Cannes Film Festival: हर साल की तरह साल 2026 में सिनेमा प्रेमियों के लिए कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) की शुरुआत 12 मई से होने जा रही है। दर्शकों की नजरें कान्स फेस्टिवल पर इसलिए भी टिकी हुई है क्योंकि सेलेब्स के लिए यह बहुत बड़ा और खास इवेंट है। इस साल कान्स फिल्म फेस्टिवल 12 मई से 23 मई 2026 तक चलेगा। भारत के समय के हिसाब से इसकी ओपनिंग सेरेमनी 12 मई की शाम से होगी। यह फेस्टिवल हर साल की तरह फ्रांस के खूबसूरत शहर कान्स में होने जा रहा है। फैन्स इस फेस्टिवल के लिए बेहद उत्साहित नजर जा रहे हैं। इसे दुनिया के सिनेमा का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। इस फेस्टिवल के लिए दौरान फिल्मों को एंटरटेन करने के रूप में ही नहीं बल्कि कला के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जाता है। तो चलिए जानते हैं क्या है कान्स फिल्म फेस्टिवल का इतिहास और इसमें फिल्मों को किस तरह शामिल किया जाता है।
जानिए कान्स फिल्म फेस्टिवल का इतिहास (Pic Credit: fraseryachts.com)
जानिए कब हुई थी 'कान्स फिल्म फेस्टिवल' की शुरुआत?
इस फेस्टिवल की शुरुआत 1938 में फिलिप अर्लेंगर के आईडिया से हुई थी। युद्ध के कारण यह प्रोजेक्ट बीच में ही रुक गया था, जिसे बाद में जीन जी और अल्बर्ट सारो ने आगे बढ़ाया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इसका पहला एडिशन सितंबर 1946 में होस्ट किया गया था। उस दौर के बड़े-बड़े सितारे कान्स और फ्रेंच रिवेरा की चकाचौंध को देखने वहां पहुंचे थे। कान्स फिल्म फेस्टिवल को 2003 तक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल कहा जाता था। यह फ्रांस के कान्स शहर में हर साल होस्ट किया जाता, जिसमें दुनिया भर से सभी तरह की नई फिल्मों के साथ-साथ डॉक्यूमेंट्री को शामिल कर उनकी झलक दिखाई जाती है। 1946 में शुरू हुआ यह फेस्टिवल, जिसमें सिर्फ बुलाए गए लोग ही शामिल हो सकते हैं। (इसे भी पढ़ें: Pati Patni Aur Woh 2 की रिलीज से पहले ट्रोलर्स के हत्थे चढ़ीं Rakul Preet Singh, जंगल सफारी में ये हरकत पड़ी भारी)
क्या है 'कान्स फिल्म फेस्टिवल' की खासियत?
कान्स फिल्म फेस्टिवल की चर्चा दुनिया भर में इसलिए होती है क्योंकि यहा बड़ी-बड़ी कमर्शियल फिल्मों को ही तव्वजो नहीं दी जाती बल्कि कहानी और क्रिएटिविटी को भी ज्यादा महत्व दिया जाता है। इस फेस्टिवल में दुनिया भर के बेहतरीन फिल्म निर्माता-निर्देशक, राइटर्स और एक्टर्स अपनी फिल्मों को लेकर आते हैं। यहां का सबसे बड़ा अवॉर्ड 'पाम ड’ओर' (Palme d'Or) है, जो बेहतरीन फिल्म को दिया जाता है। इसे फिल्म इंडस्ट्री का सबसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड माना जाता है। कई फिल्मों को कांस में खूब पसंद किया गया और आगे चलकर वो ऑस्कर तक पहुंचीं। इन फिल्मों की चर्चा दुनिया भर में हुई। फिल्म दिखाने के अलावा यहां इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन, फिल्म मार्केट और को-प्रोडक्शन डील्स की जाती हैं। इसी वजह से कान्स फिल्ममेकर्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। (इसे भो पढ़ें: '10 करोड़ वरना गोली मार देंगे...' Elvish Yadav को मिली जान से मारने की धमकी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग का बने निशाना)
कैसे फिल्मों को किया जाता है शामिल?
कान्स फिल्म फेस्टिवल में फिल्मों को एंट्री मिलना बहुत मुश्किल होता है। हर दुनिया भर से हजारों की तादात में फिल्मों को भेजा जाता है। हालांकि बहुत ही चुनिंदा फिल्मों को इस फेस्टिवल में एंट्री मिल पाती है। यह प्रोसेस एक ऑफिशियल कमिटी चलाती है, जो हर साल लगभग 2,000 से ज्यादा एंट्रीज की समीक्षा करके लगभग 50 से 60 फीचर फिल्मों का चयन करती है। फिल्मों का चुनाव करने के एक बात अहम है कि फिल्में पिछले 12 महीनों के अंदर बनी हों। इन फिल्मों ऑनलाइन या सिनेमाघरों में रिलीज ना किया गया हो और 60 मिनट से ज्यादा लंबी ना हों।
