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Explained: Heatwave में क्यों बढ़ जाता है Heart पर खतरा, किन लोगों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

Explained Heatwave effect on Heart Health: भीषण गर्मी और हीटवेव दिल पर कितना खतरनाक असर डाल सकती है - जानिए हार्ट अटैक, डिहाइड्रेशन, हाई BP, अनियमित धड़कन के खतरे, लक्षण और बचाव के आसान तरीके।

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हीटवेव का दिल पर क्या होता है असर, डॉक्टर से जानें पूरी बात
Authored by: Medha Chawla
Updated May 28, 2026, 16:30 IST

Explained Heatwave effect on Heart Health: उत्तर भारत में इस समय जिस तरह तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है, उसने सिर्फ लोगों की दिनचर्या ही नहीं बदली है, बल्कि शरीर के अंदर काम करने वाले कई अहम अंगों पर भी दबाव बढ़ा दिया है। आमतौर पर लोग गर्मी को डिहाइड्रेशन, लू या हीट स्ट्रोक तक सीमित मानते हैं, लेकिन डॉक्टर अब चेतावनी दे रहे हैं कि भीषण गर्मी का असर सीधे दिल पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और पहले से हार्ट डिजीज से जूझ रहे लोगों के लिए हीटवेव बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

दिल की बीमारी को अक्सर लोग सिर्फ सर्दियों से जोड़कर देखते हैं। माना जाता है कि ठंड में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा बढ़ता है। लेकिन सच यह है कि तेज गर्मी भी शरीर के कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम पर उतना ही गंभीर असर डाल सकती है। कई बार यह असर धीरे-धीरे दिखाई देता है और कई बार अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है।

इस विषय पर हमने बात की दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संजीव कुमार गुप्ता से। यह लेख उनके द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर लिखा गया है।

वह बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी में शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में सबसे बड़ा दबाव दिल पर पड़ता है, क्योंकि शरीर को ठंडा रखने के लिए हार्ट को तेजी से और ज्यादा मात्रा में खून पंप करना पड़ता है।

गर्मी में दिल को ज्यादा मेहनत क्यों करनी पड़ती है

जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब शरीर का प्राकृतिक सिस्टम एक्टिव हो जाता है ताकि बॉडी का तापमान नियंत्रित रखा जा सके। इसके लिए शरीर त्वचा की तरफ ज्यादा ब्लड भेजता है ताकि पसीना बने और शरीर ठंडा हो सके। लेकिन ऐसा करने के लिए हार्ट को सामान्य से ज्यादा तेजी से काम करना पड़ता है।

यानी दिल को लगातार ज्यादा ब्लड पंप करना पड़ता है। स्वस्थ व्यक्ति का शरीर कई बार इस बदलाव को संभाल लेता है, लेकिन जिन लोगों का दिल पहले से कमजोर है या जिन्हें ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कार्डियक प्रॉब्लम है, उनके लिए यह अतिरिक्त दबाव खतरनाक बन सकता है।

डॉक्टरों के मुताबिक गर्मी में शरीर से लगातार पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स निकलते रहते हैं। यही कारण है कि कई लोगों को कमजोरी, चक्कर, घबराहट और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं महसूस होने लगती हैं।

डिहाइड्रेशन कैसे बन जाता है हार्ट के लिए खतरा

गर्मी में पसीना आना सामान्य बात है। लेकिन जब शरीर जरूरत से ज्यादा पानी खो देता है, तब डिहाइड्रेशन की स्थिति बनने लगती है। यह स्थिति सिर्फ कमजोरी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हार्ट फंक्शन को भी प्रभावित कर सकती है।

जब शरीर में पानी कम हो जाता है, तब ब्लड का वॉल्यूम घटने लगता है। इसका असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। कई बार ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है, जिससे चक्कर आने लगते हैं। वहीं कुछ लोगों में शरीर की प्रतिक्रिया उल्टी दिशा में जाकर ब्लड प्रेशर बढ़ा भी सकती है।

इसके अलावा शरीर में सोडियम, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने लगता है। यही इलेक्ट्रोलाइट्स दिल की धड़कन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके असंतुलन से Arrhythmia यानी अनियमित धड़कन की समस्या हो सकती है।

कई बार मरीजों को ऐसा महसूस होता है कि दिल अचानक बहुत तेज धड़क रहा है या धड़कनें अनियमित हो रही हैं। गंभीर मामलों में यह स्थिति हार्ट अटैक तक का कारण बन सकती है।

