Citizenship Proof Document : विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक Indian Passport भले ही सिर्फ भारत के नागरिकों के लिए जारी किया जाता है। लेकिन, यह भारत की नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के नागरिक की हैसियत से विदेश यात्रा करने की सुविधा देने वाला ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इससे पहले UIDAI और अदालतों के कई फैसलों में बताया जा चुका है कि AADHAAR भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है। PAN और Driving License जैसे दस्तावेजों को लेकर भी साफ किया जा चुका है कि ये नागरिकता साबित नहीं करते हैं। फिर आखिर नागरिकता साबित कैसे होती है?
क्यों छिड़ी ये बहस
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की तरफ से बुधवार 24 जून को 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस को लेकर मीडिया से बात की गई। इस दौरान जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से नाम कटने को चुनौती देने के लिए भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। क्योंकि, फिलहाल देश के 16 राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है। इस सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, पासपोर्ट एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का डॉक्यूमेंट नहीं और थ्योरी के हिसाब से यही पासपोर्ट को दूसरे डॉक्यूमेंट से अलग करता है। भले ही विदेश यात्रा करते समय, पासपोर्ट आपकी राष्ट्रीयता को साबित करता है, फिर भी यह आपकी नागरिकता का डॉक्यूमेंट नहीं है।”
बार-बार उठता रहा सवाल
यह पहली बार नहीं है, जब देश में नागरिकता को साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर बहस छिड़ी है। इस मुद्दे पर कई बार संसद में भी चर्चा हो चुकी है। आखिरी बार, पिछले साल मानसून सत्र में CPI (ML) L के सांसद सुदामा प्रसाद ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) से पूछा था कि आखिर भारत की नागरिकता साबित करने के लिए कौनसा दस्तावेज वैध होता है? 12 अगस्त, 2025 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस सवाल का लिखित जवाब दिया।
Citizenship MHA Reply
सरकार का क्या है आधिकारिक जवाब?
केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री राय ने किसी एक दस्तावेज का नाम लिए बिना कहा, भारत की
नागरिकता 5 तरह से तय होती है। पहली जन्म के आधार पर। दूसरी वंश के आधार पर, तीसरी पंजीकरण के जरिये, चौथी प्राकृतिककरण और पांचवी किसी क्षेत्र के भारत मे विलय के आधार पर। इसके साथ ही उन्होंने कहा, नागरिकता प्राप्त करने और उसके निर्धारण के लिए पात्रता मानदंड नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार हैं। यानी मोटे तौर पर सरकार की तरफ से जब भी आधिकारिक जवाब दिया जाता है, तो नागरिकता अधिनियम, 1955 का हवाला दिया जाता है, किसी एक दस्तावेज का नाम नहीं लिया जाता है।
नागरिकता अधिनियम 1955 क्या कहता है?
भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य हैं?" इसका एक सीधा जवाब यह है कि भारतीय कानून में ऐसा कोई एक सार्वभौमिक दस्तावेज नहीं है, जिसे हर व्यक्ति के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण घोषित किया गया हो। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुसार होता है। गृह मंत्रालय के मुताबि नागरिकता हासिल या साबित करने के अलग-अलग आधार हैं और हर आधार के लिए अलग दस्तावेज की जरूरत होती है।
किस आधार पर कैसे साबित होगी नागरिकता?
