बारिश का मौसम यानी मानसून जहां एक और गर्मी में ठंडक और ताजगी लाता है, वहीं दूसरी ओर यह पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं भी पैदा कर देता है। इस मौसम में वात, पित्त और कफ का असंतुलन ज्यादा होता है। जो शरीर में कई तरह की समस्याओं जैसे गैस, अपच, एसिडिटी और भूख न लगने का कारण बन जाता है। मानसून में पेट से जुड़ी समस्याएं काफी बढ़ जाती हैं। जिन्हें दूर करने के लिए आपको आयुर्वेद के कुछ आसान और प्राकृतिक उपायों को अपना लेना चाहिए। ये उपाय आपकी पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...
त्रिफला चूर्ण
आंवला, हरीतकी और बिभीतकी के मिश्रण से बना चूर्ण त्रिफला चूर्ण कहा जाता है। पारंपरिक आयुर्वेदिक उपायों में डाइजेशन के लिए त्रिफला कारगर औषधि का काम करता है। ये आपकी आंतों की सेहत को बेहतर बनाकर आपको कब्ज से निजात दिलाता है। क्योंकि मानसून में आपका डाइजेशन स्लो हो जाता है, इसलिए आपको कब्ज की शिकायत हो सकती है।
देसी गाय का घी
आयुर्वेद मे पेट की सेहत के लिए गाय का घी काफी कारगर औषधि माना गया है। यदि आपके पेट में सूजन और दर्द की समस्या है, तो आपको गाय के घी का इस्तेमाल करना चाहिए। आंतों की सूजन और कब्ज की समस्या को ठीक करने में गाय का घी रामबाण औषधि साबित होता है। इसके लिए आप 1-2 चम्मच घी को 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर पी सकते हैं।
अजवाइन का पानी
पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए अजवाइन का सेवन हमारे घरों में सदियों से होता आ रहा है। क्योंकि मानसून में आपका पाचन स्लो हो जाता है, तो आपको अजवाइन का पानी जरूर पीना चाहिए। खाने के बाद 1 कप अजवाइन का पानी चाय की तरह पीने से आपका पाचन दुरुस्त बना रहता है।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
