क्या है यूरोपीय यूनियन, क्यों पड़ी इसके गठन की जरूरत, कौन-कौन से देश हैं सदस्य? जानें पूरा इतिहास-भूगोल
यूरोपीय संघ कोई एक देश नहीं,बल्कि यूरोप के देशों का ऐसा साझा मंच है, यहां इसके सदस्य देशों के राजनीति,अर्थव्यवस्था और व्यापार से जुड़े बड़े फैसले मिलकर लिए जाते हैं। यूरोपीय यूनियन सात संस्थानों के जरिए 27 देशों के काम-काज की देखरेख करता है। भारत के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते के बाद हर कोई इसके बारे में जानना चाह रहा है। ऐसे में हम बताएंगे कि यूरोपीय संघ है क्या और यह कैसे काम करता है। साथ ही इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं।
- Curated by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 27, 2026, 08:24 PM IST
यूरोपीय संघ बीते काफी समय से चर्चाओं में है। कभी इसकी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति रही,तो कभी रूस से तेल व्यापार को लेकर बढ़ती नाराजगी। ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर यूरोपीय संघ पर दबाव बनाते हुए उससे भारत पर टैरिफ लगाने की अपील तक की। अब एक बार फिर यूरोपीय संघ चर्चा के केंद्र में है और इस बार वजह है भारत के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता। ऐसे में हर कोई जानना चाह रहा है कि आखिर ये यूरोपीय संघ है क्या और यह कैसे काम करता है। साथ ही इसमें कौन-कौन से देश शामिल हैं। आइए जानते हैं यूरोपीय यूनियन के इतिहास-भूगोल से जुड़े हर सवाल का जवाब...
क्या है यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ कोई एक देश नहीं,बल्कि यूरोप के देशों का ऐसा साझा मंच है, यहां इसके सदस्य देशों के राजनीति,अर्थव्यवस्था और व्यापार से जुड़े बड़े फैसले मिलकर लिए जाते हैं। यूरोपीय यूनियन सात संस्थानों के जरिए 27 देशों के काम-काज की देखरेख करता है। हर सदस्य देश का एक प्रतिनिधि इसके आयोग में रहता है। इसका गठन अपने सदस्य देशों की संप्रभुता और एकता को बनाए रखने और किसी भी विवाद से बचने और निपटारा करने के लिए एक निकाय के रूप में किया गया था। वर्तमान में यूरोपिय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन हैं।
कैसे बना यूरोपीय संघ और क्यों पड़ी इसके गठन की जरूरत?
दरअसल यूरोपीय संघ के गठन की जरूरत युद्ध की विभीषिका को देखने के बाद महसूस हुई। 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद पूरा यूरोप महाद्वीप राजनीतिक,आर्थिक और सामाजिक रूप से लगभग नष्ट हो चुका था। इतने बड़े महाविनाश के बाद यह साफ हो गया कि अत्यधिक राष्ट्रवाद और आपसी प्रतिस्पर्धा ने महाद्वीप को विनाश की ओर धकेला है। इसके बाद शांति,सहयोग और साझा विकास की जरूरत से एक ऐसे संगठन की जरूरत महसूस हुई जो ऐसा कर सके। पहली बार 1946 में ब्रिटेन के तत्कालीन नेता विंस्टन चर्चिल ने स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख विश्वविद्यालय में दिए गए अपने ऐतिहासिक भाषण में 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ यूरोप'की वकालत की। उन्होंने यूरोपीय देशों से अपील की कि वे आपसी सहयोग के जरिए एक साझा भविष्य की ओर बढ़ें।
इसके बाद यूरोपीय एकीकरण की दिशा में काम शुरू हुआ। इसकी पहली व्यावहारिक शुरुआत 1952 में पेरिस संधि के साथ हुई। इसके तहत बेल्जियम,फ्रांस, जर्मनी,इटली,लक्ज़मबर्ग और नीदरलैंड ने अपने कोयला और इस्पात उत्पादन को एक साझा बाजार के तहत लाने पर सहमति जताई। जिससे यूरोपीय कोयला और इस्पात समुदाय (ECSC)की स्थापना हुई।
फिर ऐसे हुई औपचारिक शुरुआत
इसके बाद 1957 में रोम संधि के जरिए दो और अहम संस्थाएं अस्तित्व में आईं। पहली,यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) और दूसरी यूरोपीय परमाणु ऊर्जा समुदाय। 1965 फिर इन तीनों का विलय हो गया। जिसके तहत इन तीनों समुदायों को मिलाकर यूरोपीय समुदाय का गठन किया गया। इसके बाद यूरोपीय एकीकरण की प्रक्रिया और तेज हो गई। फिर 1973 में पहली बार इसका विस्तार हुआ, जब डेनमार्क,आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम इसमें शामिल हुए। इसके बाद 1981 में ग्रीस और 1986 में स्पेन और पुर्तगाल भी इससे जुड़े। इसी दौर में 1985 का शेंगेन समझौता हुआ, इस समझौते के तहत इन सदस्य देशों के बीच बिना पासपोर्ट नियंत्रण के खुली सीमाओं का रास्ता खोला। यह व्यवस्था 1995 में लागू हुई। बाद में, 1986 का सिंगल यूरोपीय अधिनियम आया,जिसने आर्थिक एकीकरण की समय-सीमा तय की और साझा मुद्रा व साझा नीतियों की दिशा में चीजें और बेहतर हुईं। आखिरकार 7 फरवरी 1992 को नीदरलैंड के मास्ट्रिख्ट शहर में हस्ताक्षरित मास्ट्रिख्ट संधि ने यूरोपीय यूनियन की औपचारिक रूप से शुरुआत हुई।
कौन-कौन से देश हैं इसके सदस्य?
