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राज्यसभा चुनाव: 10 राज्य, 24 सीटें और सबसे बड़ा सवाल, क्या NDA पार करेगा बहुमत की दीवार?

इस चुनाव में भाजपा यदि यह संख्या बल हासिल कर लेती है तो संविधान संशोधन सहित अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराना उसके लिए आसान हो जाएगा। लोकसभा में एनडीए के पास तो बहुमत है लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने से उसके कई अहम विधयेक पारित होने से लटक जाते हैं।

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Photo : PTI
10 राज्यों में राज्यसभा की 24 सीटों पर चुनाव।
Written by: Alok Rao
Updated Jun 5, 2026, 13:11 IST
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Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा की 24 सीटों के लिए जून महीने की 18 तारीख को चुनाव होगा। 10 राज्यों की इन 24 सीटों के लिए मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और इंडी ब्लॉक के बीच है। दोनों गठबंधन से उम्मीदवार घोषित हो चुके हैं। चुनाव के नतीजे भी 18 जून को मतदान के बाद घोषित होंगे। ये 24 सीटें जून और जुलाई में रिक्त हो रही हैं। ये चुनाव नतीजे उच्च सदन में एडीए एवं इंडी ब्लॉक के संख्या बल को प्रभावित करेंगे। अभी की अगर बात करें तो राज्यसभा में भाजपा के सदस्यों की संख्या 113 और एनडीए की कुल संख्या 148 है। राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 245 है। भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है। दो तिहाई का जादुई आंकड़ा छूने के लिए उसे 15 और सांसदों की जरूरत है।

जादुई आंकड़ा शायद ही छू पाए NDA

इस चुनाव में भाजपा यदि यह संख्या बल हासिल कर लेती है तो संविधान संशोधन सहित अन्य महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराना उसके लिए आसान हो जाएगा। लोकसभा में एनडीए के पास तो बहुमत है लेकिन राज्यसभा में बहुमत न होने से उसके कई अहम विधयेक पारित होने से लटक जाते हैं। एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इस चुनाव में एनडीए इस जादुई आंकड़े को शायद ही छू पाए लेकिन उसके सदस्यों की संख्या बढ़नी तय है। 10 राज्यों की विधानसभा के मौजूदा परिदृश्य को देखने पर गुजरात और आंध्र प्रदेश से उसे चार सीटें और मिलनी तय है। एनडीए को कर्नाटक और झारखंड दोनों राज्यों में एक-एक सीट का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी तरह से अन्य राज्यों से एनडीए की सीटें बढ़नी तय है, फिर भी एनडीए को दो तिहाई बहुमत पाने की संभावना कम है।

राज्यसभा से जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, मल्लिकार्जुन खरगे, एचडी देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह, शक्तिसिंह गोहिल जैसे कई चर्चित चेहरे शामिल हैं। बिट्टू राजस्थान से, खरगे और देवगौड़ा कर्नाटक से, दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश से और शक्तिसिंह गोहिल गुजरात से चुनकर राज्यसभा आए।

अलग-अलग तारीखों पर रिक्त हो रहीं सीटें

आंध्र प्रदेश, गुजरात से आने वाले चार-चार सदस्य, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के तीन-तीन और मणिपुर एवं मेघालय से एक-एक सदस्य का कार्यकाल इस 21 जून को समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा झारखंड में दो सीटों पर चुनाव होगा। इनमें से एक सीट 21 जून को खाली हो रही है जबकि दूसरी सीट जेएमएम नेता शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है। सोरेन का 4 अगस्त 2025 को निधन हो गया। अरुणाचल प्रदेश में एक सीट 23 जून को, कर्नाटक की चार सीटें 25 जून को और मिजोरम की एक सीट 19 जुलाई को रिक्त हो जाएगी।

Narendra modi

Narendra modi

एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है चुनाव

राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य एकल संक्रमणीय मत पद्धति के जरिए करते हैं। यह एक आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली है, जहां मतदाता एक ही मतपत्र पर सभी उम्मीदवारों को उनकी प्राथमिकता 1, 2, 3... के आधार पर रैंक करते हैं। यदि पहली पसंद का उम्मीदवार पर्याप्त मत न मिलने से बाहर हो जाता है, तो मत दूसरी पसंद के उम्मीदवार को हस्तांतरित हो जाता है। राज्यसभा में सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष का होता है और इसके एक तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल पर रिटायर होते हैं। ऐसा निरंतरता बनाए रखने के लिए है क्योंकि राज्यसभा स्थायी सदन है जो लोकसभा की तरह कभी भंग नहीं होती।

कर्नाटक से बढ़ सकती है कांग्रेस की सीट

कर्नाटक में जो चार सीटें खाली होने वाली हैं, उनमें से दो भाजपा सहित 3 एनडीए के पास हैं जबकि एक सीट कांग्रेस के पास है। विधायकों की संख्या देखते हुए यहां इस बार बदलाव हो सकता है। कर्नाटक में विधानसभा की 224 सीटें हैं और इनमें से कांग्रेस के पास 135 सदस्य, भाजपा के पास 66 और एनडीए के सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) के पास 16 विधायक हैं। ऐसे में यहां से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 46 सदस्यों के वोटों की जरूरत होगी। सीटों के इस गणित को देखते हुए कर्नाटक में कांग्रेस को दो सीटें मिलनी तय है। अभी कर्नाटक से कांग्रेस के पास एक राज्यसभा सदस्य है। जबकि एक सीट एनडीए के खाते में जाएगी। चौथी सीट का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि विधायक कैसे वोट करते हैं।

