी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे पहला कारण खान-पान में पर्याप्त आयरन न मिलना है। अगर डाइट संतुलित नहीं है तो शरीर को जरूरत के मुताबिक आयरन नहीं मिल पाता। शाकाहारी लोगों में भी अगर डाइट ठीक तरह से प्लान नहीं की गई है तो आयरन की कमी हो सकती है। पौधों से मिलने वाला आयरन शरीर में मांस और दूसरे पशु स्रोतों से मिलने वाले आयरन की तुलना में कम आसानी से अवशोषित होता है।
दूसरा कारण शरीर में आयरन का ठीक से अवशोषित न होना है। सीलिएक डिजीज, क्रोहन डिजीज जैसी कुछ आंतों की बीमारियों में शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता। तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण कारण खून की कमी या ब्लड लॉस है। महिलाओं में ज्यादा मासिक धर्म के कारण आयरन की कमी हो सकती है। वहीं कुछ मामलों में पाचन तंत्र में धीरे-धीरे हो रही ब्लीडिंग भी इसकी वजह बन सकती है।
लगातार आयरन की कमी को नजरअंदाज न करें
डॉ. पलानीअप्पन मणिकम के मुताबिक, आयरन की कमी होने पर सिर्फ आयरन की गोलियां लेना ही हमेशा पर्याप्त नहीं होता। यह पता लगाना भी जरूरी है कि शरीर में आयरन कम क्यों हो रहा है। खासकर वयस्कों में अगर आयरन की कमी बार-बार हो रही है या सप्लीमेंट लेने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेकर इसके कारण की जांच करवानी चाहिए। कुछ मामलों में पाचन तंत्र में छिपी ब्लीडिंग भी इसकी वजह हो सकती है।
आयरन की कमी की जांच कैसे होती है?
आयरन की कमी का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के मुताबिक ब्लड टेस्ट करवाते हैं। इनमें हीमोग्लोबिन और आयरन स्टोर्स से जुड़े टेस्ट शामिल हो सकते हैं। फेरिटिन (Ferritin) शरीर में जमा आयरन की स्थिति के बारे में जानकारी देने वाला महत्वपूर्ण टेस्ट है। रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर तय करते हैं कि व्यक्ति को डाइट में बदलाव, आयरन सप्लीमेंट या किसी अन्य उपचार की जरूरत है या नहीं।
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आयरन की कमी में क्या खाएं?
अगर आप नॉन-वेज खाते हैं तो मांस जैसे कुछ खाद्य पदार्थ आयरन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। वहीं शाकाहारी लोगों के लिए पालक, दालें, बीन्स और टोफू जैसे विकल्प डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को बेहतर बनाने के लिए इन्हें विटामिन सी वाले खाद्य पदार्थों के साथ लेना फायदेमंद हो सकता है। खाने में नींबू, टमाटर या दूसरे खट्टे फल शामिल किए जा सकते हैं।
वहीं भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने से बचना बेहतर है, क्योंकि इससे आयरन के अवशोषण पर असर पड़ सकता है। कैल्शियम और आयरन को एक साथ लेने से भी इनके अवशोषण में कमी आ सकती है, इसलिए सप्लीमेंट्स हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लें।
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आयरन की कमी और कैंसर का क्या संबंध है?
आयरन की कमी का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर है। लेकिन अगर किसी वयस्क में आयरन की कमी लगातार बनी हुई है, बार-बार हो रही है या इलाज के बावजूद ठीक नहीं हो रही है तो इसके पीछे होने वाले कारण की जांच करना बेहद जरूरी है।
डॉ. पलानीअप्पन मणिकम ने अपने वीडियो में एक 44 वर्षीय महिला का उदाहरण भी बताया, जिन्हें लंबे समय से गंभीर एनीमिया था और आयरन लेने के बावजूद उनके स्तर में सुधार नहीं हो रहा था। बाद में जांच के दौरान उनकी आंत में बड़ी समस्या का पता चला। इस उदाहरण से यह समझना जरूरी है कि लंबे समय तक आयरन की कमी को सिर्फ सप्लीमेंट्स से दबाने के बजाय उसके मूल कारण का पता लगाना भी जरूरी है।
