इजराइल ने शुक्रवार को सीधे ईरान पर हमला बोल दिया। एक के बाद एक सैकड़ों हमले ईरान की न्यूक्लियर साइट और सैन्य ठिकानों पर इजराइली बल ने किए। इजराइल के इस हमले के बाद अब ईरान ने भी पलटवार कर दिया। ईरान ने सीधे बैलिस्टिक मिसाइलों को जंग में उतार दिया है। ईरान की ये बैलिस्टिक मिसाइलें सीधे इजराइल में घुस जा रही हैं। इजराइल का एयर डिफेंस सिस्टम इसको पूरी तरह से रोकने में नाकाम रहा है। इजराइल की राजधानी तेल अवीव के साथ-साथ अन्य इजराइली शहरों को भी ये मिसाइलें निशाना बना रही हैं।
ईरान के पास शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है
ईरान के पास कितनी खतरनाक मिसाइलें
ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें मध्य पूर्व में उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक क्षमताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। हाल के वर्षों में, ईरान ने अपनी मिसाइल प्रणाली में कई उन्नत मिसाइलों को शामिल किया है, जिनमें लंबी दूरी की मिसाइलें, हाइपरसोनिक मिसाइलें और सटीक मार्गदर्शन वाली मिसाइलें शामिल हैं।
खैबर (Kheibar)/ खोर्रमशहर-4(Khorramshahr-4)
- दायरा: लगभग 2,000 किलोमीटर (कुछ अनुमानों के अनुसार 4,000 किलोमीटर तक)
- वजन: 1500–1800 किलोग्राम वारहेड
- विशेषताए: यह मिसाइल ईरान के खोर्रमशहर मिसाइल परिवार की चौथी पीढ़ी है, जिसे 2023 में पेश किया गया था।
फत्ताह-1 (Fattah-1)
- प्रकार: हाइपरसोनिक मध्यम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल
- गति: मैक 13–15
- दायरा: लगभग 1,400 किलोमीटर
- विशेषताए: यह ईरान की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल है, जिसे 2023 में पेश किया गया था। इसकी उच्च गति और मार्गदर्शन प्रणाली इसे मिसाइल रक्षा प्रणालियों से बचने में सक्षम बनाती है।
गदर-110 (Ghadr-110)
- दायरा: 1800–2000 किलोमीटर
- विशेषताएं: यह मिसाइल शाहाब-3A का उन्नत संस्करण है, जिसमें तरल ईंधन पहले चरण और ठोस ईंधन दूसरे चरण में उपयोग किया गया है।
ईरान के हमले में तबाह हुआ इजराइली इमारत
जिहाद (Jihad)
- दायरा: 1000 किलोमीटर
- गति: मैक 8.5
- विशेषताएं: यह मिसाइल 2024 में पेश की गई थी और इसकी संरचना और प्लेटफ़ॉर्म इमाद और क़ियाम मिसाइलों के समान हैं।
दे़ज़फुल (Dezful)
- दायरा: 1,000 किलोमीटर से अधिक
- गति: मैक 7
- विशेषताएं: यह मिसाइल 2019 में पेश की गई थी और इसकी सर्कुलर एरर प्रोबेबल (CEP) लगभग 5 मीटर है, जो उच्च सटीकता को दर्शाता है।
फतह-360 (Fath-360)
इजराइल पर ईरान का मिसाइल से हमला
- दायरा: 100–120 किलोमीटर
- गति: मैक 3
- विशेषताएं: यह एक मोबाइल, उच्च गति वाली शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे 2022 में पेश किया गया था। यह ईरान और रूस दोनों द्वारा उपयोग की जाती है।
ईरान ने कहां-कहां हमला किया
ईरान ने 13 जून 2025 को इजराइल पर एक बड़े बैलिस्टिक मिसाइल हमले को अंजाम दिया, जिसे "ऑपरेशन ट्रू प्रमिस 3" कहा गया। इस हमले में लगभग 150 बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जो इजराइल के विभिन्न सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाकर दागी गईं। हालांकि अधिकांश मिसाइलों को इजराइल के आयरन डोम और अमेरिकी सहयोगी प्रणालियों द्वारा इंटरसेप्ट किया गया, फिर भी कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में सफल रहीं।
- तेल अवीव और रमत गान: इन शहरों में मिसाइल हमलों से तीन इजराइली नागरिकों की मृत्यु हुई और 43 अन्य घायल हुए। तेल अवीव में इजराइल रक्षा बलों का मुख्यालय (किर्यात) भी हमले का शिकार हुआ, जिससे महत्वपूर्ण क्षति हुई।
- नेवतिम एयरबेस: दक्षिणी इजराइल में स्थित इस एयरबेस पर कई मिसाइलें दागी गईं, जिससे दो हैंगरों की छतों में बड़े छेद हो गए और कई क्रेटर बने। हालांकि, इस हमले में कोई महत्वपूर्ण विमान नष्ट होने की पुष्टि नहीं हुई है।
- तेल नोफ एयरबेस: केंद्रीय इजराइल में स्थित इस एयरबेस पर भी मिसाइलें दागी गईं, जिससे कुछ सेकेंडरी विस्फोट हुए, संभवतः गोला-बारूद या ईंधन के कारण। यह एयरबेस इजराइल के परमाणु हथियारों के भंडारण के लिए जाना जाता है।
- मोसाद मुख्यालय (ग्लिलोट, तेल अवीव के पास): मोसाद के मुख्यालय के पास दो मिसाइलें गिरीं, लेकिन इनसे कोई महत्वपूर्ण क्षति नहीं हुई। एक मिसाइल लगभग 500 मीटर की दूरी पर गिरी, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
- रिशोन लेजियन और होद हाशारोन: इन शहरों में भी मिसाइलों के टुकड़े गिरे, जिससे कुछ घरों को नुकसान पहुंचा और कम से कम एक व्यक्ति घायल हुआ।
इजराइल के डिफेंस सिस्टम को भेद दे रही है ईरानी मिसाइलें
इजराइल के पास कैसे एयर डिफेंस सिस्टम
- आयरन डोम- ये छोटी दूरी की मिसाइलों और रॉकेटों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह 90% से अधिक की इंटरसेप्शन दर के साथ प्रभावी है, लेकिन हाइपरसोनिक या अत्यधिक गतिशील मिसाइलों के लिए इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
- डेविड्स स्लिंग: यह प्रणाली मध्यम दूरी की मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों को नष्ट करने के लिए है। यह आयरन डोम से अधिक लंबी दूरी की रक्षा प्रदान करती है, लेकिन अत्यधिक गति और गतिशीलता वाली मिसाइलों के सामने इतनी कारगर नहीं है।
- एरो-2 और एरो-3: यह प्रणालियां लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। एरो-3 प्रणाली बाहरी वातावरण में मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है, लेकिन ये भी ईरानी मिसाइलों के सामने उतना कारगर नहीं है।
कैसे फेल हो जा रहा है इजराइल का डिफेंस सिस्टम
हाइपरसोनिक और अत्यधिक गतिशील मिसाइलें डिफेंस प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं, क्योंकि इनकी ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन में समय की कमी होती है। यदि एक साथ कई मिसाइलें दागी जाती हैं, तो डिफेंस प्रणालियां ओवरलोड हो सकती हैं, जिससे कुछ मिसाइलें बच सकती हैं। ईरान इसी चालाकी के साथ हमले कर रहा है। ज्यादातर मिसाइलों को तो इजराइल रोक ले रहा है, लेकिन कुछ इजराइल के अंदर तक पहुंच जा रही हैं और उसे नुकसान पहुंचा रही है।
