Sugar and Oil Boards Kya Hain: बारिश के मौसम में 10 पकौड़े खा लिए, मुंह मीठा करने के लिए एक गुलाब जामुन खा लिया- फिर इनको पचाने के लिए एक कोल्ड ड्रिंक पी ली। देखने में ये डाइट थोड़ी सी है लेकिन इसी बहाने क्या आप जानते हैं आप 686 kcal, 64 ग्राम चीनी और 26 ग्राम फैट ले चुके हैं। आपकी इस जरा सी शौकिया स्नैकिंग ने दिन भर कर की जरूरत की लगभग आधी कैलोरीज, जरूरत से दोगुना शुगर और तेल आपके पेट में पहुंचा दिया है।
क्या हैं शुगर और ऑयल बोर्ड, क्यों और कहां लगाए जाएंगे (Pic: Canva)
शुगर एंड ऑयल बोर्ड कहां लगाए जाएंगे
खाने के मामले में यही लापरवाही भारत को विश्व की डायबिटीज कैपिटल चुकी है। इसी के साथ ही देश में कैंसर, हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर, मोटापे, फैटी लीवर से ग्रसित मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। इन्हीं बातों को देखते हुए और प्रधान मंत्री के फिट इंडिया मिशन के तहत 10 प्रतिशत तेल कम की अपील को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से शुगर और ऑयल बोर्ड लगाए जाएंगे। पहले इनको स्कूल कैंटीन तक लगाने का फैसला लिया गया था लेकिन अब इनको सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों के कैंटीन में भी लगाया जाएगा। यानी जल्दी ही देशभर के सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट और सार्वजनिक संस्थानों में ऐसे बोर्ड देखने को मिल सकते हैं।
शुगर एंड ऑयल बोर्ड में क्या बताया जाएगा
इन बोर्ड में खाने की फोटो और उसके वजन के साथ खाई जाने वाली शुगर और वसा की जानकारी भी दी जाएगी। ये बोर्ड कम तेल, ज्यादा जीवन का अवेयरनेस फैलाने वाले स्लोगन के साथ लगाने की प्लानिंग है।
- Sugar Board में बताया जाएगा कि आप एक दिन में कितनी चीनी ले सकते हैं। वयस्कों के लिए पूरे दिन में 25 ग्राम चीनी की मात्रा सही बताई जाती है, वहीं बच्चों को दिन भर में 20 ग्राम चीनी का ही सेवन करना चाहिए। शुगर बोर्ड में इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग चीजों की मात्रा और उनके मौजूद चीनी की जानकारी दी जाएगी।
- Oil Board में यह बताया जाएगा कि सामान्य खाद्य पदार्थों में कितना तेल (या वसा) होता है और प्रतिदिन लोग कितनी वसा ले रहे हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति के पूरे दिन के खाने में तेल मात्रा 27–30 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए।
शुगर एंड ऑयल बोर्ड लगाने की आवश्यकता क्यों है
एक रिपोर्ट के अनुसार 2050 भारत में 44–45 करोड़ लोग ओवरवेट यानी मोटापे की समस्या का शिकार हो सकते हैं। इस लाइफस्टाइल समस्या में चीन के बाद भारत दुनिया में दूसरा स्थान होगा। एक अन्य रिपोर्ट में शहरी बच्चों में मोटापे की समस्या 29 फीसदी अधिक देखी गई है। ऐसा ही डराने वाला हाल भारत में डायबिटीज को लेकर भी है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर के 20 से 79 वर्ष के आयु वर्ग के शुगर मरीजों में हर सातवां व्यक्ति भारतीय है। एक अन्य रिपोर्ट बताती हैं कि भारत में टाइप 2 डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ने की वजह गलत खान-पान और शारीरिक श्रम न करना है। कोविड‑19 के बाद ऐसे मामले और तेजी से बढ़ रहे हैं।