गर्मी में दिल घबराए तो इसे हल्के में ना लें

गर्मी में दिल घबराए तो इसे हल्के में ना लें

किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत

डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के अनुसार कुछ लोगों में गर्मी का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। इनमें शामिल हैं—

  • बुजुर्ग लोग
  • हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
  • डायबिटीज से पीड़ित लोग
  • पहले से हार्ट डिजीज वाले मरीज
  • हार्ट फेल्योर या ब्लॉकेज की समस्या वाले लोग
  • किडनी रोग से जूझ रहे लोग
  • ऐसे लोग जो नियमित हार्ट मेडिसिन लेते हैं

दरअसल, उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम होने लगती है। इसी वजह से बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर असंतुलन का खतरा ज्यादा होता है।

वहीं डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों में पहले से ही ब्लड वेसल्स और हार्ट पर दबाव बना रहता है। ऐसे में गर्मी अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है।

कौन से लक्षण बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करने चाहिए

गर्मी के मौसम में कई लोग कमजोरी या थकान को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति को तेज गर्मी के दौरान ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—

  • सीने में दर्द या भारीपन
  • सांस लेने में तकलीफ
  • दिल की धड़कन बहुत तेज महसूस होना
  • अचानक चक्कर आना
  • बेहद ज्यादा कमजोरी
  • बार-बार घबराहट होना
  • बेहोशी जैसा महसूस होना
  • चलते समय सांस फूलना

कई बार लोग इसे सिर्फ गर्मी की थकान समझते रहते हैं, जबकि शरीर अंदर से हार्ट स्ट्रेस का संकेत दे रहा होता है।

दवाइयों को लेकर भी जरूरी है सावधानी

हार्ट, बीपी या डायबिटीज के कई मरीज नियमित दवाइयां लेते हैं। गर्मी के मौसम में इन दवाओं का असर शरीर पर अलग तरीके से पड़ सकता है। कुछ दवाइयां शरीर से पानी की कमी बढ़ा सकती हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा और बढ़ जाता है।

हालांकि डॉक्टर साफ कहते हैं कि अपनी दवाइयां खुद बंद करना या डोज बदलना खतरनाक हो सकता है। कई लोग गर्मी में कमजोरी महसूस होने पर दवाएं छोड़ देते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।

अगर किसी मरीज को गर्मी में बार-बार चक्कर, कमजोरी या लो बीपी महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर दवाओं की समीक्षा करानी चाहिए।

AC में रहना भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं

गर्मी से बचने के लिए लोग घंटों एयर कंडीशनर में रहते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक अत्यधिक तापमान बदलाव भी शरीर पर असर डाल सकता है। तेज धूप से सीधे बहुत ठंडे कमरे में जाना कुछ संवेदनशील लोगों में ब्लड प्रेशर और सांस की समस्या को ट्रिगर कर सकता है।

इसके अलावा अगर AC की सफाई नियमित न हो, तो उसके अंदर जमा धूल और एलर्जन भी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AC का तापमान बहुत कम न रखें और कमरे में हल्की वेंटिलेशन बनाए रखें।

गर्मी में दिल की सेहत का ऐसे रखें ध्यान

गर्मी में दिल की सेहत का ऐसे रखें ध्यान

गर्मी में दिल को सुरक्षित रखने के आसान तरीके

थोड़ी सावधानी अपनाकर गर्मी के दौरान हार्ट पर पड़ने वाले खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको ये काम करने होंगे -

  1. दिनभर पर्याप्त पानी पीते रहें
  2. ORS और इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें
  3. दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचें
  4. बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी से बचें
  5. हल्के और सूती कपड़े पहनें
  6. कैफीन और अत्यधिक तली-भुनी चीजें कम लें
  7. डॉक्टर की दी हुई दवाएं नियमित लेते रहें
  8. अचानक बहुत ठंडे वातावरण में जाने से बचें
  9. अगर पहले से हार्ट डिजीज है तो नियमित जांच कराते रहें

भविष्य में और बढ़ सकती है चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में तापमान और हीटवेव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सिर्फ लू या डिहाइड्रेशन से बचना ही काफी नहीं होगा, बल्कि लोगों को यह समझना होगा कि गर्मी दिल के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।

यही कारण है कि डॉक्टर बार-बार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। क्योंकि कई बार शरीर पहले छोटे संकेत देता है, लेकिन लोग उन्हें सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

गर्मी सिर्फ मौसम नहीं बदल रही… यह शरीर के भीतर काम करने वाले सबसे अहम अंगों की परीक्षा भी ले रही है। और इस परीक्षा में सबसे ज्यादा दबाव दिल पर पड़ रहा है।

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