"ऑपरेशन सिंदूर, न्याय मिला। एक्शन में सटीक, ऑपरेशन सिंदूर जारी है। भारत कुछ नहीं भूलता, भारत कुछ माफ नहीं करता।" ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की वर्षगांठ पर भारतीय वायु सेना ने यह संदेश उन आतंकियों को दी है, जो सीमा पार बैठकर कायराना हमले कि साजिश रचते हैं।
बीते साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने 6 मई 2025 की देर रात पाकिस्तान के बहावलपुर, मुरीदके समेत आतंकियों के नौ ठिकाने नेस्तोनाबूद कर दिए। 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इन हमलों में आतंकी मसूद अजहर के परिवार के कम से कम दस सदस्यों और चार करीबी सहयोगियों को मौत के घाट उतार दिया गया था। भारत के एक्शन से रालवपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक, पूरा पाकिस्तान दहशत में आ चुका था। अपने ही पैसों से पाले गए इन आतंकियों के खात्मे को देख शहबाज सरकार और मुनीर की आर्मी बेचैन हो उठी।
मुरीदके आंतकी कैंप पर हमले से पहले की तस्वीर।
मुरीदके एयरबेस पर हमले के बाद की तस्वीर
मुरीदके एयरबेस पर हमले से पहले की तस्वीर।
मुरीदके आतंकी कैंप पर हमले के बाद की तस्वीर।
बहावलपुर आतंकी कैंप पर हमले से पहले और बाद की तस्वीर।
बहावलपुर आतंकी कैंप पर हमले से पहले की तस्वीर।
बहावलपुर आतंकी कैंप पर हमले के बाद की तस्वीर।
बहावलपुर आतंकी ठिकाने पर हुई तबाही से पहले की तस्वीर।
बहावलपुर में मौजूद आतंकी ठिकाने पर हुई तबाही के बाद की तस्वीर।
आधी रात उड़ गई थी पाकिस्तान की नींद
दुनिया में शायद ही ऐसा कोई मुल्क हो, जिसकी सेना आतंकियों के मारे जाने पर किसी देश पर हमला करती है, लेकिन पाकिस्तान का दूसरा नाम ही 'आतंकिस्तान' है। इस मुल्क ने हमेशा आतंकियों को भारत के लिए अपना हथियार बनाया है। पाकिस्तान ने फिर ऐसा ही किया। पागलपन में आकर मुनीर की सेना ने जम्मू और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी संख्या में ड्रोन से हमले की कोशिश की। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के हर ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया।
अब बारी भारत की तो, लेकिन इस बार पाकिस्तान के बॉर्डर पर नहीं, बल्कि उसे घर में घुसकर सजा देने की जरूरत थी। लेकिन हर बार युद्ध जीतने के लिए जमीन पर उतरना जरूरी नहीं होता। भारतीय सेना ने ऐसा ही किया। सबसे पहले पाकिस्तानी सेना के उन एयरबेस को टारगेट किया गया, जो रणनीतिक तौर पर पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण थे। यानी वो बेस जहां से पाकिस्तान भारत पर हमला करने की क्षमता रखता था।
मीडिया रिपोर्ट्स एवं अन्य पाकिस्तानी स्रोतों के मुताबिक, 10 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब दर्जन भर एयरबेस पर भारतीय सेना ने हमले किए थे, इनमें नूर खान, रफीकी, मुरिद, सुक्कर, सियालकोट, पसूर, चूनियां, सरगोढ़ा, स्कार्दू, भोलारी और जैकबाबाद मुख्य रूप से शामिल हैं। डोजियर में यह भी दावा दिखता है कि मसरूर एयरबेस, समुंगली एयरबेस को भी भारतीय सेना ने निशाना बनाया।
पाकिस्तान का काल बना 'ब्रह्मोस'
इस ऑपरेशन में 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक मिसाइल पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा काल बनकर उभरी, जिसकी अकल्पनीय रफ्तार ने दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह पंगु बना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना ने इसके माध्यम से पाकिस्तान के रणनीतिक एयरबेस और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर इतने सटीक और तेज हमले किए कि वहां के नेतृत्व को भी सार्वजनिक रूप से भारत की इस मारक क्षमता का लोहा मानना पड़ा। ब्रह्मोस की इस घातक प्रहारक क्षमता ने न केवल सैन्य ठिकानों को ध्वस्त किया, बल्कि सीमा पार एक गहरा मनोवैज्ञानिक दबाव भी पैदा किया।
