Times Now Navbharat
live-tv
Premium

झारखंड का छात्र आंदोलन जंतर-मंतर से कितना अलग? मांग, रणनीति और नेतृत्व में क्या है बड़ा फर्क?

Jharkhand Students Protest: झारखंड का छात्र आंदोलन और दिल्ली का जंतर-मंतर आंदोलन पहली नजर में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन दोनों की प्रकृति और मांगों में बड़ा अंतर है। जंतर-मंतर का आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर केंद्रित था, जबकि झारखंड का आंदोलन JPSC, JSSC-CGL और अन्य राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, CBI जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर चल रहा है।

Image
JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली का विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्र।
Authored by: Piyush Kumar
Updated Aug 7, 2026, 11:59 IST
Follow on Google News

"यहां हर साल पेपर लीक होता है और पेपर बिकता है। जैसा पेपर चाहिए, वैसा ही दाम वसूला जाता है। हर पद के लिए रेट तय है..." रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे हजारों छात्र यही आरोप दोहरा रहे हैं। JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब 14 दिनों से आगे बढ़ चुका है। धीरे-धीरे ही सही, लेकिन इसकी गूंज अब दिल्ली तक सुनाई देने लगी है।

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार छात्रों से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वार्ता के तरीके को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। सरकार का कहना है कि वह केवल छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत करेगी, जबकि छात्र अपने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता में शामिल करना चाहते हैं, जिसमें एक पत्रकार और एक अधिवक्ता भी शामिल हों।

सरकार का तर्क है कि आंदोलन छात्रों का है, इसलिए बातचीत भी सिर्फ छात्रों से ही होगी। इसी वजह से फिलहाल वार्ता आगे नहीं बढ़ पाई है। दूसरी ओर, देश के अलग-अलग राज्यों से युवा रांची पहुंचकर आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ हेमंत सरकार पर दबाव भी बढ़ता जा रहा है।

JPSC और JSSC परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग को  लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र।

JPSC और JSSC परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र।

क्या यह Gen-Z का आंदोलन है?

रांची में बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसे पूरी तरह Gen-Z आंदोलन कहना सही नहीं होगा। दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल अधिकांश छात्र Gen-Z (लगभग 14 से 29 वर्ष आयु वर्ग) के थे। वहीं, रांची में प्रदर्शन कर रहे कई अभ्यर्थी 30 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं, क्योंकि वे कई वर्षों से JPSC और JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

नीट परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने किया था जंतर-मंतर पर प्रदर्शन। PTI

नीट परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों ने किया था जंतर-मंतर पर प्रदर्शन। PTI

जंतर-मंतर और झारखंड छात्र आंदोलन में क्या है सबसे बड़ा अंतर?

झारखंड छात्र आंदोलन

JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठा रहे हैं। दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों का फोकस राज्य स्तरीय भर्ती प्रणाली में सुधार को लेकर है।

जंतर-मंतर छात्र आंदोलन

जंतर-मंतर छात्र आंदोलन मुख्य रूप से मेडिकल परीक्षा नीट (NEET) में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के विरोध में हुआ आंदोलन था। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटे और केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग की। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले इस प्रदर्शन को चलाया गया। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की लीडरशिप में प्रदर्शन किया गया। बाद में सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।

झारखंड छात्र प्रदर्शन और जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में अंतर। AI IMAGE

झारखंड छात्र प्रदर्शन और जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन में अंतर। AI IMAGE

झारखंड आंदोलन ने कैसे पकड़ी रफ्तार?

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे राज्यव्यापी अभियान बन गया। झारखंड के कई जिलों से छात्र रांची पहुंचे और लगातार धरना दे रहे हैं। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शन जारी रहा। आंदोलन को तब और गति मिली, जब छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अपील के बाद उन्होंने पानी पीना स्वीकार किया, लेकिन आंदोलन समाप्त नहीं किया। इस आंदोलन का नेतृत्व छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं। लगातार धरना, भूख हड़ताल और सरकार से संवाद की कोशिशों के चलते वे इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं।

छात्रों की 4 प्रमुख मांगें

1. JPSC की 14वीं PT परीक्षा रद्द की जाए

छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि कथित अनियमितताओं के कारण 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (PT) परीक्षा को रद्द किया जाए। उनका कहना है कि यदि परीक्षा निष्पक्ष नहीं हुई है तो इसे दोबारा कराया जाना चाहिए।

2. पूरे मामले की CBI से जांच

राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन छात्र इस पर भरोसा नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

3. भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पेपर लीक, कथित धांधली और चयन प्रक्रिया पर सवाल न उठें। उनका कहना है कि पूरी भर्ती प्रणाली में सुधार जरूरी है।

4. दोषियों पर सख्त कार्रवाई

छात्रों की मांग है कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल जांच नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे सैकड़ों छात्रों की फोटो।

जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे सैकड़ों छात्रों की फोटो।

सरकार का क्या रुख है?

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती है। सरकार ने वार्ता के लिए पहल भी की है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल की संरचना और बातचीत की शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

वार्ता को लेकर विवाद क्यों?

सरकार ने साफ कहा है कि वह केवल छात्र प्रतिनिधियों से ही बातचीत करेगी। दूसरी ओर, छात्र अपने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में एक पत्रकार और एक अधिवक्ता को भी शामिल करना चाहते हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। इसी मुद्दे पर अब तक कई दौर की बातचीत बेनतीजा रही है।

सीआईडी जांच पर सवाल क्यों?

सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि राज्य की एजेंसी निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच CBI या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।

सीट बेचने के भी आरोप

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पैसों के बदले चयन कराया गया। उनका दावा है कि कुछ अभ्यर्थियों से 50 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक लेकर कथित तौर पर नौकरी दिलाने का खेल हुआ। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। अब तक यह आंदोलन पूरी तरह छात्र-नेतृत्व वाला भर्ती सुधार आंदोलन बना हुआ है। हालांकि कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने समर्थन दिया है, लेकिन आंदोलन का मुख्य फोकस अभी भी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग पर ही है।

छात्रों ने JPSC की सीटें बेचने का लगाया आरोप।

छात्रों ने JPSC की सीटें बेचने का लगाया आरोप।

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो वे 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव करेंगे। दूसरी ओर, सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल और वार्ता की शर्तों को लेकर अभी भी गतिरोध बना हुआ है।

जमकर हो रही राजनीति

छात्र आंदोलन अब पूरी तरह राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि हर सरकार, चाहे केंद्र की हो, झारखंड की हो या कांग्रेस की। उसे छात्रों की बात सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। राहुल गांधी ने कहा, "हमारा एजुकेशन सिस्टम बर्बाद हो चुका है। हर सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। चाहे वह कांग्रेस की सरकार हो, केंद्र सरकार हो या झारखंड की सरकार।"

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "हम विद्यार्थियों के साथ हैं, चाहे झारखंड हो, पंजाब हो या दिल्ली। अगर हमसे भी कोई गलती हुई होगी तो हम भी सवाल पूछेंगे। हम विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए लड़ते रहेंगे।"

बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा

इस आंदोलन को लेकर बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार के साथ-साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि झारखंड के छात्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने देश के अन्य राज्यों के छात्र। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी झारखंड आकर छात्रों से मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं, जबकि वे दूसरे राज्यों में छात्रों के मुद्दों पर सक्रिय दिखाई देते हैं।

JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ झारखंड का छात्र आंदोलन अब केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह आंदोलन राज्य की भर्ती व्यवस्था, पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

End of Article