आंध्र में सभी 4 सीटें जीत सकता है NDA

आंध्र प्रदेश की अगर बात करें तो अभी रिक्त होने जा रहीं चार सीटों में से तीन सीटें जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआरसीपी के पास हैं जबकि एक सीट सत्तारूढ़ तेलुगू देसम पार्टी (टीडीपी) के पास हैं। यहां भी बदलाव हो सकता है। आंध्र प्रदेश में विधानसभा सदस्यों की संख्या 175 है और इनमें से टीडीपी के पास 135, जनसेना पार्टी के पास 21, भाजपा के पास आठ और वाईएसआरसीपी के पास 11 विधायक हैं। यहां राज्यसभा की एक सीट जीतने का कोटा 36 है। ऐसे में 164 सदस्यों के साथ एनडीए यहां की सभी चार सीटें जीत सकती है।

गुजरात की सभी 4 सीटों पर कब्जा कर सकती है BJP

गुजरात की अगर बात करें तो यहां से खाली हो रहीं चार सीटों में से भाजपा के पास तीन और कांग्रेस के पास एक सीटे है। गुजरात में विधानसभा की 182 सीटें हैं और यहां एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट चाहिए। गुजरात में अभी भाजपा के पास 156 और कांग्रेस के पास 17 विधायक हैं। ऐसे में यहां भी राज्यसभा की सभी चार सीटों पर भाजपा का कब्जा हो सकता है।

MP में तीसरी सीट पर रोचक हो सकता है मुकाबला

राजस्थान में 200 सदस्यीय विधानसभा की तीन राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से दो सीटें वर्तमान में बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के पास है। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 51 वोटों की आवश्यकता होती है। विधानसभा में बीजेपी के 115 और कांग्रेस के 69 विधायक हैं। ऐसे में मौजूदा गणित के अनुसार बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना है। मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भी तीन राज्यसभा सीटें रिक्त हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी और एक कांग्रेस के पास है। यहां जीत का कोटा 58 वोट है। वर्तमान में बीजेपी के 163 और कांग्रेस के 66 विधायक हैं। ऐसे में बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार के जीतने की संभावना मजबूत है। हालांकि, यदि बीजेपी कोई रणनीतिक दांव चलती है तो तीसरी सीट पर भी मुकाबला रोचक हो सकता है।

झारखंड में तीसरी सीट भी जीतने की कोशिश करेगा NDA

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। यहां जीत का कोटा 28 वोट है। फिलहाल एक सीट बीजेपी और एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के पास है। विधानसभा में इंडी गठबंधन के पास 56 और NDA के पास 24 विधायक हैं। ऐसे में इंडी गठबंधन दोनों सीटें जीतने की कोशिश करेगा, जबकि NDA रणनीति और संभावित क्रॉस-वोटिंग के सहारे एक सीट हासिल करने का प्रयास करेगा।

rahul gandhi

rahul gandhi

राज्यसभा चुनाव में पार्टियां कैसे बनाती हैं रणनीति?

सबसे पहले राजनीतिक दल किसी सीट को जीतने के लिए जरूरी वोटों (कोटा) की गणना करते हैं। इसके बाद वे अपने विधायकों की संख्या के आधार पर उम्मीदवारों के बीच वोटों का बंटवारा करते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी पार्टी के पास 100 विधायक हैं और जीत का कोटा 41 है, तो वह अपने विधायकों को इस तरह वोट देने का निर्देश देगी कि उसके दो उम्मीदवारों को 41-41 वोट मिल जाएं और वे जीत जाएं। तीसरे उम्मीदवार को केवल 18 प्रथम वरीयता वोट मिलेंगे, जिससे उसकी जीत की संभावना बेहद कम होगी। हालांकि, चुनावी रणनीति यहीं खत्म नहीं होती। राजनीतिक दल अपने अतिरिक्त उम्मीदवारों को जिताने के लिए निर्दलीय विधायकों या छोटे दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। साथ ही वे विरोधी दलों में क्रॉस-वोटिंग कराने और अपने विधायकों को टूटने से बचाने की भी रणनीति बनाते हैं।

खुली मतपत्र प्रणाली से कैसे रोकी जाती है क्रॉस-वोटिंग?

वर्ष 2003 से राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट (खुली मतपत्र) प्रणाली लागू है। इसके तहत किसी राजनीतिक दल के विधायक को मतदान के बाद अपना मतपत्र पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो उसका वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य विधायकों द्वारा गुप्त रूप से क्रॉस-वोटिंग करने की संभावना को कम करना है। वहीं, निर्दलीय विधायक किसी भी पार्टी एजेंट को अपना मतपत्र दिखाने के लिए बाध्य नहीं होते।

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