दिया 'राजनीतिक दलबदलुओं को नकारो' का नारा, अब TMC के बागी सांसदों को पनाह देकर सुर्खियों में आया NCPI

एनसीपीआई के प्रचार पोस्टर पर मतदाताओं से पार्टी के चुनाव चिह्न 'पेन की निब' पर मतदान करने की अपील करते हुए संदेश लिखा था, अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दलबदलुओं को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाजसेवियों का समर्थन करें।

'अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दलबदलुओं को नकारें' के नारे के साथ 2023 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लगभग गुमनामी के बीच चुनाव लड़ने वाला एक राजनीतिक दल रविवार को उस वक्त अचानक सुर्खियों में आ गया जब तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों वाले बागी गुट ने एनसीपीआई में विलय का ऐलान किया। नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) नामक इस दल ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी, लेकिन अंततः उसके प्रत्याशी चावमानु, अंबासा और कैलाशहर सीटों पर ही मैदान में उतर सके। चुनावी नतीजों में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और उसके उम्मीदवार या तो 'नोटा' (इनमें से कोई नहीं) से पीछे रहे या उससे मामूली अंतर से आगे निकल पाए।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में है कार्यालय

करमचारा सीट से पार्टी की उम्मीदवार रीता शिल हलाम का नामांकन जांच के दौरान खारिज कर दिया गया था। दिलचस्प तथ्य यह है कि एनसीपीआई का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा में है। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में शेउली कुंडू का नाम पार्टी की अध्यक्ष के रूप में दर्ज हैं, जो स्वयं को कलकत्ता उच्च न्यायालय में अधिवक्ता बताती हैं। एनसीपीआई के प्रचार पोस्टर पर मतदाताओं से पार्टी के चुनाव चिह्न 'पेन की निब' पर मतदान करने की अपील करते हुए संदेश लिखा था, अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक दलबदलुओं को नकारें। राजनीतिक हस्तियों के बजाय समाजसेवियों का समर्थन करें।

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