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7 साल बाद उत्तर कोरिया क्यों आए हैं जिनपिंग, क्या बेचैन कर रही किम-पुतिन की करीबी?

चीन और उत्तर कोरिया के संबंध बहुत पुराने और प्रगाढ़ हैं। दोनों एक दूसरे पर भरोसा भी खूब करते हैं। उत्तर कोरिया को आगे बढ़ाने, उसे सैन्य रूप से मजबूत बनाने और उसकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में चीन का बहुत बड़ा हाथ रहा है। उत्तर कोरिया की चीन पर निर्भरता बहुत ज्यादा रही है।

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Photo : AP
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग।
Written by: Alok Rao
Updated Jun 9, 2026, 19:52 IST
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Xi Jinping North Korea Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आम तौर विदेश दौरे पर नहीं जाते। विदेश यात्रा भी उनकी चुनिंदा होती है। 2026 में आधा समय बीत चुका है और अब जाकर इस वर्ष की उनकी पहली विदेश यात्रा हो रही है। जिनपिंग बहुत दूर भी नहीं गए हैं, वह अपने पड़ोसी देश उत्तर कोरिया गए हैं। बीते सात वर्षों में यह पहली बार है जब जिनपिंग उत्तर कोरिया के दौरे पर पहुंचे हैं। जिनपिंग के इस दो दिवसीय दौरे पर दुनिया भर की नजरें लगी हैं। जिनपिंग की इस यात्रा के बारे में बीते शुक्रवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि दोनों देश जिनपिंग के इस दौरे का इस्तेमाल अपने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने एवं विकास की संभावनाओं को तलाशने में करेंगे।

चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर है उत्तर कोरिया

चीन और उत्तर कोरिया के संबंध बहुत पुराने और प्रगाढ़ हैं। दोनों एक दूसरे पर भरोसा भी खूब करते हैं। उत्तर कोरिया को आगे बढ़ाने, उसे सैन्य रूप से मजबूत बनाने और उसकी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में चीन का बहुत बड़ा हाथ रहा है। उत्तर कोरिया की चीन पर निर्भरता बहुत ज्यादा रही है। दोनों देशों के रिश्ते में कभी कड़वाहट नहीं आई और न ही ये कभी पटरी से उतरे। चीन हर तरीके से उत्तर कोरिया की मदद और उसका सहयोग करता आया है। करीबी रिश्ता होने के बाजवूद चीन को पिछले कुछ समय से लग रहा है कि उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जॉन्ग उन का बीजिंग के प्रति रवैया थोड़ा बदल रहा है।

रूस से करीबी चीन को पसंद नहीं!

चीन को लगता है कि उत्तर कोरिया, रूस के ज्यादा करीब जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्योंगयांग दौरे से चीन के कान खड़े हो गए। जाहिर है कि हाल के समय में मास्को और प्योंगयांग एक-दूसरे के ज्यादा करीब आए हैं। इस करीबी का नतीजा है कि किम जोंग उन ने यूक्रेन से लड़ने के लिए अपने हजारों सैनिकों को भेज दिए। ऐसा बहुत कम देश करते हैं। हो सकता है कि इसके बदले में रूस ने उत्तर कोरिया को किसी रूप में मदद की हो। यह मदद आर्थिक तो नहीं बल्कि तकनीक, ऊर्जा और हथियार के रूप में हो सकती है। फिर भी एक्सपर्ट मानते हैं कि उत्तर कोरिया की चीन पर निर्भरता इतनी ज्यादा है कि रूस उसकी जगह नहीं ले सकता।

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दक्षिण कोरिया में अब भी 28,000 से अधिक US सैनिक

चीन और उत्तर कोरियाई संबंधों की जड़ें 70 साल से भी अधिक पहले हुए कोरियाई युद्ध तक जाती हैं। उत्तर और दक्षिण कोरिया तकनीकी रूप से आज भी युद्ध की स्थिति में हैं, क्योंकि 1953 में यह संघर्ष केवल युद्धविराम के साथ समाप्त हुआ था। दक्षिण कोरिया में अब भी 28,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। तो चीन और उत्तर कोरिया के संबंध आज कैसे हैं? और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने उत्तर कोरिया जैसे अलग-थलग देश के साथ इतने करीबी रिश्ते क्यों बनाए रखे हैं?

