अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। 11 दिन के युद्ध में दुनिया ने भारी तबाही देखी है। जैसे-जैसे युद्ध और तेज होता जा रहा है, सबका ध्यान ईरान के खर्ग द्वीप पर लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन खर्ग द्वीप पर हमले के विकल्पों पर विचार कर रहा है। खर्ग द्वीप ईरान का एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम तेल केंद्र है। इसके बारे में विश्लेषकों का कहना है कि यह तेहरान के खिलाफ एक निर्णायक प्रेशर प्वाइंट बन सकता है। इजराइल स्थित वाईनेट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कई बातें कही हैं। आखिर क्या है खर्ज द्वीप और इसे क्यों माना जाता है ईरान की इकोनॉमी की रीढ़, अमेरिका का क्या है प्लान, विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।
खर्ग द्वीप क्यों है ईरान की जान?
ईरान के बुशहर प्रांत के पास तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित यह छोटा द्वीप ईरान के कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा संभालता है, जिससे यह ईरान की इकोनमी का एक अहम स्तंभ और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के लिए राजस्व का एक प्रमुख स्रोत बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वाशिंगटन हवाई हमलों से आगे बढ़कर दबाव बढ़ाना चाहता है, तो खर्ग द्वीप के तेल बुनियादी ढांचे पर कब्जा करना या उसे बर्बाद करके ईरान को सबसे बड़ी चोट पहुंचा सकता है। लेकिन इसमें एक खतरा भी है। वैश्विक एनर्जी सप्लाई चेन में इसकी केंद्रीय भूमिका के कारण, द्वीप पर किसी भी हमले से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
पेंटागन में ईरान और इराक मामलों के पूर्व सलाहकार माइकल रुबिन ने वाईनेट न्यूज के अनुसार कहा है कि खर्ग पर हमला करने से शासन की सैन्य साजो-सामान को वित्त पोषित करने और घरेलू नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता काफी कमजोर हो सकती है। रुबिन ने कहा कि उन्होंने वाशिंगटन में अधिकारियों के साथ इस द्वीप के रणनीतिक महत्व का मुद्दा उठाया है और उनका मानना है कि इस पर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में भी चर्चा हुई है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह मुद्दा उन चुनिंदा सलाहकारों तक पहुंचा है या नहीं।
ईरान युद्ध से तबाही
ईरान को होती है कितनी कमाई?
ईरान की अर्थव्यवस्था तेल राजस्व पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए खर्ग द्वीप पर स्थित सुविधाएं ईरान के लिए अहम हैं। इनमें स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और टैंकर लोडिंग टर्मिनल शामिल हैं। ये सभी तेहरान के लिए एक अहम वित्तीय स्रोत हैं। फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल के रूप में काम करता है। हाल के हफ्तों में खर्ग द्वीप का महत्व और भी बढ़ गया है। फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के शुरू होने से पहले तेहरान ने कथित तौर पर खार्ग में उत्पादन बढ़ा दिया था, जिससे उत्पादन लगभग चार मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया था, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है। यह इसके सामान्य आधार स्तर लगभग 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन से कहीं अधिक है। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान ने 2024 में ऊर्जा निर्यात से लगभग 78 अरब अमेरिकी डॉलर कमाए।
खर्ग द्वीप मौजूदा युद्ध में अब तक अछूता रहा है। यहां तक कि पिछले सप्ताह तेहरान और अल्बोर्ज क्षेत्र में ईरानी ईंधन डिपो पर इजरायली हमलों के बाद भी इसे निशाना नहीं बनाया गया। ईरान के विरोधियों द्वारा खर्ग द्वीप को लंबे समय से ईरानी शासन की सबसे कमजोर रणनीतिक संपत्तियों में से एक माना जाता रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि द्वीप पर कब्जा करने से वाशिंगटन को तेहरान पर दबाव बनाने में मदद मिल सकती है, लेकिन उन्होंने अंततः ऐसा नहीं करने का फैसला किया। 1980 के दशक में तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने के बाद, राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने ईरान के बाकी निर्यात के ठिकानों पर हमले का आदेश दिया था, उस समय भी खर्ग द्वीप को निशाना नहीं बनाया गया था।
1980 के दशक में पहुंचा भारी नुकसान
1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान इराकी सेना द्वारा हमले में द्वीप के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन ईरान ने तुरंत मरम्मत कर परिचालन बहाल कर दिया। इजराइल ने भी इस द्वीप पर हमले का इरादा जताया है, लेकिन इसमें कई जटिलताएं हैं। इजराइली विपक्षी नेता यायर लैपिड ने हाल ही में कहा कि खर्ग के तेल बुनियादी ढांचे पर हमला ईरान की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर सकता है। वहीं, तेहरान ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले से पूरे क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू हो जाएगी। लैपिड ने X पर लिखा, इजराइल को खर्ग द्वीप पर ईरान के सभी तेल क्षेत्रों और ऊर्जा उद्योग को नष्ट कर देना चाहिए। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और शासन गिर जाएगा।
ईरान युद्ध जारी
अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर हमला क्यों नहीं किया?
खर्ग द्वीप को अभी तक निशाना न बनाए जाने का एक कारण यह हो सकता है कि इससे बड़े पैमाने पर तनाव बढ़ सकता है। इससे ईरान और भड़क सकता है जिससे अरब देशों पर उसके हमले बढ़ सकते हैं। होरमुज स्ट्रेट को ईरान ने पहले ही ब्लॉक कर रखा है जिससे गैस और तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और दुनियाभर में इसका असर देखा जा रहा है। खर्ग द्वीप पर ईरान का पलटवार हालात और बिगाड़ सकता है। ऊर्जा विश्लेषकों का कहना है कि खार्ग द्वीप पर हमला करने से वैश्विक तेल की कीमतों में भी भारी उछाल आ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाने के बाद, वाशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने अनुमान लगाया है कि तेल संयंत्र में कोई बड़ी बाधा आई तो कच्चे तेल की कीमतें लगभग 10 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकती हैं।
अमेरिका की घरेलू राजनीति भी प्रमुख कारक
इसके अलावा अमेरिका की घरेलू राजनीति भी इसमें एक प्रमुख कारक है। मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर घरेलू स्तर पर राजनीतिक दबाव है और ईरान के तेल निर्यात में किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजारों को और अस्थिर कर सकती है। हालांकि, एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने खर्ग द्वीप और उसके तेल बुनियादी ढांचे पर कब्जा करने या ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडारों को सुरक्षित करने के लिए कमांडो छापे मारने जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार किया है। एबीसी के साथ एक साक्षात्कार में जब ट्रंप से इस तरह के ऑपरेशन की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे खारिज नहीं किया और कहा, सभी विकल्प खुले हैं।
