यूक्रेन युद्ध बंद करवाकर नोबेल पुरस्कार की आस लगाए बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बार फिर यूक्रेन की दुखती रग पर हाथ रखते हुए क्रीमिया का जिक्र किया। अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में ट्रंप के हाथ कुछ नहीं लगा, लेकिन वह अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को युद्ध खत्म करने की नसीहत दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में जेलेंस्की से अहम मुलाकात से पहले ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध समझौते को लेकर बड़ा बयान देते हुए यूक्रेन पर दबाव बनाने की कोशिश की। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की चाहें तो रूस के साथ युद्ध लगभग तुरंत समाप्त कर सकते हैं, या फिर लड़ाई जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि ओबामा द्वारा दिया गया क्रीमिया अब यूक्रेन को वापस नहीं मिलेगा। आखिर क्या है क्रीमिया विवाद और रूस ने क्यों और कैसे इस पर कब्जा जमाया था, रूस के लिए क्रीमिया क्यों अहम है? इसे विस्तार से समझते हैं।
रूस का क्रीमिया पर हमला और कब्जा
रूस द्वारा कब्जा करने से पहले क्रीमिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन का हिस्सा माना जाता था। क्रीमिया में एक जनमत संग्रह कराया गया था जिसमें अधिकांश लोगों ने रूसी संघ का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी। हालांकि, इस जनमत संग्रह की प्रामाणिकता पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा व्यापक रूप से प्रश्न उठाए गए थे। रूस ने 2014 में क्रीमिया पर भारी हमले के बाद इस पर कब्जा कर लिया था। इस पर अब पूरी तरह से रूस का नियंत्रण है। इसका बहुत सामरिक महत्व है और युद्ध के लिहाज से इसे काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। रूस में ही क्रीमिया एक बड़ा सैन्य बेस है और यहीं से यूक्रेन पर हमले को अंजाम दे रहा है। रूस ने यहां एस-500 एयर डिफेंस सिस्टम से लेकर कई तरह के भारी हथियार तैनात कर रखे हैं। युद्ध खत्म करने की मांग के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की क्रीमिया की वापसी की मांग कर रहे हैं, जिसे रूस खारिज करता रहा है।
1954 की गलती सुधारना चाहता था रूस
रूस हमेशा से क्रीमिया पर नियंत्रण चाहता था और 1954 की गलती को सुधारने के लिए इस क्षेत्र को हासिल करना चाहता था। 1954 में तत्कालीन सोवियत प्रधानमंत्री निकिता ख्रुश्चेव ने क्रीमिया को यूक्रेन को सौंप दिया था। क्रीमिया 1783 से रूस का हिस्सा था, जब जार के अधीन रूस ने एक दशक तक ओटोमन साम्राज्य को हराने के बाद उसे उससे अलग कर लिया था। मॉस्को ने 1954 के समझौते को एक बड़ी गलती माना और हमेशा से क्रीमिया को वापस पाने की मंशा रखता था। 2014 में रूस ने एक जनमत संग्रह कराया और क्रीमिया पर अपना दावा पेश किया।
2014 में रूस के कब्जे में आया क्रीमिया (AP)
रूस द्वारा किए गए इस जनमत संग्रह को पश्चिमी देशों ने अनुचित माना। तनाव इतना बढ़ा कि पश्चिमी यूरोपीय देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर रूस को G7 देशों से बाहर करने की मुहिम चलाई, जिसमें रूस एक प्रमुख शक्ति था। रूस पर अपना फैसला बदलने के लिए उस पर कई राजनीतिक और आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। 2014 से पहले जब रूस को इस समूह से बाहर किया गया था, तब इसे G8 कहा जाता था। रूस के हटने से यह G7 बन गया। बहरहाल, क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण ने शक्ति संतुलन को रूस के पक्ष में बदल दिया और उसे अपनी कार्रवाई करने के लिए सामरिक आधार प्रदान किया।
रूस ने क्रीमिया पर कब्जा क्यों किया?
रूस द्वारा दिए गए प्रमुख तर्कों में से एक यह था कि क्रीमिया के अधिकांश लोग रूसी मूल के हैं और उन्होंने रूसी संघ का हिस्सा बनने की इच्छा जताई है। क्रीमिया की लगभग 60% आबादी रूसी मूल की है। क्रीमिया प्रायद्वीप तक पहुंच रूस को समुद्र तक पहुंच प्रदान करती है जिससे चौबीसों घंटे व्यापार और वाणिज्य संभव होता है। इसके अलावा, रूस को यह डर भी सता रहा था कि नाटो पूर्वी यूरोप में अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है। रूसी सरकार इसे सियासी नजरिए से एक खतरे के रूप में देख रही थी। यूक्रेन नाटो का हिस्सा नहीं है, इसलिए नाटो देश रूस के कब्जे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं कर पाए। इसके अलावा, क्रीमिया पर नियंत्रण से मॉस्को को सेवस्तोपोल स्थित नौसैनिक अड्डे तक निरंतर पहुंच मिलती है, जो रूस के काला सागर बेड़े का गढ़ है। काला सागर रूस के लिए अपने क्षेत्र की रक्षा में एक बेहद अहम स्थान रखता है। यह रूस को निगरानी क्षमता प्रदान करता है।
रूस के लिए क्रीमिया क्यों अहम?
क्रीमिया अपनी सीमा के तीन ओर समुद्र से घिरे एक रणनीतिक स्थान पर स्थित है। इससे क्रीमिया का बाकी विश्व से संपर्क बना रहता है। रूस की अपने महाद्वीप के दक्षिण-पश्चिम में खुले समुद्र तक कोई पहुंच नहीं है। क्रीमिया पर कब्जा करने से रूसी सरकार को भूमध्य सागर तक पहुंच मिल जाती है। क्रीमिया के सामरिक और व्यापारिक महत्व को देखते हुए रूस ने इस पर कब्जा कर लिया।