उत्तर कोरिया की मदद की थी

दोनों देशों के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुरू हुए, जब 1950 के दशक की शुरुआत में चीन ने अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र समर्थित दक्षिण कोरियाई सेनाओं के खिलाफ उत्तर कोरिया की मदद की थी। इस युद्ध में 2 लाख से 4 लाख के बीच चीनी सैनिक मारे गए थे। 1961 में बीजिंग और प्योंगयांग ने 'मित्रता, सहयोग और पारस्परिक सहायता संधि' पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत यदि उत्तर कोरिया पर हमला होता है तो चीन सैन्य हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य है।

मॉस्को और प्योंगयांग के बीच समझौता हुआ

हालांकि बीजिंग और प्योंगयांग के बीच करीबी संबंध रहे हैं, लेकिन चीन ने 1980 के दशक में दक्षिण कोरिया के साथ भी अपने आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाया। यह जानकारी अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) की 2024 की रिपोर्ट में दी गई है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन, उत्तर कोरिया और रूस के बढ़ते संबंधों को लेकर सतर्क है। यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को और प्योंगयांग के बीच पारस्परिक रक्षा समझौता हुआ, जिसके बाद उत्तर कोरियाई सैनिक रूस के साथ मिलकर लड़ाई में शामिल हुए। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2024 में 24 वर्षों के अंतराल के बाद प्योंगयांग का दौरा किया, जिसका उद्देश्य रक्षा संबंधों को मजबूत करना था।

उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया में बड़ा अंतर

हांगकांग विश्वविद्यालय में राजनीति एवं लोक प्रशासन विभाग के सहायक प्रोफेसर अलेजांद्रो रेयेस ने अल जजीरा से कहा कि हाल के वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलावों में से एक रूस और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों का गहरा होना है। उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे अलग-थलग और गरीब देशों में से एक है। दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ कोरिया की अगस्त 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में उत्तर कोरिया की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 26.6 अरब डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.7 प्रतिशत अधिक थी। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया तकनीक और जहाज निर्माण का वैश्विक केंद्र बन चुका है। 2024 में उसकी GDP लगभग 1.88 ट्रिलियन डॉलर थी।

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उत्तर कोरिया पर हैं ढेर सारे प्रतिबंध

उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के चलते वैश्विक व्यापार से काफी हद तक कटा हुआ है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक नेशनल कमेटी ऑन नॉर्थ कोरिया के अनुसार, उत्तर कोरिया के कुल व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा चीन के साथ होता है। चीन से उत्तर कोरिया को पेट्रोलियम, खाद्य पदार्थ, कपड़ा, मशीनरी और वाहन निर्यात किए जाते हैं। वहीं चीन उत्तर कोरिया से नकली पलकें (फेक आईलैश), विग, लोहा-इस्पात, जमी हुई मछली और कुछ तैयार खाद्य उत्पाद आयात करता है। चीन के सीमा शुल्क प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.74 अरब डॉलर का है।

अपनी सरहदी सुरक्षा चाहता है चीन

विश्लेषकों का कहना है कि दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ उत्तर कोरिया चीन के लिए एक महत्वपूर्ण 'बफर' (सुरक्षा कवच) का काम करता है। कोरियाई युद्धविराम के बाद बने अमेरिका-दक्षिण कोरिया पारस्परिक रक्षा समझौते के तहत दक्षिण कोरिया में लगभग 28,500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए बीजिंग यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके अपने हित और उत्तर कोरिया के पास रहने वाले उसके नागरिकों की सुरक्षा खतरे में न पड़े। उन्होंने आगे कहा, 'व्यावहारिक हितों से परे, दोनों देशों के बीच कोरियाई युद्ध से जुड़ा साझा इतिहास और दोनों कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत संबंध भी महत्वपूर्ण हैं।'

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