क्या है जाति जनगणना? आखिरी बार कब हुई और अब क्यों पड़ी जरूरत? जानिए अभी इसकी क्या है अहमियत

Caste Census: जाति जनगणना सरकार के लिए व्यक्तियों की जाति पहचान का डेटा एकत्र करने का एक उपकरण है। यह जानकारी सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह विभिन्न जाति समूहों के जनसांख्यिकीय वितरण, उनकी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और राजनीतिक क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व के स्तर को उजागर करता है।

Caste Census: जाति जनगणना भारत में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसमें राष्ट्रीय जनगणना के दौरान व्यक्तियों की जाति पहचान का डेटा एकत्र किया जाता है। यह डेटा देश के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह विभिन्न जाति समूहों के जनसांख्यिकीय वितरण, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और प्रतिनिधित्व के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

जाति जनगणना

क्या है जाति जनगणना, अभी इसकी क्या है अहमियत

जानिए जाति जनगणना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में जाति जनगणना का इतिहास ब्रिटिश उपनिवेशी काल से जुड़ा हुआ है। 1881 से 1931 तक, ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न जातियों की गणना करने के लिए नियमित जनगणना का आयोजन किया। हालांकि 1941 में एक जनगणना का आयोजन किया गया, लेकिन जातियों पर एकत्रित डेटा प्रकाशित नहीं किया गया। भारत की स्वतंत्रता के बाद 1951 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर, जातियों की गिनती बंद करने का फैसला किया। इस निर्णय का उद्देश्य उपनिवेशी शासन और विभाजन के वर्षों के बाद एक समान समाज के विचार को बढ़ावा देना था।

End of Feed