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पाकिस्तान का परमाणु बटन किसके हाथ में? जानिए पाक की न्यूक्लियर पॉलिसी का पूरा ब्लूप्रिंट

पाकिस्तान में परमाणु नियंत्रण की चाभी औपचारिक रूप से राष्ट्रीय कमांड अथॉरिटी (NCA) के पास होती है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। इस संस्था में नागरिक और सैन्य दोनों उच्च अधिकारी शामिल होते हैं- जिसमें विदेश, रक्षा, गृह, वित्त मंत्री, साथ ही सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख भी शामिल हैं।

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पाकिस्तान के परमाणु बम पर किसका कंट्रोल
Curated by: Shishupal Kumar
Updated Aug 11, 2025, 22:35 IST
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पाकिस्तान 1998 में परमाणु संपन्न बना था यानि कि भारत के पहले परमाणु परीक्षण (1974) के 24 साल बाद। तब से पाकिस्तान के नेताओं के साथ-साथ सैन्य अधिकारी भी भारत को परमाणु हमले की धमकी देते रहे हैं। अब अमेरिका में बैठकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने भी भारत को परमाणु हमले की धमकी दी है। पाकिस्तान कई बार परमाणु हमले की धमकी दे चुका है, जबकि भारत ने कभी भी ऐसी धमकी किसी देश को नहीं दी है। अब सवाल ये है कि पाकिस्तान में परमाणु बम का कंट्रोल है किसके पास, सरकार के पास या सेना के पास? पाक के परमाणु सिस्टम को कौन कंट्रोल करता है? क्योंकि पूरी दुनिया जानती है कि अगर यह बम किसी गलत हाथ में पड़ा तो विनाश तय है। भारत कई बार पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर चिंता जता चुका है और दुनिया को आगाह भी कर चुका है।

पाकिस्तान का न्यूक्लियर वेपन सिस्टम

पाकिस्तान का परमाणु हथियार एक जटिल सिस्टम का हिस्सा है, जिसे लेकर वहां की सरकार और सेना दावा करती है कि ये रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान का न्यूक्लियर वेपन सिस्टम, विभिन्न प्रकार के मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों के साथ एक मजबूत कमांड और नियंत्रण तंत्र से मिलकर बनता है। इस नीति के तहत, पाकिस्तान ने विभिन्न प्रकार के मिसाइल प्रणालियां विकसित की हैं।

  • "गजनवी" एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज लगभग 290 किलोमीटर है और यह परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है।
  • "अब्दाली" एक मीडियम-रेंज मिसाइल है, जिसमें मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रिएंट्री व्हीकल्स (MIRVs) की क्षमता है, जिससे यह मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चुनौती देती है।
  • "शाहीन-II" और "शाहीन-III" लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो क्रमशः 1500 और 2750 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता रखती हैं।
  • आसमानी ताकत में, पाकिस्तान के पास F-16 जैसे लड़ाकू विमान हैं, जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं।
  • इसके अतिरिक्त, "राद" नामक एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल भी विकसित की गई है, जो 350 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेदने की क्षमता रखती है।
  • समुद्री क्षेत्र में, पाकिस्तान ने "बाबर-3" नामक पनडुब्बी-लॉन्च क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है, जो समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता प्रदान करती है।

पाकिस्तान का परमाणु बटन किसके हाथ में है?

अगर पाकिस्तान की परमाणु पॉलिसी को देखें तो परमाणु हमले का निर्णय लेने की प्रक्रिया एक सुसंगत और संरचित प्रणाली के तहत दिखती है, जिसे नेशनल कमांड अथॉरिटी (NCA) कहा जाता है। यह पाकिस्तान की परमाणु नीति और संचालन का सर्वोच्च निकाय है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। NCA में उच्च-स्तरीय नागरिक और सैन्य अधिकारी शामिल होते हैं, जैसे रक्षा, विदेश, गृह, वित्त मंत्री, और सेना, नौसेना, वायुसेना के प्रमुख। यह निकाय परमाणु हथियारों के विकास, तैनाती और उपयोग से संबंधित निर्णय लेता है। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री का माना जाता है। कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री के पास ही औपचारिक रूप से परमाणु बटन होता, लेकिन असल नियंत्रित तंत्र NCA, SPD और SPD Force की मिलीजुली प्रणाली द्वारा संचालित होता है।

NCA के भीतर दो प्रमुख समितियां हैं

  1. एम्प्लॉयमेंट कंट्रोल कमेटी (ECC): यह समिति परमाणु हथियारों के उपयोग, तैनाती और संबंधित रणनीतियों पर निर्णय लेती है। इसमें उच्च-स्तरीय मंत्रियों और सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति होती है।
  2. डेवलपमेंट कंट्रोल कमेटी (DCC): यह समिति परमाणु हथियारों के विकास, अनुसंधान और संबंधित तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करती है।
pakistan missile

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पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा किसके पास?

