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क्या है 'ड्रोन वॉल' जिससे रूस का मुकाबला करेंगे यूरोप के देश, आखिर कितनी कारगर है यह तरकीब

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जारी है। साढ़े तीन साल बाद भी यह थमा नहीं है और इसे रुकने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। इस बीच, यूक्रेन पर पुतिन ने हमले भी तेज कर दिए हैं। इस युद्ध के जारी रहने के बीच बीते दो साल में कम से कम छह मौके ऐसे आए जब रूस के लड़ाकू विमानों ने पोलैंड के वायु क्षेत्र का उल्लंघन किया।

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Photo : AP
पुतिन से डरे यूरोप के देश। तस्वीर-AP
Written by: Alok Rao
Updated Oct 3, 2025, 15:07 IST
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Drone Wall : पोलैंड के वायु क्षेत्र में रूसी ड्रोन नजर आने के बाद यूरोप के देशों में पुतिन का खौफ बढ़ने लगा है। यूरोपीय देशों को लगता है कि देर-सबेर वे रूस के निशाने पर आ सकते हैं और ऐसा हुआ तो उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। ऐसे में अपने लिए वे एक सुरक्षा घेरा तैयार करना चाहते हैं। रूसी हमलों से बचने के लिए उन्होंने 'ड्रोन वॉल' की तरकीब निकाली है। यानी यूरोप की पूर्वी सीमा पर वे 'ड्रोन की एक दीवार' खड़ी करना चाहते हैं। बुधवार को कोपेनहेगन में यूरोपीय संघ के नेताओं की हुई बैठक में इस तरकीब पर चर्चा हुई। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वोन डे लेयेन ने 'ड्रोन वॉल' के विचार को प्रमुखता से सदस्य देशों के सामने रखा। यूरोप के कई देशों को उनकी इस तरकीब में दम नजर आया तो कई देश ऐसे भी हैं जिन्हें इस पर भरोसा जम नहीं पाया या कहिए कि इसके स्वरूप, आकार और इस 'ड्रोन वॉल' की सफलता को लेकर उनके मन में संदेह है। यानी 'ड्रोन वॉल' की तरकीब पर यूरोप के सभी देशों में सहमति नहीं है। सहमति नहीं बन पाने की कुछ वजहें हैं।

पूरी तरह पुख्ता नहीं है यह तरकीब

रिपोर्टों में एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला ने यूरोप की पूर्वी सीमा पर 'ड्रोन वॉल' बनाने की जो तरकीब रखी है, वह पूरी तरह से पुख्ता नहीं है। इसे तैयार किए जाने वाले ब्योरे में कमी है। सबसे बड़ी बात इसका दायरा कितना बड़ा होगा और इसे तैयार करने में आने वाली लागत पर पूरी स्पष्टता नहीं है। आगे इस 'ड्रोन वॉल' पर जब भी चर्चा होगी तो उसमें ये दोनों मुद्दे प्रमुखता से उभरकर सामने आएंगे। उर्सुला के इस रक्षात्मक विचार की प्रशंसा और अपनी वायु सुरक्षा पर गंभीरता यूरोप के सभी देश दिखा रहे हैं लेकिन यह विचार कैसे मूर्त रूप लेगा, इसकी रूपरेखा, योजना क्या और कैसी होगी, इस पर ठोस रणनीति नहीं बन पाई है।

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पोलैंड के वायु क्षेत्र का 6 बार उल्लंघन

यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध जारी है। साढ़े तीन साल बाद भी यह थमा नहीं है और इसे रुकने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। इस बीच, यूक्रेन पर पुतिन ने हमले भी तेज कर दिए हैं। इस युद्ध के जारी रहने के बीच बीते दो साल में कम से कम छह मौके ऐसे आए जब रूस के लड़ाकू विमानों ने पोलैंड के वायु क्षेत्र का उल्लंघन किया। रिपोर्टों के मुताबिक इसी साल रूसी फाइटर प्लेन चार बार एस्टोनिया के हवाई क्षेत्र में देखे गए। बीते 19 सितंबर को रूसी प्लेन ने उसकी वायु सीमा का उल्लंघन किया। 'द इकोनॉमिस्ट' ने इसे बीते दो दशकों में नाटो के खिलाफ रूस की सबसे बड़ी आक्रामकता बताया। यही नहीं यूरोप के देश लिथुआनिया, नॉर्वे, स्वीडन, मोल्डोवा और जर्मनी अपनी वायु सीमा का उल्लंघन करने का आरोप रूस पर लगा चुके हैं।