जहां ब्रह्मोस और राफेल जैसे विमानों ने सीमा पार जाकर प्रिसिजन स्ट्राइक और भारी तबाही मचाई, वहीं भारत की आंतरिक सुरक्षा को 'आकाशतीर' (Akashteer) नामक 'डिजिटल ढाल' ने मजबूती प्रदान की। यह एआई-आधारित अत्याधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क है, जिसने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को रियल-टाइम डेटा के जरिए हवा में ही ट्रैक कर नष्ट कर दिया।
'ब्रह्मोस' मिसाइलों की तस्वीर।
इसके अतिरिक्त, राफेल फाइटर जेट्स ने SCALP मिसाइलों और HAMMER बमों के उपयोग से सीमा पार किए बिना ही दुश्मन के गहरे ठिकानों पर अचूक निशाना साधा। तकनीक और वीरता के इस संगम ने न केवल पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र पर भारी दबाव डाला, बल्कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में भारत केबढ़तेते तकनीकी वर्चस्व को भी सिद्ध कर दिया।
यह पहली बार था जब किसी परमाणु संपन्न देश के इतने एयरबेस को निशाना बनाया गया, जिससे पाकिस्तान की वायु क्षमता को भारी नुकसान हुआ।
इतना नहीं,हीं भारतीय सेना ने पाकिस्तान में लगे चीनी एयर डिफेंस को भी तबाह कर दिथा। पसूरसूर में रडाइंस्टॉलेशन औरन, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम के तबाह होने की जानकारी मिली थी।
पाकिस्तान को कितना नुकसान हुआ?
पाकिस्तान सरकार ने कुल 40 नागरिकों तथा 13 सैन्य कर्मियों के मारे जाने को स्वीकार किया है। पूरी दुनिया इस बात स्वीकारकर करती है कि इन हमलों में पाकिस्तान को ज्यादा जनहानि हुई है। 10 मई के हमलों में पाकिस्तान में आधा दर्जन एयरमैन भी मारे गए थे।
एक भी भारतीय सेना के कदम रखे बिना वहां इतनी बड़ी तबाही मच गई, जिसके बारे में पाकिस्तान की सेना ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। 1971 के ऐतिहासिक युद्ध के बाद यह पहला अवसर था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान की मुख्य भूमि के भीतर इतनी गहराई तक व्यापक सैन्य हमले किए। इस पूरे ऑपरेशन को आधुनिक युद्धनीति का उत्कृष्ट उदाहरण माना गया, क्योंकि इसमें स्वदेशी ड्रोन तकनीक, सटीक सैटेलाइट इंटेलिजेंस और एक सुदृढ़ 'जॉइंट कमांड सिस्टम' का अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला।
शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की फोटो। AP
जहां एक ओर ब्रह्मोस मिसाइल ने अपनी अकल्पनीय गति से दुश्मन के रडार सिस्टम को पंगु बना दिया, वहीं राफेल जेट्स ने SCALP और HAMMER जैसे हथियारों के माध्यम से सीमा पार किए बिना ही रणनीतिक ठिकानों पर अचूक प्रहार किए। इन हमलों की सटीकता और तीव्रता इतनी अधिक थी कि पाकिस्तानी नेतृत्व को भी सार्वजनिक रूप से भारत की इस श्रेष्ठ सैन्य शक्ति और तकनीकी बढ़त को स्वीकार करना पड़ा।
भारत के इस आक्रामक रुख से बौखलाकर पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन बुनयान-उल-मरसूस' के नाम से जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन भारतीय सुरक्षा तंत्र की 'डिजिटल ढाल' ने उसके हर प्रयास को विफल कर दिया। भारत के एआई (AI)-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम 'आकाशतीर' ने दुश्मन द्वारा भेजे गए ड्रोनों और मिसाइलों को भारतीय सीमा में प्रवेश करने से पहले ही ट्रैक कर हवा में नष्ट कर दिया।
सैन्य और कूटनीतिक मोर्चों पर पूरी तरह घिर जाने के बाद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपील की, जिसके बाद 10 मई को भारत ने सीजफायर को मंजूरी दी और इस भीषण संघर्ष को समाप्त करते हुए भारत ने यह शर्त रखी कि अगर पाकिस्तान ने दोबारा ऐसी गलती की तो उसे इस बार से भी ज्यादा भीषण परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
