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खूनी संघर्ष में क्यों बदल गई है डूरंड लाइन? अफगानिस्तान-पाकिस्तान को अलग करने वाली 2611 KM सीमा पर क्या है विवाद

डूरंड लाइन एक कल्पित रेखा है जिसे उपनिवेश काल में अंग्रेजों ने खींच दी। यह मान लिया गया कि डूरंड लाइन के एक तरह पाकिस्तान और दूसरी तरफ अफगानिस्तान होगा। यह रेखा भारत चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा जिसे एलएसी कहा जाता है, उसी तरह की है। डूरंड लाइन की लंबाई की अगर बात करें तो यह काफी लंबी है।

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Photo : AP
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बांटती है डूरंड लाइन।
Written by: Alok Rao
Updated Feb 28, 2026, 13:12 IST
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Durand Line: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मौजूद 2611 किलोमीटर की सीमा रेखा जिसे डूरंड लाइन कहा जाता है, यहां पिछले कुछ दिनों से भीषण हमले हो रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों एक दूसरे को निशाना बना रहे हैं। दोनों देशों ने एक दूसरे को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। इस आपसी संघर्ष में डूरंड लाइन एक तरह से 'जल' उठी है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच ताजा संघर्ष की कई वजहें हैं और इनमें डूरंड लाइन भी एक है। यहां हम बात करेंगे कि आखिर डूरंड लाइन है क्या और इसे लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद क्यों है? तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा यानी एलओसी और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर है। भारत और पाकिस्तान के बीच जमीन पर एलओसी और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर तो दिखता है लेकिन डूरंड लाइन कोई वास्तविक या धरातल पर कोई सीमा नहीं है, जिसे देखकर यह माना जाए कि यहां से पाकिस्तान और यहां से अफगानिस्तान शुरू होता है।

2,611 किलोमीटर लंबी है डूरंड लाइन

डूरंड लाइन एक कल्पित रेखा है जिसे उपनिवेश काल में अंग्रेजों ने खींच दी। यह मान लिया गया कि डूरंड लाइन के एक तरह पाकिस्तान और दूसरी तरफ अफगानिस्तान होगा। यह रेखा भारत चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा जिसे एलएसी कहा जाता है, उसी तरह की है। डूरंड लाइन की लंबाई की अगर बात करें तो यह काफी लंबी है। इसकी लंबाई 2,611 किलोमीटर है। यह पाकिस्तान के उस उत्तरी हिस्से से गुजरती है जहां पर पश्तून आबादी बहुत ज्यादा है। डूरंड लाइन के इस बंटवारे ने पश्तूनों को दो हिस्से में तो बांट दिया लेकिन सरहद की ये दूरी उन्हें अलग नहीं कर पाई। दो अलग देशों में रहते हुए इनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ। एक दूसरे के यहां इनकी रिश्तेदारियां हैं और इनका आज भी एक-दूसरे के यहां आना-जाना होता है।

इसे औपचारिक सीमा नहीं मानता अफगानिस्तान

डूरंड लाइन को पाकिस्तान तो मानता है लेकिन अफगानिस्तान और वहां के लोग इसे कभी औपचारिक सीमा रेखा नहीं माना। खासकर अगस्त 2021 में तालिबान जब सत्ता में आया तो उसने डूरंड लाइन को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। तालिबान का मानना है कि अफगानिस्तान का इलाका पाकिस्तान के अंदरूनी हिस्सों तक जाता है।

Durand Line

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वह मानता है कि उसके इलाके पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इस डूरंड लाइन को 19वीं सदी में ब्रिटिश अधिकारी मॉर्टिमर डूरंड ने खींची। इसी मॉर्टिमर डूरंड के नाम पर इसका नाम डूरंड लाइन रखा गया। डूरंड ने उस समय के अफगान शासक अब्दुर रहमान के साथ बातचीत के बाद यह सीमा तय की थी।

1893 में ब्रिटिश इंडिया-अफगानिस्तान के बीच समझौता

साल 1893 में ब्रिटिश इंडिया और अफगानिस्तान ने मोटे तौर पर अपने इलाकों की पहचान करते हुए एक समझौता साइन किया और 1947 में जब पाकिस्तान बना तो यही उसकी पश्चिमी सीमा मान ली गई। पाकिस्तान इसे वैध एवं आधिकारिक सीमा मानता है जबकि अफगान सरकारों ने इसे कभी औपचारिक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के रूप में स्वीकार नहीं किया। वह इसकी वैधता को चुनौती देता आया है। अफगानिस्तान दलील देता है कि यह समझौता ब्रिटिश हुकूमत के दबाव में हुआ था, इसलिए इसके हिस्सा वाले इलाके पर पाकिस्तान का नियंत्रण वैध नहीं है। सीमा का यह विवाद दोनों देशों के बीच तभी से चला आ रहा है।

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अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई से भड़का पाकिस्तान

डूरंड लाइन पर अभी जो युद्ध चल रहा है। उसके तार अफगानिस्तान की जवाबी कार्रवाई से जुड़े हैं। कुछ दिनों पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमला किया। इस हमले में एक ही परिवार या कहिए कुनबे के 16 लोग मारे गए। इस हमले में एक साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग, महिलाओं और अन्य लोगों की जान गई। पाकिस्तान का दावा है कि उसने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए अफगानिस्तान की फौज ने डूरंड लाइन के आस-पास पाकिस्तानी चौकियों पर हमले किए और पाकिस्तानी सैनिकों के मारने का दावा किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया। पाकिस्तान का आरोप कि तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के आतंकी अफगानिस्तान से आकर उसके यहां आतंकी हमले करते हैं और इन आतंकियों को अफगानिस्तान में पनाह और संरक्षण मिलता है। हालांकि, अफगानिस्तान, पाकिस्तान के इन दावों को खारिज करता आया है। अफगानिस्तान का कहना है कि टीटीपी की आतंकी गतिविधियां उसके यहां से नहीं चलतीं।

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