River Oxygen Crisis: धरती पर नदियों को जीवनदायनी कहा जाता है, क्योंकि इन्हीं से इंसान, जानवर, खेती और पेड़-पौधों का जीवन चलता है। लेकिन अब दुनिया की बड़ी नदियां एक नए संकट का सामना कर रही हैं। वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में पता चला है कि नदियों में धीरे-धीरे ऑक्सीजन कम होती जा रही है। यह बदलाव बहुत धीमा है, लेकिन आने वाले समय में इसका असर बेहद खतरनाक हो सकता है।
ग्लोबल वॉर्मिंग बना नदियों के लिए सबसे बड़ा खतरा (Photo: AI Generated)
वैज्ञानिकों ने दुनिया की 21 हजार से ज्यादा नदियों का अध्ययन किया। इसके लिए सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद ली गई। रिसर्च में सामने आया कि साल 1985 के बाद से नदियों में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है। अगर यही स्थिति जारी रही तो कई नदियों में मछलियों और दूसरे जीवों का बचना मुश्किल हो सकता है।
नदियों में ऑक्सीजन क्यों जरूरी है?
जिस तरह इंसानों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन चाहिए, उसी तरह पानी में रहने वाले जीवों को भी पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मछलियां, छोटे जलीय जीव और कई पौधे इसी ऑक्सीजन पर निर्भर रहते हैं। जब पानी में ऑक्सीजन कम होने लगती है, तो जीवों का दम घुटने लगता है। इससे बड़ी संख्या में मछलियां मर सकती हैं और नदी का पूरा इकोसिस्टम खराब हो सकता है।
ऑक्सीजन घटने के पांच बड़े कारण
1. ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ता तापमान
सबसे बड़ा कारण ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) माना जा रहा है। पृथ्वी का तापमान बढ़ने से नदियों का पानी भी गर्म हो रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार गर्म पानी में ऑक्सीजन कम मात्रा में टिक पाती है। जैसे-जैसे पानी गर्म होता है, ऑक्सीजन हवा में निकलने लगती है।
2. प्रदूषण और केमिकल
खेती में इस्तेमाल होने वाले उर्वरक, फैक्ट्री का गंदा पानी और शहरों का सीवर नदियों में पहुंच रहा है। इससे पानी में जहरीले तत्व बढ़ते हैं और ऑक्सीजन तेजी से घटती है।
3. बांधों का निर्माण
नदियों पर बनने वाले बड़े बांध पानी के प्राकृतिक बहाव को रोक देते हैं। जब पानी का बहाव धीमा होता है, तो उसमें ऑक्सीजन बनने की प्रक्रिया भी कमजोर पड़ जाती है।
4. पानी का कम बहाव
कई जगहों पर नदियों का पानी सूख रहा है या बहुत कम हो गया है। कम बहाव वाले पानी में ऑक्सीजन जल्दी खत्म होती है।
5. हीटवेव और मौसम में बदलाव
गर्मी की लहर यानी हीटवेव के दौरान नदी का तापमान तेजी से बढ़ जाता है। इससे पानी में ऑक्सीजन और तेजी से कम होती है।
किन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा?
स्टडी के मुताबिक भारत, अमेरिका का पूर्वी हिस्सा, दक्षिण अमेरिका और अमेजन क्षेत्र सबसे ज्यादा खतरे में हैं। भारत की गंगा नदी में पहले से ही प्रदूषण का दबाव ज्यादा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले दशकों में कई नदियों में “डेड जोन” बन सकते हैं।
क्या होता है डेड जोन?
डेड जोन वह जगह होती है जहां पानी में ऑक्सीजन इतनी कम हो जाती है कि मछलियां और दूसरे जीव जीवित नहीं रह पाते। ऐसी जगहों पर पानी से बदबू आने लगती है और जैव विविधता खत्म होने लगती है।
इसका इंसानों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर नदियों की हालत खराब होती रही तो इसका असर पीने के पानी, खेती, मछली पालन और पर्यावरण पर पड़ेगा। लाखों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है।
समाधान क्या है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि नदियों को बचाने के लिए प्रदूषण कम करना सबसे जरूरी है। इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन घटाना, पेड़ लगाना, साफ ऊर्जा को बढ़ावा देना और नदियों के प्राकृतिक बहाव को बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दुनिया की कई नदियां गंभीर संकट में पहुंच सकती हैं।
