आज की मॉडर्न और बिजी लाइफस्टाइल में हम कंक्रीट के जंगलों और रबर के जूतों के बीच इतने घिर गए हैं कि प्रकृति से हमारा संपर्क लगभग कट चुका है। हालांकि, 40 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले नई दिल्ली के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक चोपड़ा का मानना है कि दिन में केवल 15 से 30 मिनट घास, मिट्टी या रेत पर नंगे पैर चलना हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इसे चिकित्सा की भाषा में ग्राउंडिंग या अर्थिंग कहा जाता है।
डेली 15 मिनट नंगे पैर चलने से क्या होता है फायदा (Photo: iStock)
धरती से पैर छुआने पर शरीर में क्या होता है?
डॉ. आलोक चोपड़ा समझाते हैं कि जब हमारे नंगे पैर सीधे पृथ्वी के संपर्क में आते हैं, तो शरीर में जमा अतिरिक्त इलेक्ट्रिकल चार्ज डिस्चार्ज हो जाता है। यह प्रक्रिया शरीर के स्वाभाविक इलेक्ट्रिकल बैलेंस को बहाल करने में मदद करती है, जिससे टिशूज का रीपोलराइजेशन होता है।
बता दें कि रीपोलराइजेशन वह प्रक्रिया है जिसके तहत कोशिकाएं अपनी बाधित हुई प्राकृतिक चार्ज स्थिति में वापस लौटती हैं। रेड ब्लड सेल्स के रीपोलराइज होने से खून में थक्के जमने की आशंका घटती है और वे आसानी से फ्लो होती हैं। इससे पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जो हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है।
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नंगे पैर चलने के फायदे
धरती की सतह के सीधे संपर्क से शरीर में जमा एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिकल चार्ज बाहर निकल जाता है। यह अभ्यास मानसिक तनाव को कम करने और शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है। ग्राउंडिंग से मानसिक स्थिरता, शांति और गहरी तथा आरामदायक नींद को बढ़ावा मिलता है। यह वर्तमान क्षण में बने रहने और प्रकृति की प्राकृतिक ऊर्जा से जुड़ने का यह सबसे सरल तरीका है।
ग्राउंडिंग करने का सही तरीका
नंगे पैर चलने के लिए कंक्रीट या टाइल्स के बजाय घास, गीली मिट्टी या समुद्र तटीय रेत जैसी प्राकृतिक जमीन का चयन करें। रोजाना केवल 15 से 30 मिनट तक सीधे धरती के संपर्क में रहें। सुबह-सुबह खाली पैर टहलने से इसके स्वास्थ्य लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं। इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ही स्थायी लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
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कौन हैं डॉ. आलोक चोपड़ा
डॉ. आलोक चोपड़ा नई दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कार्डियोलॉजिस्ट हैं, जिन्हें चिकित्सा क्षेत्र में 40 से अधिक वर्षों का अनुभव है। उन्होंने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) से पढ़ाई की है और वे रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन, लंदन के सदस्य भी रहे हैं। उनका यह सुझाव बिना किसी लागत के स्वस्थ रहने का एक अनूठा और वैज्ञानिक तरीका प्रदान करता है।