आज यूरोपीय संघ दुनिया की सबसे बड़े आर्थिक और राजनीतिक संगठनों में से एक है। फिलहाल यूरोपीय संघ में 27 सदस्य देश शामिल हैं। जिनमें ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड्स, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन और स्वीडन हैं। वहीं, 2020 में ब्रेक्जिट के जरिए इससे बाहर हो चुका है,लेकिन इसके बावजूद यूरोपीय संघ वैश्विक राजनीति में एक मजबूत शक्ति बना हुआ है।
ईयू।
कैसे काम करता है यूरोपीय यूनियन?
दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक साझेदारियों में शुमार है। यह अपने सदस्य देशों के लिए साझा कानून,साझा व्यापार नीति बनाता है। यूरोपीय यूनियन एक साझा शासन व्यवस्था के तहत काम करता है, जिसमें नीति तय करने से लेकर कानून लागू करने और न्यायिक निगरानी तक के लिए सात अलग-अलग संस्थाएं जिम्मेदार हैं। इनमें शामिल हैं-
- यूरोपीय परिषद यूरोपीय संघ की सर्वोच्च राजनीतिक दिशा तय करने वाला निकाय है। इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख,यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष शामिल होते हैं।
- यूरोपीय संसद यूरोपीय संघ की एकमात्र प्रत्यक्ष निर्वाचित संस्था है। संसद यूरोपीय संघ की परिषद के साथ मिलकर कानून बनाती है,हालांकि इसकी शक्तियां राष्ट्रीय संसदों से कम हैं।
- यूरोपीय संघ की परिषद को मंत्रिपरिषद भी कहा जाता है। इसमें सदस्य देशों के मंत्री शामिल होते हैं, जो कानूनों पर चर्चा करते हैं,संशोधन करते हैं और उन्हें मंजूरी देते हैं। यह यूरोपीय संघ की द्विसदनीय विधायी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
- यूरोपीय आयोग, यूरोपीय संघ की कार्यपालिका है। आयोग कानूनों का प्रस्ताव रखता है,नीतियों को लागू करता है और संधियों के पालन को सुनिश्चित करता है। इसमें हर सदस्य देश से एक आयुक्त होता है और इसका अध्यक्ष यूरोपीय परिषद द्वारा नामित तथा संसद द्वारा चुना जाता है।
- यूरोपीय लेखा परीक्षक न्यायालय (ECA) यूरोपीय संघ के बजट और खर्च की निगरानी करता है और वित्तीय अनियमितताओं की जांच करता है।
- यूरोपीय संघ का न्यायालय (CJEU) यूरोपीय संघ के कानून को सभी सदस्य देशों में समान रूप से लागू करता है और कानूनी विवादों का समाधान करता है। इसका मुख्यालय लक्जमबर्ग में है।
- यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) यह यूरो क्षेत्र के लिए मौद्रिक नीति तय करता है,ब्याज दरें निर्धारित करता है और मुद्रा स्थिरता बनाए रखता है। इसका मुख्यालय फ्रैंकफर्ट,जर्मनी में है।
- वित्तीय पर्यवेक्षण की यूरोपीय प्रणाली (ESFS) यह यूरोपीय वित्तीय प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करती है। इसके तहत यूरोपीय सिस्टेमिक रिस्क बोर्ड और बैंकिंग, बीमा तथा बाजार से जुड़े तीन प्रमुख पर्यवेक्षी प्राधिकरण काम करते हैं।
क्या है यूरोपीय संघ की मुद्रा
इसके 19 सदस्य देश अपनी आधिकारिक मुद्रा के तौर पर 'यूरो'का उपयोग करते हैं,जबकि 8 सदस्य देश (बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्वीडन) यूरो का उपयोग नहीं करते हैं। इसके अलावा ईयू ने कानूनों की मानकीकृत प्रणाली के माध्यम से एक आंतरिक एकल बाजार विकसित किया है जो सभी सदस्य राज्यों के मामलों में लागू होता है और सभी सदस्य देशों की इस पर एक राय होती है।
यूरोपीय यूनियन।
100 से अधिक देशों के लिए सबसे बड़ा बाजार
यूरोपीय संघ आज दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक समूह है और वैश्विक स्तर पर वस्तुओं व सेवाओं का सबसे बड़ा आयातक माना जाता है। यह 100 से अधिक देशों के लिए प्रमुख बाजार की भूमिका में है। व्यापार के साथ-साथ यूरोपीय संघ मानवीय सहायता में भी आगे है और हर साल दुनिया भर में आपदाओं से प्रभावित करीब 12 करोड़ लोगों को किसी न किसी रूप में मदद करता है।
