जातिगत जनगणना के पीछे क्या है सियासी गणित? क्या 2024 में मोदी के लिए साबित होगा चुनौती

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 20, 2023, 04:12 PM IST

जातिगत जनगणना को लेकर सबसे पुरजोर आवाज बिहार से उठ रही है। नीतीश कुमार सरकार ने केंद्र से इसकी कई बार मांग की है। इसे लेकर नीतीश-तेजस्वी ने दिल्ली जाकर पीएम मोदी से भी मुलाकात की थी।

Politics Over Caste Census: देश में जातिगत जनगणना को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। विपक्ष की ओर से इसे 2024 चुनाव में मुद्दा बनाए जाने की पूरी संभावना है। कांग्रेस, आरजेडी, सपा, जेडीयू जैसी कई पार्टिंयां जातिगत जनगणना की मांग उठा रही हैं, लेकिन केंद्र फिलहाल इस पर राजी नहीं दिख रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षियों और केंद्र सरकार दोनों का अलग-अलग रुख है। क्या है पूरा विवाद और किस तरह का सियासी गणित लगाया जा रहा है, ये समझने की कोशिश करते हैं।

PM Modi and Opposition leaders

जातिगत जनगणना के पीछे क्या है सियासी गणित

क्या है जातिगत जनगणना

जातिगत जनगणना का अर्थ है जनगणना की कवायद में भारत की जनसंख्या का जातिवार सारणीकरण करना। भारत ने 1872 में देशवासियों की गिनती शुरू की थी। 1952 से देश ने अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) पर अलग-अलग डेटा भी गिना और प्रकाशित किया। भारत अपने लोगों के धर्मों, भाषाओं और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित डेटा भी प्रकाशित करता है।

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