क्यों आसान नहीं होता युद्ध को रोक पाना? इन वजहों से बेकाबू होते चले जाते हैं हालात

पिछले दशकों में चलाए गए ऐसे कई सैन्य अभियान जिनके बारे में माना जाता था कि ये युद्ध दो चार दिनों में या कुछ हफ्ते या अधिकतम महीने भर में खत्म हो जाएंगे, वे गलत साबित हुए। युद्ध में उतरना दलदल में उतरने जैसा है, आप इसमें से निकलने के लिए जितना पैर बढ़ाएंगे या उठाएंगे, आप उसमें और धंसते चले जाएंगे।

Why stopping war is not easy : ऑस्ट्रेलियाई लेखक जियोफ्रि ब्लेने ने अपनी मशहूर और क्लासिक किताब 'द कॉजेज ऑफ वार' में लिखा है कि हमला हो सकता है, ऐसे 'सपने और गलतफहमी' की आशंका में बीते समय में कई युद्ध लड़े गए। हमला करते समय देशों ने सोचा कि यह जल्दी खत्म हो जाएगा, यह सस्ता होगा और उन्हें एक बड़ी जीत मिल जाएगी लेकिन उनकी यह सोच गलत साबित हुई। मिसाल के तौर पर साल 1792 में ऑस्ट्रिया, हंगरी, प्रशा और फ्रांस सभी लड़ाई के मैदान में पहुंच गए। इन्होंने सोचा कि एक या ज्यादा से ज्यादा दो लड़ाई के बाद वे जीत जाएंगे और युद्ध खत्म हो जाएगा। फ्रांस ने सोचा कि उसकी हालिया क्रांति से प्रभावित होकर कई देश उसके साथ आ जाएंगे जबकि राजशाही वाले देश ये मानकर चले कि उनकी पेशेवर सेना के आगे फ्रांस टिक नहीं पाएगा लेकिन हुआ इसके उल्टा। यह युद्ध खिंचता चला गया, धीरे-धीरे इस संघर्ष में उस समय की ताकतें एक-एक कर युद्ध में शामिल होती चली गईं और दुनिया के ज्यादातर इलाकों में यह युद्ध फैल गया। यह युद्ध करीब 5 सालों तक चला।

wars around world

युद्ध की शुरुआत करना आसान होता है, खत्म करना मुश्किल।

प्रथम विश्व युद्ध : 'क्रिसमस तक युद्ध खत्म हो जाएगा'

इसी तरह अगस्त 1914 (प्रथम विश्व युद्ध) में यूरोप के देश जर्मनी के साथ युद्ध में कूद पड़े। उन्होंने अपने सैनिकों को बताया कि क्रिसमस आते-आते यह यद्ध खत्म हो जाएगा, और सभी अपने घर लौट जाएंगे लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि सैनिकों के लिए यह क्रिसमस 1914 में नहीं बल्कि 1918 में आएगा। इराक के तानाशाह सद्दाम हुसैन ने भी कुछ इसी तरह सोचा था। उन्हें लगा था कि 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान कमजोर पड़ गया है। इराक का हमला इस समय वह झेल नहीं पाएगा और ईरान को वह आसानी से फतह कर लेंगे लेकिन सद्दाम हुसैन की रणनीति गलत साबित हुई। इराक को मुंहतोड़ जवाब देते हुए ईरान इस युद्ध को आठ साल तक लड़ता रहा। इन आठ सालों में दोनों तरफ हजारों की संख्या में लोग मारे गए और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था तहस-नहश हो गई।

End of Feed