MP Chunav News: 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक का दौर तेज हो चुका है। मध्य प्रदेश में चुनावी बिगुल बजने से पहले ही भाजपा ने अपने 79 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करके ये संदेश देने की कोशिश की है कि वो इस चुनाव के लिए कितनी गंभीर है। इस बीच भाजपा ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का आरोप लगाते हुए ये कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक प्रत्याशियों की एक भी लिस्ट कांग्रेस ने जारी नहीं की है। कांग्रेस में जिस तरह से गुटबाजी और अंतर्कलह देखी जा रही है, उससे यही लगता है कि कमलनाथ अपने कोटे से टिकट दिलाना चाहते हैं, दिग्विजय सिंह अपने कोटे को लेकर लेकर अलग तैयार बैठे हैं, जीतू पटवारी का अपना कोटा है, अजय सिंह राहुल का अलग अपना कोटा है।
विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की खटपट आने लगी सामने।
क्या मध्य प्रदेश कांग्रेस में पड़ चुकी है दरारें?
BJP ये आरोप लगा रही है कि कांग्रेस में सिर फुटव्वल के हालात बन चुके हैं। कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की 9 घंटे चलने वाली बैठक से कमलनाथ 3 घंटे में ही बाहर हो जाते हैं। ऐसा दावा किया जा रहा है कि ये मामला कांग्रेस VS कांग्रेस का ही है। भाजपा ने दावा किया है कि कांग्रेस में दरारें पड़ चुकी हैं और ये विवाद प्रदेश कांग्रेस vs राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच है। इसमें सुरजेवाला vs कमलनाथ के बीच और कमलनाथ vs दिग्विजय सिंह की जंग है। कहीं न कहीं अगर चुनाव से पहले कांग्रेस की अंतर्कलह खुलकर सामने आने लगी है तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
कांग्रेस की जनाक्रोश यात्रा पर भाजपा का तंज
भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की जनाक्रोश यात्रा को लेकर भी तंज कसा है और कहा है कि जन आक्रोश यात्रा में खाली कुर्सियां देख कांग्रेसियों के उड़े होश, एमपी में अब कांग्रेस के लिए कोई स्कोप नहीं है। भाजपा ने ये भा दावा किया है कि कांग्रेस को अपने जन आक्रोश यात्रा में आम जनता, अपने कार्यकर्ता, महिला, युवा, पिछड़े समाज के आक्रोश का भी सामना करना पड़ा। जिसे देखकर पार्टी के नेताओं का आत्मविश्वास पूरी तरह डगमगा गया है।
क्या कहता है मध्य प्रदेश का सियासी समीकरण?
इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। अगर समीकरण को समझा जाए, तो पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान एमपी कांग्रेस के दो प्रमुख चेहरे माने जा रहे थे, जिनमें कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल थे। सिंधिया और कमलनाथ में से किसी एक को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के फैसले में कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को दरकिनार कर दिया। सिंधिया के समर्थकों में इसे लेकर भारी नाराजगी देखी गई थी, जब सिंधिया ने भाजपा का दामन थामा तो उनके चाहने वालों ने भी कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। ऐसे में इस बार के चुनाव में कांग्रेस को सिंधिया की कमी जरूर खलेगी। चुनावी युद्ध में किसकी विजय होगी, इसका जवाब तो नतीजे सामने आने के बाद ही पता चलेगा, मगर यहां ये समझने की जरूरत है कि अगर सचमुच कांग्रेस में अंदरूनी कलह इस कदर बढ़ गई है तो निश्चित तौर पर मुसीबत बढ़ सकती है। दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और जीतू पटवारी ये कांग्रेस के वो तीन नेता हैं जिनके बीच खटपट की बात कही जा रही है। अगर ये खटपट चुनाव आते आते और बढ़ती है तो चुनाव में कांग्रेस की जीत का सपना, सपना ही रह जाएगा।
