Why Munshi Premchand's Wife Shivrani Devi Arrested: मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) के बारे में तो तमाम कहानियां और किस्से मशहूर हैं, लेकिन क्या आप उनकी पत्नी को जानते हैं? 15 साल की उम्र में ही प्रेमचंद की शादी शिवरानी देवी से हो गई थी। वो साहित्य में निपुण थी, लेकिन अंग्रेजी में उनका हाथ तंग था। जरा सोचिए कि पत्नी को अंग्रेजी समझने में भी परेशानी होती थी और उस वक्त प्रेमचंद अंग्रेजी अखबार 'लीडर' में प्रकाशित हुई खबरों का अनुवाद करते थे। वो गुलामी का दौर था, जब भारत में ब्रिटिश शासनकाल था। भारत की स्वतंत्रता के लिए प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी ने अंग्रेजों से खूब लोहा लिया था। वो आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। आपको इस लेख में उस किस्से से रूबरू करवाते हैं, जब शिवरानी को जेल जाना पड़ा था।
क्यों गिरफ्तार हुई थीं शिवरानी देवी?
आजादी की लड़ाई और प्रेमचंद की पत्नी
मुंशी प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी (Shivrani Devi) ने आजादी की लड़ाई में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदुस्तान की दुकानों पर विदेशी सामग्रियों की बिक्री का जमकर विरोध किया था, एक बार धरना देने के चलते उन्हें चेल भी जाना पड़ा था। लेखक और आलोचक वीरेंद्र यादव ने उस किस्से का जिक्र किया है, जब प्रेमचंद की पत्नी को जेल जाना पड़ा था।
मुंशी प्रेमचंद और शिवरानी देवी।
जब शिवरानी देवी को जाना पड़ा था जेल
वीरेंद्र यादव ने इस बात का जिक्र किया था कि करीब साढ़े 6 साल (वर्ष 1924 से 1930 तक) मुंशी प्रेमचंद लखनऊ में अपने परिवार के साथ रहे। इस दौरान प्रेमचंद के साथ उनके दो बेटे, उनकी बेटी और पत्नी शिवरानी देवी भी रहती थीं। आजादी की लड़ाई के दौरान शिवरानी देवी को दो महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ा था। दरअसल, 11 नवंबर 1930 को अमीनाबाद के झंडेवाला पार्क में धरना देने की वजह से शिवरानी को गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रेमचंद की पत्नी उस वक्त विदेशी सामान की बिक्री कर रहे दुकान के सामने धरना दे रही थीं।
नेहरू की मां को गिरफ्तारी किया तो...
आलोचक और लेखक ने ये भी बताया कि हमेशा ही शिवरानी देवी लोगों के उत्थान की बातें किया करती थीं, साथ ही स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में वो बराबर हिस्सा भी लेती रहती थीं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मां स्वरूप रानी नेहरू की गिरफ्तारी के विरोध में प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी ने झंडेवाला पार्क में भाषण दिया था।
मुंशी प्रेमचंद।
प्रेमचंद को मालूम नहीं था, क्या कर रहीं पत्नी
उन दिनों आजादी की लगाई में शिवरानी देवी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही थीं, वो इतना लोकप्रिय हो गईं कि महिला वॉलिंटियर की सूची बनाई गई तो कांग्रेस कार्यकर्ता मोहन लाल सक्सेना ने इस ग्रुप का कैप्टन शिवरानी को ही बना दिया। अजब बात तो ये है कि खुद उनके पति मुंशी प्रेमचंद को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी पत्नी आजादी की लड़ाई में भाग ले रही हैं। ये तो उन्हें उस वक्त पता चला जब कांग्रेस वॉलिंटियर की लिस्ट को हिंदी और उर्दू में अनुवाद के लिए उनके पास को भेजा गया था। इसी सूची में प्रेमचंद ने शिवरानी देवी का नाम देखा।
पत्नी की गिरफ्तारी पर प्रेमचंद की प्रतिक्रिया
बताया जाता है कि जिस वक्त शिवरानी देवी को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त उनके पति मुंशी प्रेमचंद लखनऊ में नहीं थे, बल्कि वो वाराणसी गए हुए थे। जब उन्हें ये मालूम पड़ा कि उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है को उन्होंने उस वक्त कहा था, 'तुम नहीं, जेल में मैं हूं। क्योंकि मुझे अपने बच्चों की देखभाल करनी है।' प्रेमचंद के इस रिएक्शन से समझा जा सकता है को वो पत्नी की गिरफ्तारी पर दुखी तो थे, लेकिन उन्होंने ये भी साफ कर दिया था कि ये उनके लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं है। यही वजह है कि प्रेमचंद ने खुद ये बात कही थी कि उनकी पत्नी से अपना सम्मान बहुत ऊंचा कर लिया है। दरअसल, प्रेमचंद को लगता था कि वो बनारस पहुंचे हैं तो उन्हें किसी भी वक्त गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन उनकी पत्नी गिरफ्तार हुईं।
