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कड़ाके की ठंड से कांपा दिल्ली-एनसीआर, बढ़ रहा इस बीमारी का खतरा, डॉक्टर से जानिए सेफ्टी टिप्स

Cold Wave Health Risks And Safety Tips: दिल्ली-एनसीआर की कड़ाके की ठंड सिर्फ ठिठुरन नहीं, सेहत के लिए छुपा खतरा भी है। सुबह की ठंडी हवा से शुरू होने वाली कंपकंपी कब हाइपोथर्मिया बन जाए, पता भी नहीं चलता। इसलिए लोगों के बीच इसको लेकर जागरूकता होना बहुत जरूरी है। आज के लेख में हम जानेंगे ठंड लगने के लक्षण क्या होते हैं, बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा क्यों होता है और डॉक्टर की सलाह, ताकि सर्दियों में आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सके।

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दिल्ली-एनसीआर में लोग ठंड से बेहाल
Authored by: Vineet
Updated Jan 7, 2026, 14:54 IST
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Cold Wave Health Risks And Safety Tips: इन दिनों दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर हल्का कोहरा पसरा है और हवा में ऐसी ठंड है जो सीधे बदन में उतर जाती है। लोग स्वेटर और जैकेट पहनकर निकल तो रहे हैं, लेकिन कई बार यही ठंड चुपचाप शरीर को कमजोर करने लगती है। शुरुआत में सिर्फ कंपकंपी लगती है, फिर सुस्ती, उलझन और सांस लेने में दिक्कत महसूस होने लगती है। अक्सर हम इसे सामान्य सर्दी समझकर टाल देते हैं, जबकि डॉक्टरों के मुताबिक यही लापरवाही हाइपोथर्मिया जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकती है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इस ठंड में सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ठंड को हल्के में न लें, इसके संकेत समझें और सही समय पर खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।

दिल्ली-एनसीआर में कड़ाके की ठंड क्यों बढ़ा रही है सेहत का खतरा

अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट और इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉक्टर मोहित शर्मा बताते हैं, कि ठंड का मौसम सिर्फ कंपकंपी तक सीमित नहीं रहता। जब शरीर लंबे समय तक कम तापमान के संपर्क में रहता है, तो उसे अपने अंदरूनी तापमान को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे शरीर पर फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस बढ़ता है। लगातार ठंड में रहने से सांस की बीमारियां उभर सकती हैं, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हो सकता है और दिल पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खास बात यह है कि यह खतरा सिर्फ पहले से बीमार लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ सकता है।

हाइपोथर्मिया क्या है और ठंड में यह क्यों होता है

हाइपोथर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। ऐसा तब होता है जब शरीर जितनी गर्मी बना रहा होता है, उससे ज्यादा तेजी से गर्मी बाहर निकल जाती है। ठंड में शरीर सबसे पहले हाथ-पैर और त्वचा तक खून की सप्लाई कम कर देता है ताकि जरूरी अंग सुरक्षित रह सकें। शुरुआत में यह शरीर की सुरक्षा प्रणाली होती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा होने पर यह खतरनाक बन जाती है और हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है।

लक्षणों को न करें नजरअंदाज

लक्षणों को न करें नजरअंदाज

ठंड लगने के लक्षण क्या होते हैं

कड़ाके की ठंड में शरीर पहले संकेत देता है, लेकिन हम अक्सर उन्हें मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती हो सकती है। अगर नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत सतर्क होना जरूरी है।

  • लगातार और तेज कंपकंपी लगना, जो रुकने का नाम न ले
  • अचानक बहुत ज्यादा सुस्ती या थकान महसूस होना
  • बोलने में लड़खड़ाहट या बात समझने में परेशानी
  • सांस की रफ्तार धीमी पड़ जाना या सांस लेने में दिक्कत
  • चलने या खड़े होने में संतुलन बिगड़ना
  • व्यवहार में अजीब बदलाव या उलझन महसूस होना

डॉक्टर मोहित की मानें तो ये लक्षण हाइपोथर्मिया की ओर इशारा कर सकते हैं और ऐसी स्थिति में देर करना खतरनाक हो सकता है।

सुरक्षित रहने के लिए सर्दियों में क्या पिएं और क्या न पिएं

ठंड में अक्सर प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर को अंदर से गर्म और सक्रिय रखने के लिए सही चीजें पीना बहुत जरूरी होता है। गलत पेय ठंड के असर को और बढ़ा सकते हैं।

  • गुनगुना पानी या हल्के गर्म पेय लेते रहें
  • सूप या हर्बल ड्रिंक्स शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं
  • बिना शराब वाले ड्रिंक ही चुनें, ताकि शरीर की गर्मी बनी रहे
  • शराब से दूरी बनाएं, क्योंकि यह झूठी गर्माहट देकर शरीर की असली गर्मी तेजी से बाहर निकालती है
  • बहुत ठंडे ड्रिंक या बर्फ वाले ड्रिंक्स से बचें
  • दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें, ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो

डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं कि तो सही हाइड्रेशन शरीर की गर्मी बनाए रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रखने में अहम भूमिका निभाता है।

बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स.

बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स.

कड़ाके की ठंड से बचने के आसान और असरदार उपाय

शारदा अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव कहते हैं, कि ठंड से बचाव के लिए बहुत महंगे इंतजाम की जरूरत नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा की छोटी सावधानियां ही सबसे ज्यादा काम आती हैं। सही तरीके अपनाकर ठंड के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • शरीर को गर्म रखने के लिए एक के बजाय कई परतों में कपड़े पहनें
  • सिर, कान, हाथ और पैरों को जरूर ढकें, क्योंकि यहीं से सबसे ज्यादा गर्मी निकलती है
  • बाहर से लौटते ही अगर कपड़े गीले हों तो तुरंत बदल लें
  • बहुत देर तक खुले में रहने से बचें, खासकर सुबह और रात के समय
  • ठंडी हवा से बचने के लिए मुंह और गर्दन को स्कार्फ या मफलर से ढकें
  • घर के अंदर भी बहुत ठंड महसूस हो तो हल्की गर्माहट बनाए रखें

ये उपाय साधारण जरूर हैं, लेकिन मेडिकल रूप से बेहद असरदार माने जाते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से क्यों ज्यादा खतरा होता है

बच्चों का शरीर आकार में छोटा होता है और उनकी त्वचा के मुकाबले शरीर का सतह क्षेत्र ज्यादा होता है, जिससे वे जल्दी ठंड पकड़ लेते हैं। वहीं बुजुर्गों में ठंड महसूस करने की क्षमता कम हो सकती है और कई बार पहले से मौजूद बीमारियां शरीर की प्रतिक्रिया को कमजोर कर देती हैं। डायबिटीज, दिल की बीमारी, फेफड़ों की समस्या या कुछ दवाइयां लेने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।

ठंड में छोटी लापरवाही कैसे बन सकती है गंभीर बीमारी

ठंड में की गई छोटी-सी लापरवाही, जैसे देर तक गीले कपड़े पहनना या लंबे समय तक खुले में रहना, बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि परिवार और समाज स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है। बुजुर्गों और अकेले रहने वाले लोगों पर नजर रखना, समय पर लक्षण पहचानना और सही कदम उठाना ठंड से जुड़ी ज्यादातर समस्याओं को रोका जा सकता है। सर्दियों में सेहत की सुरक्षा जागरूकता और सावधानी से ही संभव है।

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