जिस तालिबान से पाक भी भागता रहा, आखिर उसे रूस ने कैसे दे दी मान्यता? पुतिन की इस चाल से वैश्विक समीकरण बदलना तय

अफगानिस्तान दशकों से राजनीतिक अस्थिरता, संघर्ष और विदेशी हस्तक्षेप का केंद्र रहा है। वर्ष 2021 में अमेरिका की वापसी के बाद तालिबान ने दोबारा सत्ता पर कब्जा कर लिया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अभी तक तालिबान को वैधानिक सरकार के रूप में मान्यता नहीं दी थी। रूस मान्यता देने वाला पहला देश बना है।

रूस ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दे दी है। रूस दुनिया का ऐसा करने वाला पहला देश है। अमेरिका के अफगानिस्तान से निकलने के बाद जबसे तालिबान ने सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ली है, तब से उसे किसी भी देश ने मान्यता नहीं दी है। तालिबानी सरकार को उस पाकिस्तान ने भी मान्यता नहीं दिया है, जिसने तालिबान को सत्ता में लाने के लिए सहयोग किया था। अब सवाल ये उठता है कि रूस, तालिबान का मान्यता देकर करना क्या चाहता है? तालिबान जिस संगठन से निकला है, उसका गठन ही रूस का विरोध करने के लिए कभी किया गया था। कभी अमेरिका ने रूस को बाहर करने के लिए अफगान मुजाहिदीन का सहयोग किया था। अब पुतिन एक बार फिर से अफगानिस्तान के रास्ते सेंट्रल एशिया में रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश में हैं।

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