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डोनाल्ड ट्रंप के MAGA का जादू क्यों पड़ने लगा फीका? महंगाई और ईरान युद्ध ने कितना बदला वोटरों का मिजाज

US Midterm Elections Analysis: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों में डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस में बहुमत हासिल कर ट्रंप सरकार को झटका दिया है। जिसके बाद कहा जाने लगा है कि ट्रंप के MAGA का जादू अब फीका पड़ रहा है।

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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की पार्टी को मिली है बड़ी हार (News Room Verified AI Photo)
Authored by: सुनील कुमार सिरीज
Updated Nov 5, 2026, 12:26 IST
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US Midterm Elections Analysis: अमेरिका के 2026 मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह केवल कांग्रेस में राजनीतिक विरोध बढ़ने का मामला नहीं है, बल्कि उनके दूसरे कार्यकाल के पहले दो वर्षों के प्रदर्शन पर जनता के फैसले के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति और उनके दूसरे कार्यकाल के प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महंगाई, ईरान युद्ध और ट्रंप की कार्यशैली को लेकर असंतोष ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ाईं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस 'Make America Great Again' (MAGA) के नारे के साथ ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान बनाने का वादा किया था, क्या अमेरिकी वोटरों को अब उस वादे में भरोसा नहीं रहा?

चुनाव से पहले अमेरिकी मतदाताओं के सामने रोजमर्रा की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतें, महंगा पेट्रोल, रोजगार और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे थे। दूसरी तरफ ईरान के साथ युद्ध ने अमेरिका की विदेश नीति को घरेलू राजनीति के केंद्र में ला दिया। इसके अलावा ट्रंप की बयानबाजी, विरोधियों के साथ टकराव और उनकी सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर भी सवाल उठे।

Associated Press (AP) के AP Voter Poll के मुताबिक, मतदाताओं की नाराजगी केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं थी। बड़ी संख्या में लोगों को लगा कि राष्ट्रपति की प्राथमिकताएं उनकी जरूरतों से मेल नहीं खातीं। आखिर अमेरिकी मतदाताओं का मिजाज क्यों बदला? क्या महंगाई और ईरान युद्ध ने ट्रंप के चुनावी वादों की परीक्षा ली? और क्या उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक शैली भी रिपब्लिकन पार्टी की हार का कारण बनी?

अमेरिकी परिवारों पर बढ़ा खर्च का दबाव, महंगाई बनी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा

अमेरिका में महंगाई का मुद्दा ट्रंप के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने जो बाइडेन प्रशासन की आर्थिक नीतियों और बढ़ती कीमतों को लेकर लगातार सवाल उठाए थे। उन्होंने सत्ता में आने के बाद अमेरिकियों को आर्थिक राहत देने और महंगाई को कंट्रोल करने का भरोसा दिया था, लेकिन 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की चिंताएं कम नहीं हुईं। Reuters/Ipsos के 3 नवंबर 2026 को जारी चुनाव पूर्व सर्वे में 48 फीसदी रजिस्टर्ड वोटरों ने Cost of Living को वोट देने का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। यह सर्वे 29 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच 1,765 अमेरिकी वयस्कों के बीच किया गया था। यह चुनाव पूर्व सर्वे था, एग्जिट पोल नहीं। इससे पहले, Pew Research Center के 8 अक्टूबर के सर्वे में भी अर्थव्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बताया गया। इस सर्वे में शामिल 84 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटर्स ने कहा कि अर्थव्यवस्था उनके वोट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इनमें डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले 88 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले 82 प्रतिशत मतदाता शामिल थे। इससे स्पष्ट होता है कि अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता केवल विपक्षी मतदाताओं तक सीमित नहीं थी।

ट्रंप के MAGA नारे की चमक पड़ी फीकी (फोटो- AP)

ट्रंप के MAGA नारे की चमक पड़ी फीकी (फोटो- AP)

महंगाई के सरकारी आंकड़ों ने भी बढ़ाई चिंता

अमेरिका में महंगाई की स्थिति को समझने के लिए Bureau of Labor Statistics (BLS) के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं। BLS की 14 अक्टूबर 2026 को जारी सितंबर की Consumer Price Index (CPI) रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में महंगाई दर सालाना आधार पर 3.7 प्रतिशत रही। सितंबर में CPI पिछले महीने के मुकाबले 0.6 प्रतिशत बढ़ा। सबसे अधिक दबाव एनर्जी प्राइस में देखने को मिला। सितंबर में पेट्रोल की कीमतों में एक महीने में 9.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सालाना आधार पर पेट्रोल की कीमतों में 34.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसका मतलब था कि अमेरिकी परिवारों को रोजमर्रा के खर्च के साथ-साथ आवागमन के लिए भी अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे थे। यहां ध्यान देने वाली बात है कि CPI की 3.7 प्रतिशत महंगाई दर सभी वस्तुओं और सेवाओं का औसत है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हर चीज की कीमत इतनी ही बढ़ी।

ईरान युद्ध ने आम अमेरिकी को कैसे प्रभावित किया?