पारस हॉस्पिटल्स में वाइस चेयरमैन और चीफ कार्डियोस्पेलिस्ट एंड वैस्कुलर सर्जन डॉक्टर संजय कुमार ने अपने एक लेख में अनहेल्दी फूड हैबिट्स को तेजी से बढ़ते हार्ट अटैक की वजह बताया है। उन्होंने अपनी वेबसाइट के लेख में बताया है कि हमारे गलत खानपान का असर कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है। बता दें कि आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल दिल से जुड़ी बीमारियों से 16 लाख मौतें होती हैं, जो देश में होने वाले कुल डेथ केसेज का 28–30% है।
कम उम्र से ही अवेयरनेस है जरूरी
यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट इस तरह के बोर्ड को एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम बता रहे हैं। किशारों में भी फैटी लीवर, मोटापा, हाई बीपी जैसी समस्याएं अब बहुत दिख रही हैं तो जरूरी है कि उनको खानपान के मामले में जागरूक किया जाए और हेल्दी हैबिट्स की ओर लेकर जाया जाए।
फरीदाबाद के अमृता अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. मोहित शर्मा का कहना है कि बच्चों में भी उन बीमारियों के लक्षण दिखते हैं जो कभी बढ़ती उम्र का इशारा हुआ करती थीं। बेशक इसकी एक बड़ी वजह गलत ईटिंग हैबिट्स हैं जो कि आक्रामक मार्केटिंग और फ्रेंड्स के दबाव में आकर डेवलप होती हैं और आगे चलकर हमारे लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती हैं। सीबीएसई और एफएसएसएआई द्वारा यह पहल बिना लंबे-चौड़े शब्दों के बच्चों को अलर्ट करने का काम करेगी और बाद में यही उनकी हेल्दी हैबिट्स बन जाएंगी। इससे आने वाली पीढ़ियों की सेहत भी संवरेगी।
'साइलेंट किलर्स' को मिलेगी मात
जरूरी नहीं कि गुलाब जामुन खाने से ही या आइक्रीम खाने से शुगर बढ़े। बहुत से ऐसे फूड प्रोडक्ट्स भी हैं जो चुपके से तेल या चीनी को हमारी डाइट में शामिल करते हैं। टोमैटो सॉस, कुकीज, जैम, जैलीज और न जाने ऐसी कितनी चीजें जो हमारे फूड रुटीन का हिस्सा बन चुकी हैं और रोज हमें लाइफस्टाइल डिजीज की ओर धकेलती हैं।
कार्डियोलॉजी में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष कुमार बताते हैं टीन एज के बच्चों में उच्च रक्तचाप, मोटापा और मेटाबोलिक सिंड्रोम के खतरनाक ढंग से बढ़ने की वजह खाने की चीजों में छिपी चीनी, तेल और नमक हैं। हमने कई चीजों को अपने डाइट रुटीन में शामिल तो कर लिया लेकिन ये नहीं सोचा कि इनके साइड इफेक्ट्स क्या होंगे। ऐसे में ये बोर्ड लगातार हमें डाइट में शुगर और तेल को सीमित करने को प्रेरित करेंगे।
बच्चों से पेरेंट्स को भी सीख
डॉ. आशीष एक ओर महत्वपूर्ण बात इस पूरे मुद्दे में जोड़ते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को जागरूक करने से उनके पेरेंट्स भी अलर्ट होंगे। जब वो खुद ही जंक और तेल व चीनी की ओवरडोज से बचेंगे तो उनके मां-बाप भी हेल्दी थाली के कॉन्सेप्ट को समझेंगे। हालांकि इसी के साथ ही वह यह भी कहते हैं कि इन बोर्ड को लगाने के साथ एक पहल इस मुद्दे पर बातचीत की भी होनी चाहिए जहां टीचर्स, पेरेंट्स और बच्चे भी मौजूद हों और सभी को अपनी बात कहने व पूछने का यहां मौका मिले।
बेशक शुगर और ऑयल बोर्ड एक सकारात्मक पहल है। अगर हम आने वाले समय में डायबिटीज और हृदय रोग के बोझ को कम करने के बारे में गंभीर हैं, तो यह जागरूकता आईसीयू में नहीं, बल्कि स्कूल कैंटीन और स्कूल टिफिन से ही शुरू हो जानी चाहिए।
