Priyanka Chopra lauds Yashoda Lodhi: कभी गांव की गलियों से निकलने वाली आवाज सोशल मीडिया पर इतनी दूर तक पहुंचेगी, शायद यशोदा लोधी ने भी नहीं सोचा होगा। उत्तर प्रदेश की ‘देहाती मैडम’ आज अपने देसी अंदाज में अंग्रेजी सिखाकर लोगों का ध्यान खींच रही हैं। यूट्यूब पर गांव के बच्चों और आम लोगों को अंग्रेजी पढ़ाने वाली यशोदा का एक वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है। खास बात यह है कि उनके इस अंदाज ने बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) का भी ध्यान खींचा। 4 अक्टूबर को शेयर किए गए वीडियो में यशोदा ने अंग्रेजी बोलने के एक ऐसे पहलू पर बात की, जिसे लेकर बहुत से लोग झिझकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि भाषा सीखते समय हर शब्द को परफेक्ट बोलने की कोशिश से ज्यादा जरूरी है खुद पर भरोसा रखना और बिना डरे बोलना। यही बेबाक अंदाज इंटरनेट यूजर्स को खूब पसंद आया। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-जैकी श्रॉफ की Kaali Kheti की रिलीज डेट टली, अब इस दिन सिनेमाघरों में दस्तक देगी हॉरर फिल्म)
प्रियंका चोपड़ा ने की तारीफ (pic credit-instagram)
प्रियंका चोपड़ा ने की तारीफ
प्रियंका चोपड़ा ने जब यशोदा का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया तो वह और ज्यादा लोगों तक पहुंच गया। इसके बाद यशोदा ने प्रियंका को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रियंका के इस छोटे से कदम ने उन्हें खुद पर भरोसा रखने और ऐसा कंटेंट बनाने के लिए प्रेरित किया, जो लोगों को आगे बढ़ने की हिम्मत दे। यशोदा ने बताया कि उन्होंने यह ‘परफेक्शन’ वाला वीडियो अपने पति की डांट के बावजूद बनाया था। इसके बाद उन्होंने एक नए वीडियो के जरिए मृणाल ठाकुर, आर. माधवन और अभय देओल को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उनका सपना हमेशा से देश की हर महिला और हर उस इंसान को पढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने का रहा है, जो भाषा की वजह से खुद को पीछे समझता है।
यशोदा के लिए अंग्रेजी सिखाना सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने की कोशिश है। उनका कहना है कि अगर उनकी छोटी सी कोशिश किसी को कुछ नया सीखने और खुद पर भरोसा करने का हौसला देती है, तो यही उनके लिए सबसे बड़ी कामयाबी है। सोशल मीडिया पर मिल रहे प्यार और तारीफ के लिए उन्होंने सभी का शुक्रिया भी कहा है। यशोदा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के सिराथू नगर पंचायत के लोधन का पुरवा गांव की रहने वाली हैं। करीब चार साल पहले उनके पति का एक्सीडेंट हो गया था। वह लंबे समय तक बिस्तर पर रहे और परिवार की आमदनी का जरिया भी बंद हो गया। ऐसे मुश्किल दौर में यशोदा ने हार मानने के बजाय खुद को आगे बढ़ाने का फैसला किया। यशोदा ने 12वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने किसी संस्थान से खास ट्रेनिंग लेने के बजाय खुद ही नई चीजें सीखीं और अपनी स्किल्स पर काम किया। धीरे-धीरे उन्हें समझ आया कि गांव के लोगों और गृहिणियों को स्पोकन इंग्लिश सिखाना उनके लिए सही रास्ता हो सकता है। उन्होंने इसी काम को अपना मिशन बना लिया। खास बात यह है कि अंग्रेजी सिखाने के लिए उन्होंने कभी कोई ऑफिशियल ट्रेनिंग नहीं ली।
