अमेरिका -यूरोप के लिए नहीं चीन के लिए लड़ रहे हैं जेलेंस्की, ऐसे समझें 'ड्रैगन' के दिमाग में क्या चल रहा है

  • Produced by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलEdited by: आलोक कुमार राव
  • Updated Feb 28, 2023, 01:38 PM IST

Russia Ukraine War : अमेरिका में एक नेता हैं- विवेक रामास्वामी। भारतीय मूल के नेता विवेक रामास्वामी। रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी वही है, जिसके नेता डोनाल्ड ट्रम्प है। विवेक रामास्वामी ने कहा है कि अमेरिका को चीन की तरफ ध्यान देना चाहिए।

Russia Ukraine War : अगर यह कहा जाए कि कि जेलेंस्की यूक्रेन के लिए नहीं, अमेरिका के लिए नहीं, यूरोप के लिए नहीं बल्कि चीन के लिए लड़ रहे हैं, तो आपको लगेगा कि ये कैसे हो सकता है। लेकिन मामला कुछ ऐसा ही है। रूस और यूक्रेन के बीच एक साल से भयंकर युद्ध हो रहा है। यूक्रेन की तरफ से अमेरिका और यूरोप ने पूरी ताकत लगा रखी है। भर भर के हथियार दिए जा रहे हैं। अभी पिछले हफ्ते ही बाइडेन यूक्रेन पहुंच गए थे और फिर से नए हथियार देने का ऐलान कर आए, लेकिन अमेरिका में ही ये बातें हो रही हैं कि बाइडेन को कुछ समझ में नहीं आ रहा है, क्योंकि अमेरिका यूक्रेन को जो हथियार दे रहा है, वो हथियार असल में चीन के ही काम आ रहे हैं। ये कैसे हो रहा है। ये बहुत बारीकी से समझने वाली बात है।

ukraine Russia War

एक साल बाद भी रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है।

चीन को लेकर विवेक रामास्वामी ने चेताया

अमेरिका में एक नेता हैं- विवेक रामास्वामी। भारतीय मूल के नेता विवेक रामास्वामी। रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी वही है, जिसके नेता डोनाल्ड ट्रम्प है। विवेक रामास्वामी ने कहा है कि अमेरिका को चीन की तरफ ध्यान देना चाहिए। चीन चाहता है कि ताइवान पर हमला करने से पहले पश्चिमी देशों की सैन्य क्षमता कमजोर हो जाए, इसलिए चीन चाहता है कि रूस-यूक्रेन जितना लंबा हो सके उतना लंबा चले। अमेरिका और पश्चिमी देशों को लगता है कि वो यूक्रेन की मदद करके मजबूत हो रहे हैं लेकिन वास्तव में वो चीन के मुकाबले कमजोर हो रहे हैं।

यूक्रेन की मदद कर अमेरिका कमजोर हो सकता है

यानी अमेरिका में अब ये चर्चा शुरू हो गई है कि यूक्रेन को मदद करने के नाम पर कहीं खुद ही अमेरिका खुद को कमजोर तो नहीं कर रहा है। ये बात सही भी है कि अगर अमेरिका ने पूरी ताकत यूक्रेन में ही लगा दी और यूरोप की पूरी ताकत भी यूक्रेन में लग गई तो जब चीन से मुकाबला करने का वक्त आएगा तो उस वक्त अमेरिका और यूरोप तो बहुत कमजोर स्थिति में होगा।

वियतनाम युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ

अमेरिका में अब इसी बात का डर सता रहा है। इसलिए रिपब्लिकन पार्टी के नेता विवेक रामास्वामी ने अमेरिका को वियतनाम युद्ध की याद दिलाई जो युद्ध करीब 20 साल तक चला था और अमेरिका उस युद्ध में बुरी तरह से हारा था। विवेक रामास्वामी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर कहा कि ये वियतनाम युद्ध की तरह है। लेकिन इस बार रूस की जगह चीन है जो रूस की तुलना में अमेरिका का प्रभावी ढंग से सामना कर रहा है। वियतनाम युद्ध 1950 के दशक में शुरू हुआ था और 1970 के दशक तक चला था। इसमें उत्तरी वियतनाम और दक्षिणी वियतनाम के बीच लड़ाई हुई थी। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने दक्षिणी वियतनाम का साथ दिया था। जबकि रूस और चीन ने उत्तरी वियतनाम का साथ दिया था। इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ था।

CIA के डायरेक्टर भी आगाह कर चुके हैं

जो बात विवेक रामास्वामी ने कही है वही बात अमेरिकी सेना के जनरल भी कह चुके हैं। इसी साल फरवरी में CIA के डायरेक्टर विलियम बर्न्स ने कहा था कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वकांक्षाओं को कम करके आंकना गलती होगी। इंटेलिजेंस रिपोर्ट से पता चला है कि जिनपिंग ने अपनी सेना को 2027 में ताइवान पर हमला करने के लिए तैयार रहने को कहा है।

2025 में अमेरिका और चीन के बीच युद्ध की आशंका

यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस को वो सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद थी और इस से शी जिनपिंग भी हैरान हैं। CIA के मुताबिक पिछले साल अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद हालात बहुत चिंताजनक हो गए हैं। उस समय चीन ने मिसाइल भी दागी थी जो जापान से 60 किलोमीटर पहले गिरी थी। इससे पहले जनवरी में यूएस एयर मोबिलिटी कमांड के प्रमुख जनरल माइक मिनिहन ने अधिकारियों को भेजे एक इंटरनल मेमो में कहा कि 2025 में अमेरिका और चीन के बीच युद्ध हो सकता है। इस मेमो में अमेरिकी जनरल ने अपने अधिकारियों को युद्ध के लिए तैयार रहने का भी निर्देश दिया है। चीन यही चाहता है कि दुनिया रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसी रहे और ये युद्ध जितना लंबा चले, उतना ही उसके लिए अच्छा है, जब अमेरिका और यूरोप लड़ते लड़ते कमजोर हो जाएंगे तो वो मौका देखकर ताइवान पर अटैक कर देगा। ताइवान के लिए चीन ने पहले से ही भयंकर तैयारी कर ली है।

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