अगर आपको भारतीय नगारिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3 से 7 के बीच दिए गए पांच प्रावधानों के तहत भारत की नागरिकता साबित करनी है, तो इसके लिए आपको अलग-अलग प्रावधान के तहत अलग-अलग तरह के दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी। नीचे दी गई टेबल में इसे आसानी से समझा जा सकता है।
| नागरिकता का आधार | किसे मिलती है | प्रमुख दस्तावेज |
|---|---|---|
| 1. जन्म से (Section 3) | भारत में जन्म लेने वाले व्यक्ति को, लेकिन यह जन्म की तारीख और उस समय लागू कानून पर निर्भर करता है। | जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता की नागरिकता से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट, स्कूल रिकॉर्ड आदि। |
| 2. वंश से (Section 4) | विदेश में जन्मे ऐसे व्यक्ति को, जिसके माता या पिता भारतीय नागरिक हों और कानून की शर्तें पूरी हों। | माता-पिता का भारतीय पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, भारतीय नागरिकता का प्रमाण। |
| 3. पंजीकरण से (Section 5) | भारतीय मूल के व्यक्ति, भारतीय नागरिक से विवाह करने वाले विदेशी, भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे, OCI कार्डधारक जैसी श्रेणियां। | विदेशी पासपोर्ट, रेजिडेंशियल परमिट, भारतीय मूल या भारतीय जीवनसाथी/माता-पिता की नागरिकता का प्रमाण, विवाह प्रमाण पत्र, OCI प्रमाणपत्र (जहां लागू हो)। |
| 4. देशीकरण (Naturalisation) से (Section 6) | ऐसा विदेशी जिसने निर्धारित अवधि तक भारत में निवास किया हो और कानून की सभी शर्तें पूरी करता हो। | विदेशी पासपोर्ट, रेजिडेंशियल परमिट, चरित्र संबंधी शपथपत्र, भारतीय भाषा का प्रमाण, अन्य निर्धारित दस्तावेज। |
| 5. क्षेत्र के भारत में विलय से (Section 7) | जब कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है, तब वहां के पात्र लोगों को। | संबंधित सरकारी अधिसूचना और पात्रता के अनुसार दस्तावेज। |
किस आधार पर तय होता है कौन सा दस्तावेज कब वैध?
भारतीय नागरिकता अधिनियम के तहत यह नहीं बताया गया है कि नागरिकता साबित करने के लिए कौनसा दस्तावेज चाहिए या दस्तावेज वैध है। बल्कि, सिर्फ यह बताया गया है कि कौन से तरीकों से भारत की नागरिकता मिल सकती है। इसके अलावा Citizenship Rules, 2009 और गृह मंत्रालय के आवेदन प्रपत्र यह निर्धारित करते हैं कि धारा 5 और 6 के तहत नागरिकता हासिल करने मामलों में कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे।
citizenship doc
जन्म और वंश के आधार पर कैसे साबित होगी नागरिकता?
नागरिकता कानून की नागरिकता की पात्रता बताता है। जन्म और वंश यानी धारा 3 और 4 के तहत नागरिकता साबित करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act, 1872) अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के तहत जब किसी व्यक्ति को यह साबित करना होता है कि वह जन्म या वंश से भारतीय नागरिक है, तो उसे ऐसे दस्तावेज देने होते हैं, जो संबंधित तथ्य (Fact in Issue) को सिद्ध करें।
मसलन, अगर जन्म के आधार पर नागरिकता साबित करनी है, तो हमें साबित करना होगा कि जन्म भारत में हुआ था। इसके लिए हमें जन्म प्रमाण पत्र, अस्पताल का रिकॉर्ड, नगर निगम का रिकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य देने होंगे। वहीं, अगर हमें वंश के आधार पर नागरिकता साबित करनी है, तो ऐसे दस्तावेज पेश करने होंगे, जिनसे पता चले कि माता या पिता भारतीय नागरिक थे। मसलन, माता-पिता के बर्थ सर्टिफिकेट, भारतीय पासपोर्ट, वोटर आईडी व अन्य सरकारी रिकॉर्ड आदि साक्ष्य बन सकते हैं। मोटे तौर पर आपकी नागरिकता की पात्रता को साबित करने के दस्तावेज इस आधार पर चुने जाते हैं कि आप कानून के किस प्रावधान के तहत पात्रता सिद्ध कर रहे हैं।
TIMES NOW Navbharat Explainers में पढ़ें : सस्ता तेल, चाबहार और ₹2.5 लाख करोड़ का बाजार : कैसे अमेरिका-ईरान की 'दोस्ती' से चमकेगी भारत की किस्मत
