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Heatwave Effect on Lungs: हीट वेव का फेफड़ों पर क्या होता है असर, सांसों के लिए कैसे खतरा बनती है लू और तेज गर्मी

Heatwave Effect on Lungs: भीषण गर्मी फेफड़ों के लिए भी बड़ा खतरा बन रही है। डॉक्टरों के मुताबिक हीटवेव, प्रदूषण और सूखी हवा की वजह से अस्थमा, COPD और सांस की बीमारियां बढ़ रही है। जानिए लक्षण, खतरे और बचाव।

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हीटवेव कैसे करती है फेफड़ों को प्रभावित, डॉक्टर से जानें जरूरी बातें
Authored by: Medha Chawla
Updated May 26, 2026, 18:52 IST

Heatwave Effect on Lungs: उत्तर भारत में इस समय जिस तरह तापमान लगातार बढ़ रहा है, उसने लोगों की दिनचर्या ही नहीं, शरीर के अंदर काम करने वाले कई अहम सिस्टम को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अब तक लोग हीटवेव को सिर्फ डिहाइड्रेशन, लू या हीट स्ट्रोक से जोड़कर देखते थे, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अब फेफड़े भी इस भीषण गर्मी के ‘साइलेंट विक्टिम’ बनते जा रहे हैं।

खासतौर पर बुजुर्ग, बच्चे, स्मोकर्स और पहले से अस्थमा, COPD या एलर्जी जैसी सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। कई अस्पतालों में इन दिनों सांस फूलने, लगातार खांसी, सीने में जकड़न और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि समस्या सिर्फ तापमान बढ़ने की नहीं है। असली खतरा उस हवा में छिपा है, जिसे हम हर सेकंड अपने फेफड़ों के अंदर ले रहे हैं।

गर्म हवा सीधे फेफड़ों को कर रही है इरिटेट

यशोदा अस्पताल, हैदराबाद में सलाहकार इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. के. युगवीर गौड़ का कहना है कि हीटवेव के दौरान हवा सिर्फ गर्म नहीं होती, बल्कि ज्यादा सूखी और प्रदूषित भी हो जाती है। यही वजह है कि सांस की नलियों के अंदर सूजन बढ़ने लगती है।

उनके मुताबिक - गर्म हवा खुद ही रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को इरिटेट करती है। जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ता है, तब हवा में मौजूद प्रदूषक नीचे की सतह पर ज्यादा देर तक बने रहते हैं। इससे एयरवे में इंफ्लेमेशन बढ़ता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

दरअसल, हमारे फेफड़ों के अंदर एक पतली प्रोटेक्टिव लेयर होती है, जो हवा में मौजूद धूल, बैक्टीरिया और हानिकारक कणों से शरीर को बचाती है। लेकिन जब लगातार गर्म और सूखी हवा अंदर जाती है, तो यह लेयर सूखने लगती है। इससे खांसी, गले में जलन, सांस फूलना और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

लू के थपेड़े कैसे फेफड़ों को 'जलाते' हैं

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हीटवेव में क्यों बढ़ जाती है सांस की परेशानी

Dr. Sourabh Pahuja (सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनरी मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल) बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी कई स्तरों पर फेफड़ों को प्रभावित करती है।

कैसे बढ़ता है खतरा

  • जमीन के करीब ओजोन गैस का स्तर बढ़ जाता है
  • धूल और धुएं के कण हवा में लंबे समय तक बने रहते हैं
  • गर्म और सूखी हवा एयरवे को डैमेज करती है
  • शरीर में पानी की कमी होने लगती है
  • फेफड़ों की सुरक्षात्मक परत मोटी और चिपचिपी हो जाती है
  • सांस लेने में ज्यादा मेहनत लगती है
  • शरीर की ऑक्सीजन डिमांड बढ़ जाती है

इसी वजह से कई लोगों को अचानक खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न या तेज सांस चलने जैसी दिक्कत महसूस होने लगती है।

अस्थमा और COPD मरीजों के लिए सबसे मुश्किल समय

Dr. Vikas Mittal (डायरेक्टर एवं पल्मोनोलॉजिस्ट, सीके बिड़ला हॉस्पिटल, दिल्ली) का कहना है कि हीटवेव अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह सीधे फेफड़ों और दिल पर दबाव डाल रही है।

उनके मुताबिक - हीटवेव के दौरान लोग ज्यादा प्रदूषक हवा के साथ अंदर लेते हैं। ग्राउंड लेवल ओजोन और खराब एयर क्वालिटी एयरवे को इरिटेट करती है। गर्म और सूखी हवा रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को डिहाइड्रेट कर देती है, जिससे सांस की बीमारियां तेजी से बिगड़ सकती हैं।

