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मास्टरस्ट्रोक या झटका! क्या मोदी सरकार को पता था कि गिर जाएगा बिल, क्या है गेम प्लान?

Women Reservation Bill: आखिर ये मोदी सरकार के लिए कितना बड़ा झटका है, या फिर ये कोई मास्टरस्ट्रोक है, क्या थी सरकार की मंशा और उसकी नजर कहां पर है, समझने की कोशिश करते हैं।

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महिला आरक्षण बिल पर संग्राम
Authored by: Amit Mandal
Updated Apr 19, 2026, 16:35 IST

Women Reservation Bill: दो दिनों की बहस के बाद लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक खारिज हो गया। केंद्र ने संसद का विशेष सत्र बुलाया था जो 16 अप्रैल को शुरू हुआ और 18 अप्रैल तक चला। 12 साल के शासन में मोदी सरकार को संसद में पहला बड़ा झटका लगा। राहुल गांधी, जयराम रमेश और एमके स्टालिन समेत विपक्ष के नेता इस घटनाक्रम पर जश्न मना रहे हैं। पीएम मोदी ने देश के नाम संदश देकर विपक्ष को निशाने पर भी लिया, लेकिन विपक्ष ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई। इस घटनाक्रम से कई तरह के सवाल उभरे हैं। आखिर ये मोदी सरकार के लिए कितना बड़ा झटका है, या फिर ये कोई मास्टरस्ट्रोक है, क्या थी सरकार की मंशा और उसकी नजर कहां पर है, समझने की कोशिश करते हैं।

कौन-कौन से विधेयक गिरे, संसद में क्या हुआ?

केंद्र ने लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए थे– संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 – जिसे महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है, उसमें संशोधन करना था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद ने सितंबर 2023 में लगभग सर्वसम्मति से पारित किया था। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान था। यह विधेयक शुक्रवार शाम को लोकसभा में आगे नहीं बढ़ पाया। सदन के नियमों के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से ही पारित हो सकता था। पक्ष में 298 सांसदों के वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया। इसके बावजूद, विधेयक को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया। लोकसभा में 537 सांसद हैं, और विधेयक को पास कराने का जादुई आंकड़ा 360 वोट था। सत्तारूढ़ एनडीए में 240 भाजपा सांसदों सहित 293 सदस्य हैं, जिसमें साफ तौर पर 67 सीटों की कमी रह गई।

24 साल बाद गिरा कोई बड़ा बिल

ध्यान देने लायक बात है कि मोदी सरकार के 12 साल मे एक भी बिल नहीं गिरा है। जितने भी बिल पेश किए गए, सभी संसद की अग्निपरीक्षा में पास हुए। लेकिन पहली बार इतना अहम बिल लोकसभा में गिर गया। तो सवाल है कि सरकार ने इतना रिस्क क्यों लिया? अचानक झटका लेने को क्यों तैयार हुई सरकार? जब सरकार को पता था कि आंकड़ा उसके पक्ष में नहीं है, इसके बावजूद बिल को पेश क्यों किया गया? अगर पन्ने पलटकर देखें तो पाएंगे कि पिछले 24 साल के दौरान कोई भी सरकारी बिल नहीं गिरा था। लेकिन इस बार रिकॉर्ड टूट गया। साल 2002 में पोटा बिल गिरा था। उसके 24 साल बाद कोई बड़ा बिल सदन में गिरा है। 12 साल में मोदी सरकार का पहला बड़ा बिल गिरा है। ये तथ्य हर किसी को चौंका सकता है।

मोदी सरकार में कौन-कौन से बड़े बिल हुए पास?

  • जीएसटी (GST) बिल (2017): 'एक देश, एक कर' की अवधारणा लागू
  • धारा 370 की समाप्ति (2019): जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया गया
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) (2019): पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक प्रवासियों के लिए नागरिकता कानून
  • EWS आरक्षण बिल (2019): आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण
  • तीन तलाक बिल (2019): तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को आपराधिक कृत्य घोषित किया गया
  • नए लेबर कोड्स (2020): श्रम कानूनों का सरलीकरण और आधुनिकीकरण
  • कृषि कानून (2020): (विवाद के बाद 2021 में वापस ले लिए गए)
  • संविधान (127वां संशोधन) बिल, 2021: राज्यों को अपनी ओबीसी सूची बनाने का अधिकार

क्या है सरकार की मंशा?

