थरूर पर कांग्रेस को नहीं BJP को 'गुरूर', आखिर क्यों मुश्किल है शशि को नजरंदाज करना

तिरूवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर के मुखर वक्ता हैं। वह मुद्दों पर तथ्यों के साथ अपनी बात मजबूती के साथ रखते हैं। खासकर, अंतरराष्ट्रीय विषयों पर उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। थरूर ने लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र में काम किया है। वह यूपीए-2 में विदेश राज्य मंत्री भी रहे।

Shashi Tharoor : आतंकवाद के खिलाफ भारत की जारी लड़ाई और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बारे में दुनिया को बताने के लिए भारत सर्वदलीय शिष्टमंडल भेजने जा रहा है। इसके लिए सात शिष्टमंडल बनाए गए हैं। प्रत्येक शिष्टमंडल में सात से आठ सांसद होंगे। इसमें एनडीए से 31 सांसद और विपक्ष से 20 सांसदों को जगह दी गई है यानी प्रत्येक शिष्टमंडल में सात से आठ सदस्य होंगे। प्रत्येक शिष्टमंडल की अगुवाई भी पक्ष और विपक्ष का एक कद्दावर नेता करेगा। लेकिन अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलोम्बिया जाने वाले शिष्टमंडल का नेतृत्व करने जा रहे कांग्रेस नेता शशि थरूर के नाम पर विवाद हो गया है। दरअसल, शिष्टमंडल के लिए सरकार ने कांग्रेस से चार सांसदों के नाम मांगे थे, कांग्रेस ने चार नाम दिए भी लेकिन इन चार नामों में शशि थरूर का नाम नहीं था। सूची से बाहर जाकर थरूर का चुनाव करने पर वह भड़क गई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह सरकार की बेईमानी है।

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थरूर की अगुवाई में सर्दलीय शिष्टमंडल अमेरिका और अन्य देशों में जाएगा।

सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहा हूं-थरूर

कांग्रेस ने सरकार को आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार का नाम सरकार के पास भेजा। जबकि कांग्रेस की इस सूची में अपना नाम नहीं होने पर थरूर ने कहा कि हाल की घटना पर अपने देश का नजरिया रखने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण से सम्मानित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा-जब बात राष्ट्रीय हित की हो और मेरी सेवाओं की जरूरत हो, तो मैं कभी पीछे नहीं हटूंगा। वहीं बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से सवाल किया कि उन्होंने शशि थरूर जैसे 'वाकपटुता' वाले शख्स का नाम क्यों नहीं दिया। थरूर को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दरअसल, थरूर को लेकर अजीब स्थिति पैदा हो गई है। उनकी अपनी ही पार्टी उनसे किनारा और दूरी बना रही है तो भाजपा उन पर दिल लुटा रही है।

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