NCA के निर्णयों को लागू करने का कार्य स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) द्वारा किया जाता है, जो NCA का सचिवालय है। SPD परमाणु हथियारों की सुरक्षा, तैनाती और संचालन सुनिश्चित करता है। इसके संचालन में सबसे अहम भूमिका SPD की होती है- यह न केवल NCA का सचिवालय है, बल्कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा, रणनीतिक योजनाओं और तैनाती का केंद्र भी है। SPD की सुरक्षा इकाई, SPD Force, जिसमें लगभग 10,000 सैनिक शामिल हैं, परमाणु प्रतिष्ठानों एवं हथियारों की सुरक्षा करती है।

पाक की न्यूक्लियर पॉलिसी

पाकिस्तान की परमाणु रणनीति, जिसे ‘Full Spectrum Deterrence’ कहा जाता है, समय के साथ विकसित हुई "Credible Minimum Deterrence" से आगे बढ़कर तीन स्तर—रणनीतिक, ऑपरेशनल और टैक्टिकल—पर प्रभावी क्षमता रखने वाली नीति बन गई है। पाकिस्तान परमाणु हथियारों के सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित नीति को नहीं मानता है। जिसे नो फर्स्ट यूज कहा जाता है, यानि कि किसी भी परिस्थिति में देश पहले परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं करेंगे। पाकिस्तान इस नीति पर नहीं चलता है, यानि कि आक्रमण की संभावना विकसित होने पर वह परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। पाकिस्तान ने कभी अपनी पूरी न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की। इसके बजाए, वह अस्पष्टता बनाए रखता है। पाकिस्तान कहता है परमाणु हमले की स्थिति में वो पहले चेतावनी देगा, फिर जरूरत पड़ने पर संकेत, और अंततः परमाणु हमला किया जा सकता है।

पाकिस्तान की परमाणु धमकी

  • पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर- अगस्त 2025 में, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिका में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा था, "हम एक परमाणु राष्ट्र हैं। अगर हमें लगता है कि हम नीचे जा रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएंगे।"
  • पाकिस्तान के रूस में राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली- मई 2025 में, पाकिस्तान के रूस में राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने रूस के राज्य प्रसारक RT से एक साक्षात्कार में कहा था कि यदि भारत पाकिस्तान पर हमला करता है या सिंधु जल समझौते का उल्लंघन करता है, तो पाकिस्तान अपनी "पूर्ण शक्ति, पारंपरिक और परमाणु दोनों" का उपयोग करेगा।
  • पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ- पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी भारत के खिलाफ परमाणु हमले की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि भारत सिंधु नदी पर कोई संरचना बनाता है और जल समझौते का उल्लंघन करता है, तो पाकिस्तान अपनी "पूर्ण शक्ति" का उपयोग करेगा, जिसमें परमाणु हथियार भी शामिल हैं।
asim munir (2)

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क्या भारत तक पहुंच सकती है पाक की परमाणु मिसाइलें?

पाकिस्तान की परमाणु मिसाइलें भारत पर निशाना साधने में सक्षम हैं, उनकी रेंज भारत तक है, लेकिन पाक, भारत पर सफल परमाणु हमला कर सके, इसके चांस काफी कम है। भारत का डिफेंस सिस्टम इतना मजबूत है कि न तो पाकिस्तान की मिसाइलें उसे भेद पाने में सक्षम है और न ही पाकिस्तान के लड़ाकू विमान। इसका उदाहरण दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देख चुकी है। जब भारत की मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान के हर हमले को नाकाम कर दिया था। डिफेंस एक्सपर्ट संजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार, भारत के डिफेंस सिस्टम को नहीं भेद सकते, भारत के पास एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार भूमिका निभाई है। भारत के पास बेहतरीन फाइटर जेट हैं, जिसमें राफेल भी शामिल है, जो ऐसे किसी भी हवाई हमले को रोकने में सक्षम है। इसके अलावा भारत का अपना स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। जिसकी मदद से भारत ऐसे किसी भी हमले को न सिर्फ ट्रैक कर सकता है, बल्कि उसे हवा में ही मार गिरा सकता है।

पाकिस्तान ने कब और किसकी मदद से परमाणु बम बनाया था?

पाकिस्तान ने 1998 में अपनी पहली परमाणु परीक्षण (Chagai-I) किया, जिससे वह परमाणु हथियारों से संपन्न होने वाला सातवां देश बना। इस कार्यक्रम की नींव 1970 के दशक में रखी गई थी, जब प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम की शुरुआत की। इस परियोजना में प्रमुख वैज्ञानिकों में डॉ. अब्दुल कदीर खान, डॉ. समर मुबारक मंड, डॉ. मसूद अहमद और डॉ. रियाज़ुद्दीन शामिल थे। डॉ. खान ने यूरोपीय यूरेनको कंपनी से सेंट्रीफ्यूज तकनीकी योजनाएं चुराई थीं, जिन्हें बाद में पाकिस्तान में लागू किया गया। अंतरराष्ट्रीय सहायता की बात करें तो चीन ने पाकिस्तान को परमाणु हथियारों के विकास में सहायता प्रदान की। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान को मिसाइल और संबंधित सामग्री प्रदान की थी, जिससे पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को बढ़ावा मिला।

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