आजकल प्लास्टिक हमारी लाइफस्टाइल में घुल-मिल चुका है, लेकिन पैकेज्ड फूड, प्लास्टिक की बोतलों और टिफिन डिब्बों के ज़रिए बीपीए और थैलेट्स जैसे हानिकारक रसायन हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। ये रसायन एंडोक्राइन डिसरप्टर्स कहलाते हैं, जो हमारे शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ते हैं। फेमस गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी के अनुसार, ये केमिकल्स हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम, लिवर, आंतों के माइक्रोबायोम और मेटाबॉलिज्म पर बेहद बुरा असर डालते हैं।
अपनी थाली से दूर करें 'जहर', गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताए प्लास्टिक केमिकल्स घटाने के गोल्डन रूल्स (Photo: iStock)
अपनी डेली डाइट और लाइफस्टाइल से इन केमिकल्स के प्रभाव कम करने के लिए डॉ. सौरभ सेठी ने कुछ उपाय बताए हैं:
प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म न करें
माइक्रोवेव या ओवन में प्लास्टिक के कंटेनर में खाना गर्म करने से गर्मी के कारण प्लास्टिक से बीपीए और थैलेट्स निकलकर सीधे खाने में मिल जाते हैं। हमेशा कांच या सेरेमिक के बर्तनों का ही उपयोग करें।
कांच या स्टील का इस्तेमाल
गर्म चाय, कॉफ़ी, सूप या ताजा बना खाना कभी भी प्लास्टिक के डिस्पोजेबल कप या पॉलिथीन में न रखें। गर्म तासीर से रसायनों का भोजन में घुलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। पानी और अन्य पेय पदार्थों के लिए स्टेनलैस स्टील या कांच की बोतलों को प्राथमिकता दें।
पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड से दूरी
कैन में मिलने वाले खाद्य पदार्थों की भीतरी परत में अकसर BPA की कोटिंग होती है। इसके अलावा, प्लास्टिक में पैक रेडी-टू-ईट भोजन में ये रसायन मौजूद हो सकते हैं। जितना संभव हो, ताज़ा, स्थानीय और अनप्रोसेस्ड फूड चुनें।
नॉन-स्टिक कुकवेयर का सीमित उपयोग
नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग जब बहुत ज्यादा गर्म होती है या उसमें खरोंच आ जाती है, तो विषैले तत्व भोजन में शामिल हो सकते हैं। खाना पकाने के लिए लोहे, स्टेनलेस स्टील या मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित है।
नॉन-पोरस चीजों का इस्तेमाल
भोजन के भंडारण के लिए प्लास्टिक डिब्बों की जगह एयरटाइट ग्लास जार या सिलिकॉन बैग्स का इस्तेमाल करें। ये रसायन-मुक्त होते हैं और भोजन की ताजगी को सुरक्षित रखते हैं।
छानने और धोने की सही आदतें
फलों और सब्ज़ियों पर लगे कीटनाशकों और प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों को साफ करने के लिए उन्हें बहते पानी में अच्छी तरह धोएं।
वैसे तो एक दिन में प्लास्टिक को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है, लेकिन रसोई और खाने-पीने की आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके हम शरीर में जाने वाले इन विषैले रसायनों की मात्रा को काफी हद तक घटा सकते हैं। यह न केवल आपके पाचन तंत्र को स्वस्थ रखेगा, बल्कि लंबे समय में गंभीर बीमारियों से भी बचाएगा।