क्या सरकार इस बात से अनजान थी कि उसके पास विधेयक पास कराने लायक बहुमत नहीं है। एनडीए के कुल 293 ही सांसद हैं, जिनमें से बीजेपी के पास 240 सांसद है। लेकिन, सरकार ने इन विधेयकों को ऐतिहासिक बताकर प्रचारित किया। विपक्ष लगातार विरोध करता रहा, उसका कहना था कि इसे परिसीमन से न जोड़ा जाए। सरकार और विपक्ष दोनों से बयानबाजी होती रही। पर्याप्त संख्याबल न होने के बावजूद केंद्र सरकार लगातार संसद में बिल पास कराने का दावा करती रही। तो क्या सरकार ने जानबूझकर बिलों को पेश किया और उसे पहले ही इनके गिरने का अंदाजा था? आखिर सरकार की मंशा क्या है?

बिल गिरने पर पीएम मोदी ने देश की महिलाओं से मांगी माफी

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नजर लोकसभा व विधानसभा चुनावों पर?

जानकारों के मुताबिक, सरकार की नजर 2029 लोकसभा चुनाव पर है। खास तौर पर नजर यूपी चुनाव और बंगाल चुनाव पर है। बंगाल में कुछ ही दिनों में मतदान होने जा रहा है और यूपी चुनाव 2027 में हैं। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को मतदान होना है। विधेयकों के गिरने के साथ ही मोदी सरकार ने नैरेटिव सेट करना भी शुरू कर दिया है कि विपक्ष महिला विरोधी है। पीएम मोदी ने शनिवार रात अपने संबोधन में विपक्ष को आड़े हाथों लेकर इसकी शुरुआत कर दी है। अब हर चुनाव में महिला आरक्षण एक बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। सियासी खेल शुरू हो चुका है और आने वाले समय में हम इसे परवान चढ़ता भी देखेंगे।

बीजेपी को मिलता रहा है महिलाओं का साथ

पिछे कुछ सालों का पैटर्न दिखाता है कि बीजेपी की जीत में महिलाओं के समर्थन का जबरदस्त हाथ है। महिला वोटर्स की बदौलत बीजेपी को बिहार, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में जीत हासिल हुई है। इन राज्यों में बीजेपी ने महिलाओं के समर्थन के कारण भारी बहुमत से सरकार बनाई। यानी महिलाएं बीजेपी की जीत में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इन राज्यों में बीजेपी की जीत बताती है कि उसकी सफलता में महिलाओं का बड़ा हाथ है।

बिहार: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (2025-26)

सितंबर 2025 में लॉन्च की गई इस योजना के तहत, 75 लाख से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूह के जरिए 10,000 रुपये की पहली किस्त और स्वरोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साइकिल योजना और उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहन राशि (कन्या उत्थान योजना) जारी है।

महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीण योजना (2024-26)

इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह (या 3,000 रुपये द्वैमासिक) की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों (DBT) में दी जा रही है। साथ ही लेक लाडकी योजना के तहत बालिकाओं के जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिसमें विभिन्न चरणों में कुल 1 लाख रुपये तक का लाभ मिलता है।

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना (2023-26)

यह किसी भी राज्य में सबसे सफल योजनाओं में से एक है, जिसके तहत 21-60 वर्ष की महिलाओं को प्रतिमाह 1,250 से बढ़ाकर 1,500 रुपये तक की राशि दी जा रही है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण योजनाएं जैसे, शक्ति सदन, शौर्य दल और स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जा रही है।

बीजेपी को एक बड़ा सियासी हथियार मिला

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने के मुद्दे ने बीजेपी को एक बड़ा सियासी हथियार थमा दिया है। इसका असर साफ दौर पर सियासी पटल पर दिखेगा। प. बंगाल चुनाव से लेकर आगामी यूपी चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव तक ये एक प्रमुख सियासी मुद्दा बना रहेगा। टीएमसी और समाजवादी पार्टी पर पीएम मोदी का खास तौर पर निशाना, यह बताता है कि इन राज्यों के चुनाव को लेकर बीजेपी की रणनीति क्या है। बंगाल चुनाव नतीजे साफ बता देंगे कि महिला आरक्षण बिल का मुद्दा आने वाले वक्त में कितना परवान चढ़ता है।

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