ट्रंप प्रशासन के सामने दूसरी बड़ी चुनौती ईरान युद्ध रहा। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ा दी। इसका एक बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पैदा हुआ संकट था। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन रास्तों में शामिल है। Reuters/Ipsos के 20 मार्च 2026 के सर्वे में शामिल 55 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा था कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का उनके पर्सनल फाइनेंस पर कम से कम कुछ असर पड़ा है, जबकि 21 फीसदी लोगों ने गंभीर आर्थिक प्रभाव की बात कही थी। अमेरिकी Energy Information Administration (EIA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2 नवंबर 2026 को अमेरिका में सभी ग्रेड के पेट्रोल की औसत खुदरा कीमत 4.29 डॉलर प्रति गैलन थी। हालांकि, EIA के साप्ताहिक आंकड़े यह भी बताते हैं कि 28 सितंबर के 4.603 डॉलर प्रति गैलन के स्तर से कीमत घटकर 2 नवंबर को 4.290 डॉलर हो गई थी। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पेट्रोल की कीमतें लगातार बढ़ती ही रहीं। लेकिन सितंबर के CPI में दर्ज सालाना वृद्धि बताती है कि ऊर्जा खर्च पर दबाव अधिक था।

क्या अमेरिकी जनता ईरान युद्ध के खिलाफ?

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को अमेरिकी सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं के आधार पर उचित ठहराया। लेकिन अमेरिकी जनता के बीच इस कार्रवाई की लागत और जरूरत को लेकर सहमति नहीं थी। Reuters/Ipsos के 3 नवंबर के सर्वे में केवल 25 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई अपनी Cost के लायक थी। इसके विपरीत 55 प्रतिशत ने इसे नकार दिया। सर्वे में जवाब देने वाले 18 प्रतिशत लोगों ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी। इस सर्वे से पता चलता है कि युद्ध को लेकर वोटरों के बीच असंतोष तो जरूर था। Pew Research Center के अक्टूबर सर्वे में 57 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटरों ने विदेश नीति को अपने वोट के लिए महत्वपूर्ण बताया था। यानी विदेश नीति केवल वॉशिंगटन की कूटनीतिक बहस तक सीमित नहीं थी। उसका असर चुनावी चर्चा और मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर भी था। Reuters की 4 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध से उपजी नाराजगी और महंगाई ने रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक रूप से मजबूत राज्यों में भी डेमोक्रेट्स को फायदा पहुंचाया। रिपोर्ट ने युद्ध और घरेलू खर्च के बीच संबंध को चुनावी नतीजों की प्रमुख वजहों में शामिल किया।

न्यूयॉर्क में ईरान जंग के खिलाफ प्रदर्शन (फोटो- AP)

न्यूयॉर्क में ईरान जंग के खिलाफ प्रदर्शन (फोटो- AP)

'Make America Great Again' यानी MAGA का क्या हुआ? वादे और हकीकत के बीच बढ़ी दूरी

डोनाल्ड ट्रंप की राजनीति का सबसे प्रमुख नारा रहा है, 'Make America Great Again' यानी अमेरिका को फिर से महान बनाना। MAGA केवल एक चुनावी नारा नहीं, बल्कि ट्रंप के राजनीतिक आंदोलन और उनके समर्थकों की पहचान भी बन चुका है। इस नारे के तहत ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार बढ़ाने, महंगाई घटाने, illegal immigration पर नियंत्रण और अमेरिका के हितों को प्राथमिकता देने का वादा किया था। लेकिन 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की नकारात्मक राय और ट्रंप की गिरती अप्रूवल रेटिंग ने इस राजनीतिक संदेश के सामने चुनौती खड़ी कर दी। Pew Research Center के 8 अक्टूबर 2026 के सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 30 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि 68 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज को खारिज किया। यह उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे कम अप्रूवल रेटिंग थी। इस सर्वे का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष था, जिसमें 63 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटर्स ने कहा कि ट्रंप उनके कांग्रेस चुनाव के वोट को प्रभावित करने वाला फैक्टर हैं। इनमें 44 प्रतिशत ने कहा कि उनका वोट ट्रंप के खिलाफ है, जबकि 19 प्रतिशत ने कहा कि वे ट्रंप के समर्थन में वोट कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की व्यक्तिगत छवि और उनके प्रशासन का प्रदर्शन मतदाताओं के फैसले से गहराई से जुड़ गया था।

ट्रंप की बयानबाजी और व्यक्तिगत छवि का भी पड़ा असर?

डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक शैली हमेशा से चर्चा का विषय रही है। उनके तीखे बयान, विरोधियों पर व्यक्तिगत हमले, सोशल मीडिया पर टिप्पणियां और कई मुद्दों पर विवादित प्रतिक्रियाएं अमेरिकी राजनीति में लगातार सुर्खियां बनती रही हैं। इस बार सवाल यह था कि क्या लगातार राजनीतिक टकराव और राष्ट्रपति की व्यक्तिगत छवि ने मतदाताओं को उनकी सरकार के कामकाज से दूर किया? इसका जवाब Associated Press (AP) Voter Poll में मिले कुछ महत्वपूर्ण संकेतों से मिलता है। Associated Press की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग दो-तिहाई मतदाताओं ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकताएं सही नहीं थीं। इनमें से भारी बहुमत ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया। AP के एनालिसिस के मुताबिक, वोटरों के बीच यह धारणा भी बनी कि ट्रंप आम लोगों की जरूरतों के बजाय अपनी व्यक्तिगत संपत्ति, व्हाइट हाउस के निर्माण कार्य और अपने करीबियों के हितों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

रिपोर्ट में ट्रंप के व्हाइट हाउस में प्रस्तावित बॉलरूम निर्माण, उनके परिवार के कारोबार और प्रशासन से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया गया। एक अन्य महत्वपूर्ण आंकड़ा यह था कि लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं ने माना कि कांग्रेस राष्ट्रपति की शक्तियों पर नियंत्रण और संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त काम नहीं कर रही है। इनमें रिपब्लिकन मतदाता भी शामिल थे। इससे पता चलता है कि चुनाव में राष्ट्रपति की कार्यशैली और जवाबदेही भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए थे।

क्या ट्रंप के बेतुके या विवादित बयानों ने वोटरों को प्रभावित किया?

जो सर्वे सामने आए वह यह स्पष्ट तौर पर तो नहीं बताते कि किसी खास बयान या टिप्पणी के कारण कितने मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ वोट दिया, लेकिन Pew Research Center के आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप के खिलाफ वोट देने वाले मतदाताओं की संख्या उनके समर्थन में वोट देने वालों से काफी अधिक थी। CBS News के एग्जिट पोल में भी करीब 10 में से 6 मतदाताओं ने कहा कि खुद ट्रंप इस चुनाव में उनके वोट को प्रभावित करने वाले फैक्टर थे। इसलिए इतना कहा जा सकता है कि ट्रंप की व्यक्तिगत छवि और उनकी राजनीतिक शैली चुनाव में एक फैक्टर तो बनीं।

डेमोक्रेट समर्थक (फोटो- AP)

डेमोक्रेट समर्थक (फोटो- AP)

क्या रिपब्लिकन पार्टी की हार सिर्फ ट्रंप की वजह से हुई?

चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करते समय यह समझना भी जरूरी है कि डेमोक्रेट्स की जीत का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिकी मतदाताओं ने उनकी पार्टी को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। AP Voter Poll के मुताबिक, लगभग आधे मतदाताओं की ही डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति अनुकूल राय थी। करीब 10 में से 4 मतदाताओं ने रिपब्लिकन पार्टी के प्रति सकारात्मक राय जताई। इसका मतलब है कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन देने वाले सभी वोटर पार्टी के कट्टर समर्थक नहीं थे। उनमें ऐसे लोग भी थे जो ट्रंप प्रशासन की नीतियों से असंतुष्ट थे और बदलाव चाहते थे। AP की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर चिंता रखने वाले आधे से अधिक मतदाताओं ने इसे अपने वोट के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना। करीब दो-तिहाई मतदाताओं ने ट्रंप की प्राथमिकताओं को गलत बताया। इसके अलावा कुछ राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि, अनुभव और ट्रंप के प्रति उनकी नजदीकी भी चुनावी चर्चा का हिस्सा रही।

ट्रंप और जेडी वेंस ने हार के बाद क्या कहा?

चुनाव परिणाम आने के बाद ट्रंप ने ईरान युद्ध के राजनीतिक प्रभाव को स्वीकार किया, लेकिन सैन्य कार्रवाई के अपने फैसले का बचाव भी किया। Reuters की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने माना कि ईरान युद्ध ने रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई जरूरी थी और जरूरत पड़ने पर वह ऐसा दोबारा करेंगे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर युद्ध को हार का कारण बताते हुए लिखा, 'The reason we lost is the war.' वेंस की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रिपब्लिकन नेतृत्व के भीतर भी युद्ध के राजनीतिक नुकसान को लेकर सामने आई स्वीकारोक्ति थी।

ट्रंप ने चुनाव के बाद अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ उम्मीदवारों को मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।

ट्रंप ने इस चुनाव को अपने दूसरे कार्यकाल पर जनमत संग्रह के रूप में पेश किया था और समर्थकों से कहा था कि वे ऐसे वोट करें जैसे राष्ट्रपति खुद बैलेट पर हों, लेकिन नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान हुआ और डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लिया। रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रंप का समर्थन भले कायम है, लेकिन व्यापक मतदाता वर्ग के बीच उनकी स्वीकार्यता और उनके प्रशासन के प्रदर्शन को लेकर सवाल जरूर बढ़े हैं। अमेरिकी मतदाताओं का संदेश इतना जरूर है कि केवल 'Make America Great Again' का नारा पर्याप्त नहीं है। मतदाता अपनी जेब, रोजमर्रा की जिंदगी, सरकार की जवाबदेही और देश की विदेश नीति के परिणामों को भी बहुत महत्व देते हैं।

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