Dr. Vikas Mittal का कहना है कि अस्थमा और COPD के मरीजों में इस दौरान अटैक, सांस फूलना और ऑक्सीजन लेवल गिरने की घटनाएं ज्यादा देखी जा रही हैं। कई बार मरीजों को अस्पताल तक भर्ती करना पड़ जाता है। हीटवेव शरीर की ऑक्सीजन डिमांड बढ़ा देती है। इससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर भी दबाव आता है। जिन लोगों के फेफड़े पहले से कमजोर हैं, उनके लिए यह स्थिति खतरनाक हो सकती है।

AC में रहना लंग्स की सुरक्षा की गारंटी नहीं

AC में रहना लंग्स की सुरक्षा की गारंटी नहीं

AC भी राहत के साथ खतरा बन सकता है

गर्मी से बचने के लिए लोग घंटों एयर-कंडीशनर में रहते हैं। लेकिन डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि अगर AC की नियमित सफाई नहीं की जाए, तो वही मशीन सांस की बीमारी बढ़ा सकती है।

AC के अंदर जमा धूल, फंगस, बैक्टीरिया और एलर्जन लगातार कमरे की हवा में घूमते रहते हैं। इससे एलर्जी, खांसी और सांस की तकलीफ बढ़ सकती है।

इसके अलावा, तेज धूप से सीधे बहुत ठंडे कमरे में जाना भी कई संवेदनशील लोगों में ब्रोंकोस्पाज्म ट्रिगर कर सकता है। यानी अचानक एयरवे सिकुड़ने लगती है और सांस लेने में परेशानी शुरू हो सकती है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत

डॉक्टरों के मुताबिक कुछ लोग हीटवेव के दौरान हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं।

सबसे ज्यादा खतरा इन्हें

  • बुजुर्ग
  • छोटे बच्चे
  • स्मोकर्स
  • अस्थमा मरीज
  • COPD मरीज
  • एलर्जी वाले लोग
  • बाहर काम करने वाले मजदूर और डिलीवरी वर्कर्स
  • हार्ट पेशेंट
  • ऑक्सीजन थेरेपी पर रहने वाले मरीज

इन लोगों को दोपहर की गर्म हवा और धूल से जितना हो सके बचना चाहिए।

हीटवेव के कौन से लक्षण नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग शुरुआत के संकेतों को मामूली थकान या मौसम का असर समझकर टाल देते हैं। लेकिन यही लापरवाही बाद में गंभीर स्थिति बना सकती है।

ये संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

  • लगातार खांसी
  • सांस फूलना
  • सीने में जकड़न
  • सीने में घरघराहट
  • चक्कर आना
  • ऑक्सीजन लेवल गिरना
  • अत्यधिक थकान
  • तेज कमजोरी
  • बार-बार सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार या संक्रमण जैसे लक्षण

अगर किसी मरीज को पहले से फेफड़ों की बीमारी है, तो ऐसे लक्षणों को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए।

हीटवेव में फेफड़ों को सुरक्षित रखने के आसान तरीके

डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सावधानी से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

क्या करें

  • दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
  • खूब पानी पिएं
  • ORS और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें
  • धूल वाली जगहों पर मास्क पहनें
  • डॉक्टर की दी हुई दवाएं और इनहेलर नियमित लें
  • AC और कूलर की सफाई कराते रहें
  • घर को हवादार रखें
  • जरूरत हो तो ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें
  • बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से बचें
  • ऑक्सीजन थेरेपी वाले मरीज मशीनें चेक करते रहें

डॉ. विकास मित्तल कहते हैं कि जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है, उन्हें दवाएं अचानक बंद नहीं करनी चाहिए। कई मरीज गर्मी में खुद ही इनहेलर छोड़ देते हैं, जिससे हालत और बिगड़ सकती है।

हीटवेव में कैसे रखें फेफड़ों का ध्यान

हीटवेव में कैसे रखें फेफड़ों का ध्यान

बदलता मौसम अब फेफड़ों की बीमारी बढ़ा रहा है

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में हीटवेव सिर्फ मौसम की खबर नहीं रहेगी। यह पब्लिक हेल्थ की बड़ी चुनौती बन सकती है। बढ़ते तापमान, प्रदूषण और खराब हवा का असर अब सीधे सांसों पर दिखाई देने लगा है। पहले लोग सोचते थे कि गर्मी सिर्फ पसीना और थकान लाती है। लेकिन अब यह शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक- फेफड़ों पर भी हमला कर रही है।

यही वजह है कि डॉक्टर बार-बार कह रहे हैं कि इस मौसम में सिर्फ धूप से नहीं, हवा से भी सावधान रहने की जरूरत है।

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