Explained: ना सीट पर बनी बात, ना जाति समीकरण ने दिया साथ; इन पांच कारणों से हारा महागठबंधन

बिहार चुनाव 2025 में NDA ने क्लीन स्वीप कर दिया है। महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा जबकि किया। नीतीश कुमार के आगे महागठबंधन की रणनीति कमजोर पड़ गई। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि लोगों को तेजस्वी अपने वादों से नहीं लुभा पाए। आइए समझते हैं उन पांच कारणों को जिसके कारण महागठबंधन को मिली शिकस्त।

Mahagathbandhan Losing Reasons: बिहार चुनाव 2025 के नतीजे आ चुके हैं और इसमें महागठबंधन को करारी शिकस्त मिली है। NDA ने क्लीन स्वीप कर दिया है। जनसुराज भी अपना जादू चलाने में नाकाम रही। अब सवाल यह उठता है कि आखिर तेजस्वी को चेहरा बना कर चुनाव लड़ रही महागठबंधन में कहां कमी रही गई, राहुल-तेजस्वी का जादू क्यों फेल हो गया। बेरोजगारी की समस्या से जूझते बिहार क्यों हर घर नौकरी का वादा लुभा नहीं पाया। इन सवालों का जवाब इतना सीधा नहीं है। इन्ही के साथ नत्थी एक और सवाल है और वो यह है कि नीतीश के इतने दिनों तक लगातार शासन करने के बाद भी लोगों में इनसे ऊब क्यों नहीं हुई? इस सवाल के जवाब में ही महागठबंधन के हार का गणित छिपा हुआ है लेकिन यह भी काफी नहीं है।

mahagathbandhan reasons for losing election

वो पांच कारण जो बने महागठबंधन के हार का कारण

नहीं दिखी एंटी इंकम्बेंसी

चुनाव की घोषणा होने के ठीक पहले जिस तरह से उनको बीमार मुख्यमंत्री और भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह बताया गया, लोगों ने उसे पूरी तरह नकार दिया है। कोई एंटी इंकम्बेंसी की झलक भी नहीं दिखी। विधानसभा चुनावों में इसका कारण सरकार का पहली बार में 75 लाख महिलाओं के खाते में सीधे 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर करना एक बड़ी योजना मानी गई। इसके अलावा महिलाओं के बीच नीतीश की लोकप्रियता को नहीं नकारा जा सकता है। इसका कारण है, शराबबंदी। शराबबंदी की अहमियत नीतीश ने 2015 में ही समझ ली थी। ऐसी ही कुछ बड़ी योजनाओं के साथ तेजस्वी भी पूरे दमखम से मैदान में उतरे थे लेकिन महागठबंधन को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी आइए समझते हैं नीतीश फैक्टर से इतर पांच ऐसे कारण, जो महागठबंधन के हार का कारण बने।

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