भदोही से 'संत रविदास नगर': मायावती...अखिलेश और अब योगी, क्यों बार-बार बदली पहचान? 2027 चुनाव से पहले क्या है सियासी गणित

Bhadohi Name Change: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भदोही के नाम को लेकर सियासत फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले का नाम दोबारा 'संत रविदास नगर भदोही' करने का ऐलान किया है। भदोही के नामकरण का इतिहास अलग-अलग सरकारों के राजनीतिक फैसलों से जुड़ा रहा है, जिसमें मायावती और अखिलेश यादव के कार्यकाल में भी नाम बदला गया। अब योगी सरकार के फैसले ने इस पुराने मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।

Bhadohi Name Change: मौसम का मिजाज जहां धीरे-धीरे ठंड की ओर बढ़ रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। इसकी वजह 2027 में होने वाला विधानसभा चुनाव, जिसके लिए राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी रणनीति और सियासी समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक ऐलान ने यूपी की राजनीति में एक नया राग छेड़ दिया है। सवाल उठने लगा है कि क्या योगी आदित्यनाथ भी अब मायावती की राह पर आगे बढ़ रहे हैं?

Bhadohi Name Change

भदोही की पहचान का राजनीतिक सफर

दरअसल, उत्तर प्रदेश में जिलों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही जिले का नाम बदलकर एक बार फिर संत रविदास नगर (संत रविदास नगर भदोही) करने का ऐलान किया। कालीन उद्योग के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाले भदोही को नई प्रशासनिक पहचान देने की इस घोषणा को केवल नाम बदलने के फैसले के तौर पर ही नहीं, बल्कि चुनाव से पहले इसके राजनीतिक मायनों के लिहाज से भी देखा जा रहा है। भदोही में आयोजित जनसभा और विकास परियोजनाओं के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि महान संत और समाज सुधारक रविदास के विचारों, शिक्षाओं और योगदान को स्थायी पहचान देने के लक्ष्य से यह फैसला लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सरकारी कामकाज और प्रशासनिक दस्तावेजों में भी जिले को इसी नाम से जाना जाएगा।

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