West Bengal Election 2026: आज, गुरुवार को पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान हो रहा है। लोकतंत्र के इस महापर्व के बीच 2021 के उन आंकड़ों को समझना जरूरी है, जिन्होंने बंगाल की राजनीति की दिशा तय की थी। 2021 के नतीजे केवल एक पार्टी की जीत की कहानी नहीं थे, बल्कि वे कड़े संघर्ष और 'एक-एक वोट' की कीमत बताने वाले आंकड़े भी थे।
2021 के बंगाल चुनाव के आंकड़े
ममता की हैट्रिक और प्रचंड बहुमत का गणित
2021 के विधनसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। कड़े मुकाबले के बीच TMC ने न केवल सत्ता बचाई, बल्कि प्रचंड बहुमत हासिल किया। 2021 में कुल सीटें 294 थीं यानी बहुमत का आंकड़ा था 148, जिसमें से AITC ने 215 सीटें जीतकर बहुमत से 67 सीटें आगे रही।
BJP ने जीती 77 सीटें
आंकड़ों के लिहाज से TMC ने 73.1% सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि बीजेपी 26.2% सीटों पर सिमट गई। हालांकि, बीजेपी ने 2016 की तुलना में अपनी स्थिति को काफी मजबूत किया था। भाजपा ने 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी।
वोटर टर्नआउट: कोरोना काल में भी दिखा जज्बा
कोविड-19 प्रोटोकॉल के बीच 8 चरणों में हुए इस चुनाव में बंगाल के मतदाताओं ने जबरदस्त उत्साह दिखाया। उसके पहले के चुनाव यानी 2016 के विधानसभा इलेक्शन से तुलना करें तो 2021 का टर्नआउट 82.3% रहा, 2016 के 83.2% से मात्र 0.9% कम। यह आंकड़ा दिखाता है कि बंगाल की जनता अपनी लोकतांत्रिक शक्ति के प्रति कितनी सजग है।
7 सीटों पर मार्जिन ऑफ विक्ट्री रही बेहद कम
एडीआर (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के चुनाव में कई सीटों पर मुकाबला इतना कड़ा था कि जीत-हार का अंतर बेहद मामूली रहा। राज्य की 7 सीटों पर जीत का अंतर 1000 वोटों से भी कम था। चुनाव में हर एक वोट कितना कीमती है और थोड़ा सा झुकाव पूरे नतीजे को पलट सकता है, ये आंकड़े यही दिखाते हैं।
2021 से 2026 तक का सफर
2021 के चुनाव ने दिखाया कि जीत का मतलब हमेशा भारी जनसमर्थन नहीं होता, बल्कि कई बार रणनीतिक बढ़त और कम मार्जिन का खेल भी सत्ता तय कर देता है। आज जब 2026 के लिए मतदान हो रहा है, तो राजनीतिक दलों की नजरें उन कम मार्जिन वाली सीटों पर जरूर होंगी, जहां पिछली बार बाजी हाथ से फिसल गई थी। 4 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे कि क्या 2021 का इतिहास दोहराया जाएगा या बंगाल नया अध्याय लिखेगा।