यूक्रेन को हमें यूरोप के चश्मे से देखना होगा-फ्रेडेरिक्सन

सितंबर महीने में डेनमार्क और नॉर्वे ने कहा कि उनके हवाई क्षेत्र में कई बार रूसी ड्रोन देखे गए। वायु सीमा उल्लंघन के इस ताजा मामले की चिंता कोपेनहेगेन की बैठक में भी दिखी। यूरोप के देशों ने अपनी सुरक्षा चिंताएं जाहिर कीं। रूसी फाइटर प्लेन एवं ड्रोन का खौफ उन पर इतना हावी हुआ कि उन्हें 22 सितंबर को कोपेनहेगन एयरपोर्ट सहित अन्य हवाई अड्डों को करीब चार घंटे तक बंद रखना पड़ा। रूस से बढ़ते खतरे का जिक्र करते हुए डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडेरिक्सन ने बुधवार को कहा कि यूरोप के खिलाफ रूस 'हाइब्रिड वार' शुरू कर चुका है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में रूस का युद्ध हमें डराने का एक प्रयास है। डच पीएम ने कहा कि यूक्रेन की तरफ अपनी सुरक्षा के नजरिए से नहीं बल्कि यूरोप के चश्मे से देखना होगा।

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कैसी दिखेगी ‘ड्रोन वॉल’?

दरअसल, ड्रोन कोई वास्तविक दीवार नहीं होगी। बल्कि युद्ध के मोर्चे पर यह बेहतर डाटा साझा करेगी और यह एकीकृत एंटी-ड्रोन अवसंरचना नेटवर्क के निर्माण पर आधारित होगी। इसमें बेहतर रडार, ध्वनि-संवेदी यंत्र, जैमर और यहां तक कि इसमें एंटी-ड्रोन क्षमताएं शामिल होंगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार इसका उद्देश्य 'एक संयुक्त ढाल' बनाना है। यह सिस्टम यूरोपीय संघ या उसके करीबी सहयोगी देशों के वायुक्षेत्र में प्रवेश करने वाले ड्रोन का बेहतर तरीके से पता लगाएगा और उन्हें निष्क्रिय करेगा।' इस 'ड्रोन वॉल' के बारे में नाटो के महासचिव मार्क रूट ने इस हफ्ते कहा, 'हम लाखों यूरो या डॉलर खर्च कर ड्रोन को मार गिराने के लिए मिसाइलों का उपयोग नहीं कर सकते, जबकि ड्रोन की लागत केवल कुछ हजार डॉलर होती है।'

इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर अधिक निर्भर होगा यह सिस्टम

'ड्रोन वॉल' संभवतः इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर अधिक निर्भर होगी: यानी ड्रोन की रक्षा उनके नेविगेशन उपग्रहों या संचार प्रणालियों को जाम करके की जाएगी। वे स्वचालित एंटी-एयरक्राफ्ट गन या जाल जैसी हो सकती हैं। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का व्यापक समावेश भी संभव है, जो असली खतरों और डिकॉय में बेहतर भेद करने तथा समन्वित तरीके से काउंटर-ड्रोन उपायों की तैनाती को बेहतर बना सके।

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फंडिंग और राजनीतिक इच्छाशक्ति का सवाल

रूस की 2,250 किमी लंबी सीमा यूरोपीय संघ के देशों (फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया और पोलैंड) से लगती है। इसके अलावा नॉर्वे, जो कि EU का हिस्सा नहीं है लेकिन यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र का सदस्य है, के साथ भी इसकी 200 किमी सीमा है। साथ ही मॉस्को का करीबी सहयोगी बेलारूस, यूरोपीय संघ के देशों के साथ 1,200 किमी लंबी सीमा साझा करता है। इतने विशाल क्षेत्र में एक व्यापक ड्रोन रक्षा प्रणाली बनाना कई चुनौतियों से भरा है। सबसे बड़ी चुनौती है इसकी लागत, जो शायद राजनीतिक रूप से असहनीय साबित हो सकती है। वारसॉ सिक्योरिटी फोरम में सोमवार को बोलते हुए जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि ड्रोन वॉल बनाने की योजनाएँ सीमित संसाधनों का गलत इस्तेमाल होंगी। बुधवार को फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल माक्रों ने भी यही चिंता जताई। उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'मैं ऐसे तरह-तरह के शब्दों से सावधान हूं। चीजें थोड़ी अधिक जटिल हैं।' कुल मिलाकर 'ड्रोन वॉल' एक महत्वाकांक्षी योजना लेकिन इसे हकीकत बनाने के लिए यूरोपीय देशों में सहमति बनानी होगी। सबसे बड़ा मुद्दा इसके फंडिंग को लेकर है।

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